#bhikhariyo ki samsya

                              भिखारियों की समस्या 

   
  पहले समय में भिखारी धार्मिक आस्था से जुड़े हुए थे। उनके  भरण -पोषण से लोगो को लगता था वे दान -पुण्य करके उनका भला कर रहे है। उनके माध्यम से उनका परलोक सुधर रहा है। उनकी आस्था को भिखारियों ने अपना अधिकार समझ लिया था जिसके कारण मंदिरों में जाने से लोगो को डर सताने लगा था। वे एक भिखारी को कुछ देते तो भिखारियों का झुण्ड उन्हें  देने के लिए विवश कर देता था। भिखारियों से पिंड छुड़ाना मुश्किल हो जाता था। ये समस्या इतनी भयंकर हो गई कि सरकार को इनसे निबटने के लिए सामने आना पड़ा। 
       अब सरकार की सख्ती के कारण भिखारी मंदिर के बाहर दिखाई नहीं देते उन्होंने दूसरे ठिकाने ढूंढ लिए है। अब ये ट्रैफिक सिगनल पर नए तरिके अपना कर भीख मांगते दिखाई देते है। ये सिग्नल उनकी कमाई के अड्डे बन गए है। कारों की खिड़कियाँ बंद करके बैठे लोग उनसे बच जाते है लेकिन खुली खिड़की वाले या दोपहिया गाड़ी वाले उनके कारण परेशान होते रहते है। 
     बस के अंदर या रेलगाड़ी में सफर करने वालो को भीख मांगने वाले हिजड़े बहुत परेशान करते है। उनके कद -काठी, हाब -भाव ,बोलने का तरीका उनके सामने मुँह खोलने नहीं देता। यदि हम जैसे हिम्म्त करके मना कर दे तो उनके कहे हुए गंदे शब्द सामने वाले को झकझोर देते है। ऐसे ही एक हिजड़े को मेने पैसे देने से मना कर दिया। तो वह बोला "-पैसे नहीं है तो ये पर्स क्यों ले रखा है। चल मेरे साथ पैसो के ढेर लग जायेंगे। "
     उसके शब्द सुनकर मॅ शर्मिंदा हो गई। मुझे लगा भिखारी वह नहीं बल्कि मै हुँ।आम भिखारियों को मना करते लोगो को देखा है। लेकिन हिजड़ो की तालियाँ बजाकर माँगने पर कोई उन्हें देने से नानुकुर नहीं करता। 
     भिखारी हर उस जगह मिल जायेंगे जहाँ लोग बहुत अधिक संख्या में जाते है। इसका उदाहरण मेट्रो स्टेशन बन गए है। अधिकतर मेट्रो स्टेशनों पर भिखारियों का जमाबड़ा दिखाई दे जाता है। ये स्थान ऐसे होते है जहाँ अधिकतर  इंसान को जाना पड़ता है। 
     भिखारियों को  देखकर भारत की गरीबी याद आ जाती है। बाहर से आने वालो पर गलत प्रभाव पड़ता है। इन भिखारियों के पास अच्छे कपड़े होते है लेकिन अच्छे रख-रखाव के कारण भीख नहीं मिलेगी इस लिए फटे -पुराने कपड़ो में,बिना नहाए ,गंदे बिखरे वालो में  रह कर अपने प्रति लोगो के मन में दया की भावना पैदा करके कमाने में लगे रहते है। पिछली सरकार की सख्ती के कारण भिखारी काफी समय तक दिखाई नहीं दिए लेकिन फिर से बहुत अधिक संख्या में दिखाई दे रहे है। 
        ये भिखारी आलसी होते है। बूढ़े -अपाहिज लोगो को देखकर दया उपजती है लेकिन जवान लोगो को देखकर गुस्सा आता है। अपनी मेहनत की कमाई इन्हे देने का मन नहीं करता 
       कुछ समय पहले अख़बार में खबर पढ़कर हैरान रह गई। कुछ  घरों के लोग दुबई जैसे देशो में 3 महीनो के लिए  जाते है। वहाँ वे भीख माँग कर इतना अधिक कमा लेते हे कि भारत में शानोशौकत की जिंदगी गुजरते है।  उन्हें इतने कम समय में इतनी अधिक भीख मिल जाती है कि उनका एक साल का खर्च निकल जाता है। उनके रोजगार के बारे में लोगो को सही जानकारी नहीं होती साधारण लोगो को उनका ठाठ -बाट से रहना दिखाई देता है। 
      भिखारियों के भीख माँगने के ठिकानो की नीलामी होती है। एक भिखारी अपनी जगह पर दूसरे भिखारियों को बैठने नहीं देता। उनके बीच का झगड़ा हैरान कर देता है। 
      एक दिन मेंने  सुबह शाहदरा मेट्रो स्टेशन पर एक जवां आदमी को अपने पिता को बिठाते हुए देखा वह अपने पिता से कह रहा था -" पिताजी आप यहाँ बैठ जाओ। ये तुम्हारा खाना और पानी रखा है। "इसे देखकर मुझे अपने बच्चों की परवरिश पर गुस्सा आया। जिन बच्चों को पालने के लिए अभिभावक दिन -रात मेहनत करते है। उन्ही के बच्चे बुढ़ापे में उन्हें  भिखारी बना देते है। 
     कई भिखारी आम लोगो से बहुत ज्यादा अमीर होते है । उनकी अमीरी के बारे में सुनकर आँखे खुली रह जाती है। 
    भारत में बहुत ज्यादा संख्या में बच्चे उठाये जाते है। जिन्हे बाद में गलत कार्यो में लगा दिया जाता है। ट्रैफिक सिगनलों पर सामान बेचते बच्चे अधिकतर अपहृत होते है। गरीब घरों के बच्चे न के बराबर होते है। यदि इन पर पाबंदी नहीं लगाई गई तो आने वाले समय में हर तरफ भिखारी दिखाई देने लगेंगे।  

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