राजनाथ और सार्क सम्मेलन
पहली बार मुझे एहसास हुआ मैं सशक्त गृहमंत्री के राज में रह रही हूँ। अब से पहले जितने भी नेता थे वे दूसरे देशो के सामने दयनीय अवस्था में अपने दर्द को बयान करते थे। दयनीय अवस्था के लोगो पर केवल दया की जाती हैं। साथ ही कमजोर लोगो पर ध्यान कम दिया जाता है। हमारी समस्या लोगो के लिए अहम नही थी।
एक बार विदेश में मैंने ये समस्या रखी तब मुझे जबाब मिला -"जो समस्या तुम्हारी है जिस समस्या से किसी अन्य पर असर नही होता। उसके लिए तुम किसी अन्य से मदद की उम्मीद कर रहे हो। तुम्हारा साथ कोई क्यों देगा। सबसे पहले भारत के नेताओ को उसका सामना करने के लिए कदम उठाने चाहिए जब तुम कदम उठाने में असमर्थ हो तो दुसरो से उम्मीद मत करो। ." सभी देशो में भारतीय अकर्मण्यता का यही सन्देश जाता था। भारत केवल हाथ जोड़े खड़ा रहने वाला देश है इसके बस में गिड़गिड़ाने के आलावा कुछ नही है। यह किसी का कुछ बिगाड़ नही सकता।
आज हमारे नेताओ की छवि बदल रही है रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तिया याद आ रही है।
"क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो।
उसको क्या जो दंतहीन ,विषहीन विनीत सरल हो। "
राजनाथ सिंह के सार्क सम्मेलन में पहुँचते ही कोई बड़ा नेता उन्हें लेने एयरपोट पर नही आया। सारे भारतीय मीडिया कर्मियों को उनके साथ अंदर नही जाने दिया। अन्य रिपोर्टरों को उनके भाषण को रिकॉर्ड करने की अनुमति प्रदान नही की गयी। उन्होंने प्रतिरोध स्वरूप हाथ गर्म जोशी के साथ नही मिलाया। उन्होंने पाकिस्तानी गृहमंत्री के लंच का निमन्त्रण भी ठुकरा दिया। अब तक जितने भी नेता पाकिस्तान में गए उन्होंने इससे पहले पाकिस्तानी नेताओ की भूरी -भूरी प्रशंसा की।भले ही उनके मन में कड़वाहट भरी थी। इससे उन्होंने भारत का कभी महत्ब नही समझा। भारत पाकिस्तान की अपेक्षा अधिक ताकतबर है। 1971 के युद्ध में पाकिस्तानी सेना को मुँह की खानी पड़ी थी। वह हार बहुत शर्मदायक थी वरना अब तक पाकिस्तान कई और हमले भारत पर कर चुका होता।
जितनी पाकिस्तान की जनसँख्या है। उससे अधिक भारत की जेलो में कैदी है। .
भारत में आतंकवादी घटनाओ का जन्मदाता होने के बाद भी पाकिस्तान बुरहानवानी जैसे लोगो को महिमामंडित करके उन्हें शहीद की श्रेणी में रखता है। जिसने भारत के 60 से अधिक लोगो को आतंकवादी बनने के लिए प्रेरित किया। सारा संसार आतंकवाद से कराह रहा है। पाकिस्तान में आतंकवादी सरकार की नाक में दम किये हुए है। लेकिन वह एक तरफ आतंकवाद की बुराई करता है लेकिन भारत के आतंकवादियो को पाल पोस रहा है। यह दोरहा रवैया संसार के सामने लाना जरूरी था। यदि राजनाथ का भाषण कवर करने की पाकिस्तान अनुमति दे देता तो उसकी पोल सारे संसार के सामने खुल जाती।
राजनाथ और मोदी जैसे नेताओ से पाकिस्तान डरने लगा है। मोदी ने पाकिस्तान के सभी हमदर्द देशो से दोस्ती का हाथ मिला लिया है। इस कारण पाकिस्तान छटपटा रहा है। इसकी प्रतिक्रिया दिखाई देनी शुरू हो गयी है। पाकिस्तान को अमरीका की तरफ से मिलने वाली मदद पहले की अपेक्षा चौथाई रह गयी है। जिन देशो में पाकिस्तानी लोगो को हाथो -हाथ लिया जाता था। वहाँ भारतीयों को स्थान मिलने लगा है।
पाकिस्तान को कश्मीर का दर्द दिखाई देता है। लेकिन जिसे वह आजाद कश्मीर की संज्ञा देता है। जो पाकिस्तान के नियंत्रण में है। उनकी कराह सुनाई नही देती है। जिन्हें वहाँ के वाशिंदों ने जानवरो की तरह जीने के लिए मजबूर कर दिया है। मैं चाहती हु हमारे नेता वहाँ की हालत कश्मीरियो के सामने लाये। जिससे उनकी आँखों के सामने सच्चाई आये। आज सिर झुकाये मुश्कुराने वाले नेताओ की नही जुझारू और कर्मठ नेताओ की जरूरत है। जो हमें मिल गए है।
पहली बार मुझे एहसास हुआ मैं सशक्त गृहमंत्री के राज में रह रही हूँ। अब से पहले जितने भी नेता थे वे दूसरे देशो के सामने दयनीय अवस्था में अपने दर्द को बयान करते थे। दयनीय अवस्था के लोगो पर केवल दया की जाती हैं। साथ ही कमजोर लोगो पर ध्यान कम दिया जाता है। हमारी समस्या लोगो के लिए अहम नही थी।
एक बार विदेश में मैंने ये समस्या रखी तब मुझे जबाब मिला -"जो समस्या तुम्हारी है जिस समस्या से किसी अन्य पर असर नही होता। उसके लिए तुम किसी अन्य से मदद की उम्मीद कर रहे हो। तुम्हारा साथ कोई क्यों देगा। सबसे पहले भारत के नेताओ को उसका सामना करने के लिए कदम उठाने चाहिए जब तुम कदम उठाने में असमर्थ हो तो दुसरो से उम्मीद मत करो। ." सभी देशो में भारतीय अकर्मण्यता का यही सन्देश जाता था। भारत केवल हाथ जोड़े खड़ा रहने वाला देश है इसके बस में गिड़गिड़ाने के आलावा कुछ नही है। यह किसी का कुछ बिगाड़ नही सकता।
आज हमारे नेताओ की छवि बदल रही है रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तिया याद आ रही है।
"क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो।
उसको क्या जो दंतहीन ,विषहीन विनीत सरल हो। "
राजनाथ सिंह के सार्क सम्मेलन में पहुँचते ही कोई बड़ा नेता उन्हें लेने एयरपोट पर नही आया। सारे भारतीय मीडिया कर्मियों को उनके साथ अंदर नही जाने दिया। अन्य रिपोर्टरों को उनके भाषण को रिकॉर्ड करने की अनुमति प्रदान नही की गयी। उन्होंने प्रतिरोध स्वरूप हाथ गर्म जोशी के साथ नही मिलाया। उन्होंने पाकिस्तानी गृहमंत्री के लंच का निमन्त्रण भी ठुकरा दिया। अब तक जितने भी नेता पाकिस्तान में गए उन्होंने इससे पहले पाकिस्तानी नेताओ की भूरी -भूरी प्रशंसा की।भले ही उनके मन में कड़वाहट भरी थी। इससे उन्होंने भारत का कभी महत्ब नही समझा। भारत पाकिस्तान की अपेक्षा अधिक ताकतबर है। 1971 के युद्ध में पाकिस्तानी सेना को मुँह की खानी पड़ी थी। वह हार बहुत शर्मदायक थी वरना अब तक पाकिस्तान कई और हमले भारत पर कर चुका होता।
जितनी पाकिस्तान की जनसँख्या है। उससे अधिक भारत की जेलो में कैदी है। .
भारत में आतंकवादी घटनाओ का जन्मदाता होने के बाद भी पाकिस्तान बुरहानवानी जैसे लोगो को महिमामंडित करके उन्हें शहीद की श्रेणी में रखता है। जिसने भारत के 60 से अधिक लोगो को आतंकवादी बनने के लिए प्रेरित किया। सारा संसार आतंकवाद से कराह रहा है। पाकिस्तान में आतंकवादी सरकार की नाक में दम किये हुए है। लेकिन वह एक तरफ आतंकवाद की बुराई करता है लेकिन भारत के आतंकवादियो को पाल पोस रहा है। यह दोरहा रवैया संसार के सामने लाना जरूरी था। यदि राजनाथ का भाषण कवर करने की पाकिस्तान अनुमति दे देता तो उसकी पोल सारे संसार के सामने खुल जाती।
राजनाथ और मोदी जैसे नेताओ से पाकिस्तान डरने लगा है। मोदी ने पाकिस्तान के सभी हमदर्द देशो से दोस्ती का हाथ मिला लिया है। इस कारण पाकिस्तान छटपटा रहा है। इसकी प्रतिक्रिया दिखाई देनी शुरू हो गयी है। पाकिस्तान को अमरीका की तरफ से मिलने वाली मदद पहले की अपेक्षा चौथाई रह गयी है। जिन देशो में पाकिस्तानी लोगो को हाथो -हाथ लिया जाता था। वहाँ भारतीयों को स्थान मिलने लगा है।
पाकिस्तान को कश्मीर का दर्द दिखाई देता है। लेकिन जिसे वह आजाद कश्मीर की संज्ञा देता है। जो पाकिस्तान के नियंत्रण में है। उनकी कराह सुनाई नही देती है। जिन्हें वहाँ के वाशिंदों ने जानवरो की तरह जीने के लिए मजबूर कर दिया है। मैं चाहती हु हमारे नेता वहाँ की हालत कश्मीरियो के सामने लाये। जिससे उनकी आँखों के सामने सच्चाई आये। आज सिर झुकाये मुश्कुराने वाले नेताओ की नही जुझारू और कर्मठ नेताओ की जरूरत है। जो हमें मिल गए है।

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