योग और मानव
इसके माध्यम से कम समय और पैसे के द्वारा इंसान सदैब स्वस्थ बना रह सकता है।एलोपेथिक इलाज यदि हमारी एक बीमारी को ठीक करती है तो कही दूसरे अंग पर उसका ख़राब असर हो रहा होता है। उनके सेवन करने से इंसान दवाइयों का गुलाम बन जाता है। उसका ध्यान हमेशा दवाइयों और बीमारियों पर लगा रहता है।वह दुनिया से निराश रहता है।
भौतिक समृद्धि के कारण साधनों के भंडार पर बैठकर भी मानव शांति महसूस नहीं कर रहा है। उसकी बेचैनी बढ़ती जा रही है। उसे अधूरेपन का अहसास हर समय बना रहता है। यह अधूरेपन का अहसास उसे मानसिक रोगी बना देता है। योगासन के द्वारा मानसिक शांति हमें दुनिया से जोड़कर सामाजिक उत्थान में सहायक होती है। शहरी सभ्यता में शारीरिक और मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है योगासन के कई रूप से हम मानसिक स्वास्थ्य प्राप्त करते है .शवासन ,सुदर्शन क्रिया और सांसो पर ध्यान केंद्रित करने से हमारी एकाग्रता बढ़ती है। जिससे मन शांत होकर किसी कार्य में निपुणता हासिल करता है। मानव मे आत्मविश्वास का समावेश हो जाता है। हममें अध्यात्म से जुड़ने की सामर्थ्य बढ़ जाती है। इंसान और ईशवर एकाकार हो जाते है।
योग हमें जोड़ता है योग का अर्थ हमें अपने,समाज और अन्य लोगो से जोड़ने का काम करता है। योग के पांच रूप है हठ , कर्म, राज, सठ और कर्म योग। ये हमारे जीवन के सभी पहलुओं से जुड़े हुए है।
हमारे योग को महत्ता दिलाने में विवेकानंद जी का बहुत बड़ा योगदान रहा है। उनके प्रयासों से हमारे धर्म और योग की तरफ लोगो का रुझान बड़ा है । हमारी संस्कृति और योग के महत्व को अंतरास्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। उसके बाद अन्य महर्षियों ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लोगो को जागरूक किया।
आपको जानकर हैरानी होगी आदियोगी शिवजी को कहा जाता है। शिवजी ने सप्त ऋषियों को योग का ज्ञान दिया था। उनके द्वारा समस्त मानव जाति योग को जान सकी।
मोदी जी के प्रयासों के द्वारा 21 जून का दिन unesko ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में स्वीकार किया। इस साल दूसरा योग दिवस मनाया गया। इसकी भव्यता ने गिनिस बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में 7 नए आयाम बना दिए। इन्हे तोडना बहुत मुश्किल होगा।फरीदाबाद में एक लाख लोगो के द्वारा एक स्थान पर योग करना ,408 लोगो ने शीर्षासन किया,एक इंसान ने पीठ पर ३६६०० ग्राम वजन रखकर एक मिनट में 51 पुशअप किये । ये सभी असाधारण काम है।
भारत के आलावा सभी देश योग सीखने में रूचि दिखा रहे है। यह हमारा स्वाभिमान बढ़ाने की बात है यहाँ तक की इस बार 190 देशो ने इस दिन भव्य रूप में योग दिवस मनाया ।उनके योगदान ने धर्म की कटटरता खत्म कर दी। मुस्लिम देशो ने बढ़चढ़कर भाग लिया।
हमारे देश के कई दिग्गजों ने इस दिन का बहिष्कार किया। आप उनके बहिष्कार को किस रूप में देखेंगे। यह एक इंसान को निचा दिखाने की बात नहीं बल्कि अपनी संस्कृति का बहिष्कार करना है। कुछ लोग रोजमर्रा योग करते है। उन्हें इससे बहुत लाभ भी महसूस हुआ है। लेकिन विशेष रूप से उन्होंने इस दिन योग न करके कौन सा सुख हासिल किया मुझे समझ नहीं आया।

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