मौसम और बीमारिया
आजकल हर तरफ बीमारियो का साम्राज्य फैला हुआ है। हर घर में मरीज दिखाई दे रहे है। कई घर तो आपको ऐसे भी मिलेंगे जिसमे सारे लोग बीमार है उनकी सेवा करने के लिए स्वस्थ इंसान नही है। अस्पतालों में जगह नही है। बीमारो को अस्पतालों से वापस किया जा रहा है।
अधिकतर मरीज मच्छरों से फैलने वाली बीमारी से पीड़ित है। हर साल इसी समय ऐसा माहौल दिखाई देता है। जब कई मोते हो जाती है। तब सरकार सजग होती है। इसे किसकी लापरवाही कहा जायेगा। सफाई को लेकर कोई सजग नही है। लोग सरकार को दोष देकर अपना गुस्सा निकालते है। सरकार सफाई कर्मचारियों और अधिकारियो पर गुस्सा निकाल कर काम चला लेती है। हालात ज्यो के त्यों रहते है।
यदि सभी अपने कार्यो के प्रति जिम्मेदार हो जाये तो। इतनी अधिक जानो से हाथ न धोना पड़े। इस समय लोग किसी जंगली जानवर को देखकर भयभीत नही होता जितना मच्छर को देखकर हो रहा है। हर तरफ मच्छर से बचने वाले समान इस्तेमाल हो रहे है। फिर भी महामारी रुक नही रही। जब मौसम बदलेगा तभी इन बीमारियों से निजाद मिलेगी। हमे बहुत अधिक जान और माल का नुकसान उठाना पड़ता हे। माल की भरपाई तो इंसान कर लेता है। लेकिन जिनके यहाँ जान का नुकसान होता है। उनका पूरा जीवन आंसुओ में डूब जाता है।
इस समय टायफायड , वायरल ,डेंगू, चिकनगुनिया फैला हुआ है। जिसको यह बीमारी हो जाती है। उसकी हालत एक हफ्ते में सँभल पाती है जबकि कमजोरी दूर होने में काफी अधिक समय लग जाता है। एक छोटा सा मच्छर इंसान पर आक्रमण करके उसे गंभीर बीमारियों का शिकार बना रहा है।
कई बीमारियों में खून और प्लेटलेट्स की कमी ,दवाइयों का आभाव ,अस्पतालों की कमी,जानकारी की कमी भी बीमारियों को भयावह रूप दे रही है। इन बीमारियों में अधिक से अधिक पानी पिलाना चाहिए। मरीज को बुखार आने पर पेरासिटामोल देना चाहिए। सिर्फ खून मिलने से काम नही चल पा रहा बल्कि उसमे से प्लेटलेट निकाल कर मरीज को देना होता है। यह लोगो को पता ही नही होता है। मरीजो को ऐसे में तुलसी ,गलोय जैसे काढे बना कर प्लेटलेट्स बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए।
चिकनगुनिया का बीमार ठीक होने के बाद भी चलने -फिरने से लाचार रहता है क्योंकि उसे कई महीनों तक जोड़ो का दर्द रहता है। वह सही तरीके से चलने से भी लाचार रहता है। बाकि जरूरी काम करना उसके लिए बहुत कठिन होते है। इतने समय तक इंसान किस तरह काम किये बिना रह सकता है। सभी के लिए ,नॉकरी और अन्य कामो के लिए किसी पर निर्भर नही रहा जा सकता है। अधिकतर घर छोटे हो गए है। इसलिए कामो की जिम्मेदारी किसी अन्य पर सौपना बहुत मुश्किल हो गया है।
सरकारी अस्पताल और संस्थानों में मच्छरों के लार्वा पाए जा रहे है। अबकी बार हमारे इलाके में मच्छरों को भागने के लिए धुंआ छोड़ने वाले भी नही आये। नालियो में दवाई डालने वालो और कूलर चेक करने वालो का भी आभाव रहा है। उनका काम भी दिखावटी ज्यादा लगता है वे बाहर से पूछते है आपके यहा कूलर में पानी हे या नही। यदि है तो उसे खाली करके सूखा लो,नही तो इसमें ये दवा डाल लो। थोड़ी सी गोलिया देकर चले जाते है।
यदि कोई झूठ बोल रहा हो तो इसके लिए कोई जुर्माना नही है। मैने अपने सामने बहुत लोगो को इस मामले में झूठ बोलते देखा है।
श्रीलंका और मलेशिया जैसे देशो से मलेरिया की बीमारी जा चुकी है ये छोटे देश है। भारत में हम इन बीमारियों से मुक्ति के आसार कब देख सकेंगे।
मेरे इलाके में बहुत गंदगी है। इसके लिए मैं निगम पार्षद ,कमिश्नर, इंजीनियर ,सफाई कर्मचारी सभी से गुहार लगाने के बाद थक कर हार मान चुकी हूँ। सब दिलासा देते है सफाई करवाई जाएगी लेकिन सच्चाई में गंदगी के ढेर अब भी आपको जगह -जगह दिखाई दे जायेंगे। प्रधानमंत्री स्वछता अभियान मुझे केवल किताबो और पोस्टरों में दिखाई दे रहा है। अपने इलाके में मुझे गंदगी के अम्बार दिखाई दे रहे है। जब तक लोग जिम्मेदारी से अपने कर्तव्य का निर्बाह नही करेंगे। हमे हर तरफ बीमारियों और मोतो का ऐसा सिलसिला देखने को मिलता रहेगा।

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