sukanya ki jid

    वेद ने सुकन्या से रसोई अलग करने के लिए कहा। सुकन्या एक ही शहर में  सास -ससुर के रहते हुए अलग रसोई करने के लिए तैयार नही हुई। वेद को समझ नही आ  रहा था। ऐसे में वो क्या करे।
       उसने सुकन्या को समझाते  हुए कहा -जब पिताजी ने हम सबको अलग होने के लिए कहा है। तो एक रसोई की जिद करने से क्या फायदा।
      सुकन्या बोली-सब कहेंगे अपनी सास से तो सभी निभा लेते है। सौतेली सास के साथ निभाया नही गया। मेरा मायका भी यही है। सारे रिश्तेदार मुझे ताने  देंगे की सास के साथ निभा नही सकी। यदि आप चाहते हो मेरी रसोई अलग रहे तो आपको दूसरे शहर चलना पड़ेगा। में अलीगढ़ में रहते हुए अलग रसोई नही करूंगी।
    वेद सुकन्या के बारे में  इस तरह से नही सोच सका था। उसकी कोई जिद हो सकती है। वह आज तक किसी के सामने नही बोली थी। उसके इस तरह से अड़ जाने से वेद हैरान रह गया। उसे अब जिंदगी के बारे में नए सिरे से सोचना पड़ेगा।  कई दिन तक वेद विचारो में डूबा रहा। उसे मनाने भी कोई नही आया।
         अंतत उसने अलीगढ़ छोड़ने का मन बना लिया।  अलीगढ़ में रहते हुए कई  साल बीत  गए थे उसे अलीगढ़ अपना सा लगने लगा था। उसे  छोड़ते हुए दुःख हो रहा था।  जिंदगी उसका किसी और शहर में इंतजार कर रही थी।
       वेद की दूर के रिश्ते की बुआ दिल्ली में रहती थी। उन्होंने दिल्ली में आकर किस्मत आजमाने के बारे में विचार किया। उन्हें दिल्ली में अपना कहने वाले एक रिश्तेदार का साथ भी मिल जायेगा। अलीगढ़ में जिसे अपना समझता था वे ही वेगाने की तरह व्यवहार कर रहे थे। उन्होंने इस झगडे के बाद उन दोनों से किसी भी तरह का सम्बन्ध नही रखा था। उन दोनों को देखकर वे मुँह मोड़ लेते थे जैसे किसी दुश्मन से सामना हो गया है। ये व्यवहार उन दोनों को और भी दुःख देता  था ।
     वेद ने  सुकन्या से दिल्ली चलने के बारे में कहा -में अकेले जाकर दिल्ली के हाल  मालूम करता हूँ। यदि सही काम मिल गया तो कुछ समय बाद रहने का इंतजाम करके तुम्हे भी अपने साथ दिल्ली ले जाऊंगा। तुम तब तक कहाँ  रहना चाहोगी।
     सुकन्या बोली -जब तक आप दिल्ली में काम की तलाश में जा रहे हो। में इसी घर में रहकर आपके आने का इंतजार करूंगी।
      वेद ने कहा -इस तरह के माहौल  में रहते हुए तुम्हे परेशानी होगी। यदि तुम्हारी मर्जी हो तो मै तुम्हे मायके छोड़ सकता हूँ।
    सुकन्या मायके जाने के लिए तैयार नही हुई। उसने कहा -मेरे मायके में  भाभियाँ है। वे मेरी परेशानी नही समझ पायेगी। बल्कि हमारे पीछे हमारा मजाक ही उड़ाएगी। यहाँ संबंध ख़राब हो गए है। वहाँ में इसकी भनक भी नही लगने देना चाहती। बुरे वक्त में अपना साया भी साथ छोड़ देता है। आप दिल्ली जाकर काम की तलाश करो। में अपना बुरा वक्त गुजार  लूँगी। मेरी तरफ से आप परेशान मत होना। मेरा और सुमन का गुजारा  इस घर में हो जायेगा। मै  यहाँ रहते हुए आपका इंतजार करूंगी। आपको भी तसल्ली रहेगी कि  मै  अपने घर में हूँ।
   वेद को उसकी बाते  उचित लगी क्योंकि वेद को अभी दिल्ली की जानकारी नही थी। उसने दिल्ली के बारे में थोड़ा सा सुना था। अनजान शहर में जीवन गुजारना   बहुत मुश्किल होता है।  वेद जीवन की तलाश में दिल्ली के  लिए चल पड़ा। 

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