#lakshmi

    ६० का दशक आ  गया था  वेद का बेटा राजेश चार साल का हो गया था। बड़ी बूढ़ी  औरतो  ने सुकन्या को कहना शुरू किया- राजेश का एक भाई होना चाहिए।  एक बेटे का होना भी कोई होना है। दो का जोड़ा अच्छा लगता है।
   सुकन्या कहती-चार बच्चे हो गए है। इन्हे पाल ले यही बहुत है।
   सुकन्या के शब्द सुनकर बे बिफर उठती -बहु ऐसे मत कह भगवान गुस्सा हो जायेंगे। इसे खेलने के लिए भी एक साथी चाहिए।  दो का जोड़ा देखने में भी अच्छा लगता है। अकेला कहाँ घूमता फिरेगा। भाई के साथ होंसला बढ़ेगा। अपना कहने के लिए एक भाई जरूर होना चाहिए।
 उनके शब्दों का सुकन्या पर असर हुआ। वेद भी राजी हो गए। लेकिन बेटे की उम्मीद में नया मेहमान बुलाया था। वह बेटे के स्थान पर चौथी बेटी हो गयी। उन दिनों हॉस्पिटल में बच्चे कम और घर में ज्यादा हुआ करते थे। उनके घर के पास एक हॉस्पिटल खुला। उन्होंने इसमें बच्चे की पैदाइस करवाने की सोची। इसके जन्म में कुछ दिक्क़ते आ  रही थी सुकन्या ने नर्सो की बातचीत सुन ली।
       नर्स कह  रही थी -सुकन्या कमजोर है इसके लिए बच्चे का जन्म काफी परेशानी भरा होगा। बच्चा या सुकन्या दोनों में से किसी एक को बचा पाएंगे। दोनों को बचा पाना बहुत कठिन है।
   ये शब्द सुनकर सुकन्या घबरा गयी। वह चुपचाप घर नर्सो को बिना बताये आ  गयी। उसने सोचा- जब मरना है  तो परिवार के बीच में मरूँगी। अनजाने लोगो के सामने क्यों दम  तोडू। घर आकर उसने दाई  को बुलबा लिया।
    बच्चे का जन्म मुश्किल से हुआ। उन्होंने बेटी को एक तरफ लिटा दिया। सुकन्या की देखभाल में सभी लोग लग गए। सुकन्या बहुत मुश्किल से बची। चौथी बेटी जो माँ को इतनी परेशानी में डाल  दे उसकी तरफ किसी का ध्यान नही गया। वह लड़की रोइ भी नही। जो उसकी तरफ कोई देखता।
          उन दिनों वेद का काम बहुत अच्छा चल रहा था। वेद घर पर नही थे उनके पास काम बहुत था। वेद दिन रात  काम में लगे रहते थे। वेद के काम को लेकर एक आदमी उन्हें ढूंढ़ते हुए उनके घर आ  गया। उसे जब पता चला। वेद नही है।
     उन्होंने सुकन्या के पास कई हजार रूपये भिजवा कर कहा -वेद से कहना में पहले ही आपको पैसा दे रहा हूँ। आप मेरा काम सही समय पर कर देना।ये पैसा पेशगी है।
     सुकन्या की हालत अच्छी नही थी। उसने उससे ज्यादा बात नही की। उसमे उठने की ताकत भी नही थी। उसने ये पैसा अपने सिरहाने रख लिया।उसके बाद वह सो गयी।
    शाम को वेद 8  बजे घर आये। उन्होंने बेटी के बारे में सुना। उसके बाद वे सुकन्या के पास आये। तब तक सुकन्या की हालत सुधर गयी थी। सुकन्या ने पुरे दिन के हाल वेद को बताये। वेद ने जब पेसो के बारे में सुना वह हैरान रह गए। उन दिनों लोगो को पुरे महीने का वेतन मुश्किल से ५० रूपये मिलता था। ऐसे में कोई इंसान पेशगी में कई हजार रूपये दे गया।
     वेद के मुँह  से निकला - ये लड़की तो अपना दहेज़ अपने साथ लायी है। उसकी शक्ल तो दिखाओ केसी  है। तब सबको ध्यान आया की आज एक लड़की पैदा हुई है। उस ज़माने में लड़की की पैदाइस गौरव नही दिलाती थी। बल्कि माँ को अपमानित करने का सबब बनती थी। इसलिए सबके दिमाग में था। ये चौथी लड़की मर भी जाये तो अच्छा है। सबने उस लड़की को उठा कर वेद को दिया। वह लड़की सुबह 8  बजे की पैदा हुई  थी अब शाम के आठ बज  रहे थे। सर्दियों के दिन थे। वह लड़की लगभग मरणासन्न थी। यदि उसे कुछ और समय नही देखा जाता तो वह अवश्य दुनिया छोड़ चुकी होती।
    उसकी दयनीय हालत देखकर वेद बाजार से ब्रांडी लाए उसके सारे  शरीर पर मला। कुछ समय बाद गर्मी आई और  उसने अपनी छोटी सी आँखे खोलकर देखा। बड़े होने पर जब उस लड़की को अपने जीवन के बारे में पता चला। तो वह अपनी जिंदगी को पेसो की सौगात ही समझती थी।
    पंडितो ने उसका नाम लक्ष्मी रखा। उनके अनुसार -ये लड़की जब तक तुम्हारे घर में रहेगी पेसो की कभी कमी नही होगी। यह साक्षात लक्ष्मी का अवतार है। उन्होंने उस लड़की का नाम लक्ष्मी रख दिया।   

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