चीन की एक बच्चा पैदा करने की नीति के कारण उपजा व्यवधान

सन 1978 में चीन सरकार ने अपने देश की जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए सभी बालिग लोगो को केवल एक बच्चा पैदा करने की नीति बनाई थी। जिसके कारण बहुत सालो बाद जनसंख्या नियंत्रण में आ गई। लेकिन उससे सम्बन्धित अनेक समस्याएं भी पैदा हो गई है। जिनके बारे में उस समय के लोगो ने सोचा नहीं था।
चीन में भी भारत के सामान पुत्र -मोह है। जब एक बच्चे की बंदिश लगाई गई तब सबने अल्ट्रासॉउन्ड के द्वारा गर्भ के अंदर ही बच्चे के लिंग के बारे में जानकारी हासिल करना शुरू कर दिया। उसके बाद हर इंसान केवल पुत्र पैदा करने के मोह को अपने अंदर सीमित नहीं रख सका।
अब जैसे ही लोगो को पुत्री के गर्भ में होने का पता चलता तब उसी समय वे उसका गर्भपात करवा देते अंतत पुत्र प्राप्त कर लेते। उसकी प्राप्ति के लिए अनेक बेटियों को गर्भ में ही मारने से गुरेज नहीं था। अब सभी के घर में केवल लड़के थे। किसी घर में ,किसी को भी लड़की की जरूरत महसूस नहीं हो रही थी।
जब तक लड़के बच्चे थे तब तक सब कुछ सही लग रहा था। जब उनकी शादी का समय आया उन्होंने लड़कियां देखनी शुरू की तब आसपास लड़कियां नहीं थी। इंसानी फितरत है। लड़को को एक उम्र के बाद विपरीत लिंगी साथी की जरूरत पड़ती है। ऐसे में क्या किया जाये। उनका स्वाभाविक विकास रुक जाता है। उनमे मनोवैज्ञानिक बीमारियां पैदा हो जाती है।
सामाजिक भावनाये खत्म होने लगती है। जो स्वाभाविक लगाव है। उसे लड़कियों के आभाव में अपराध समझा जाने लगता है। अपनी इच्छाओ की पूर्ति के लिए लड़के क्या करे। उन्हें कैसे समझाया जाये की ये इच्छाएं सनातन समय से है। इसी से समाज की उत्पत्ति और विकास होता है। लेकिन उनकी यही भावनाये लड़कियों की कमी के कारण अपराध की श्रेणी में आ गयी है।
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