weather of indore

                       इंदौर का मौसम 

 

   इदौर मध्य भारत में आता है। इस जगह काफी गर्मी होती है।  इस गर्मी का अहसास आपको यहाँ जाने पर ही पता चलेगा। मै  जब इंदौर गई। तब मार्च  का मध्य था। उस समय हम दिल्ली में गर्म कपड़े पहन रहे थे। अभी होली नहीं आयी थी। सुबह और शाम ठंड  का अहसास था। 
       जब हम इंदौर पहुंचे तब दोपहर में बाहर निकलने की हिम्मत नहीं हो रही थी। क्योंकि ऐसा लग रहा था। जैसे हमें ही साबुत तंदूर में भुना जा रहा है। हम दोपहर बीतने पर ही बाहर घूमने निकलते थे। वैसे मै अप्रेल के महीने से बाहर घूमने का कार्यक्रम नहीं बनाती  हूँ क्योंकि अधिकतर भारत में गर्मी पड़  रही होती है। ऐसे में बाहर घूमने से होने वाली परेशानी से बचना बहुत मुश्किल होता है। पानी पी -पीकर पेट  फटने लगता है लेकिन प्यास बुझने का नाम नहीं लेती है। 
         इंदौर  में नवंबर से फरवरी तक मौसम अच्छा होता है। इन  महिनो  में घूमने जाया जा सकता है।  इंदौर घूमने के हिसाब से बहुत सूंदर और साफ राज्य है। जिसे देखकर मन खुश हो जाता है।  

maheshwari sari of indore

 इंदौर की महेश्वरी सारी 

                                                     

       हर राज्य में सिल्क की साड़ी  बनती है। लेकिन हर राज्य के हिसाब से उनमे विविधता पाई जाती है। कही  मूंगा सिल्क ,कही तंजौरी, कही बनारसी सिल्क  के नाम से मशहूर है वही  इंदौर में जो सिल्क की साड़ी बनती है उसे  माहेश्वरी सारी  कहते  है। 

         यह अपनी सुंदरता से मन को मोह लेती है। इसमें सिल्क  और सूती कपड़ा इस्तेमाल  होता है। इस पर जरी का काम किया जाता है। ये इतनी सूंदर और मोहक होती है  .इसे देखने के बाद  खरीदने से खुद को रोकना मुश्किल हो जाता है। इसकी कीमत 3000  से शुरू होकर पांच हजार तक होती है। इंदौर जाने पर इसे जरूर खरीदना। वरना  अधूरेपन का अहसास महसूस होगा। 

      

#RIVER FLOWING IN INDORE

                इंदौर में बहने वाली नदी 

         नर्मदा नदी महाराष्ट्र के अमरकंटक से निकलती है। उसके बाद मध्यप्रदेश को सींचती हुई गुजरात में खम्बात की खाड़ी  में गिरती है। इसके द्वारा तीन राज्यों को पानी की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है। नर्मद नदी के कारण सारा प्रदेश हरा- भरा रहता है। 


 


 
  

    उज्जैन में शिप्रा नदी बहती है। उससे कुछ दूरी पर इंदौर में  नर्मदा नदी बहती है। नर्मदा  नदी को कुछ लोग नर्बदा भी कहते है  .लेकिन दोनों एक ही नदी का नाम है। महाकालेश्वर  ज्योतिर्लिंग के पास शिप्रा नदी बहती  है।  ओंकारेश्वर ज्योतिलिंग के पास नर्मदा नदी बहती है। दोनों ही ज्योतिर्लिंग है। भारत में कुल बारह ज्योतिर्लिंग है उसमे से ये  दो  ज्योतिर्लिंग बहुत पास है।
            ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग तक पहुंचने के लिए नर्मदा नदी को पार  करना पड़ता है। हमने नदी पार  करने के लिए नाव का सहारा लिया। कुछ दूर पहुंचने पर हमने एक पुल  देखा। उसे देखकर हैरानी हुई। नाविक से पूछने पर पता चला ये पुल  भी ओंकारेश्वर मंदिर तक पहुँचाता  है। तब हमे नाव  पर पैसे खर्चने का दुःख हुआ। पुल से बिना पेसो के नदी पार  की जा सकती थी। 
         इस पुल  के कारण नाविको को नाव  की सवारी करने वाले लोग नहीं मिलते। उनका रोजगार भी कम हो गया है। जिंदगी में विकास के कारण कुछ लोगो को नुकसान का सामना भी करना पड़ता है। 

malwa ka pathar

                   इंदौर क्या मालवा का पठार  है 


 मध्यप्रदेश  को आजादी से पहले मध्य भारत कहा जाता था। इसी का नाम मालवा भी था। इसे मालवा का पठार  भी कहते है। पठार  का मतलव मुख्य भूमि से थोड़ी उठी हुई और समतल जमीं ,जिस पर रहना आसान होता है।  इसकी राजधानी इस समय भोपाल है। लेकिन पुराने समय में इंदौर का महत्वपूर्ण स्थान था। ये उतना ही आवश्यक समझा जाता था जितना भोपाल  समझा जाता है। 

      आपने जुनागढ़ , हैदराबाद और कश्मीर  जैसे राज्यों के नाम सुने होंगे जो भारत में जुड़ना नहीं चाहते थे। इसी में भोपाल भी शामिल है।  आपने कभी भोपाल का नाम सुना है जो भारत में सबसे बाद में शामिल हुआ था। शायद नहीं। क्योंकि मुझे भी बहुत सालो बाद पता चला था। जबकि मुझे जानकारी हासिल करने का बहुत शौक है।  इसे भारत का हिस्सा बनाने के लिए बल्ल्भभाई पटेल  जैसे धुरंधरों को काफी प्रयास करने पड़े। वरना  कल्पना करके देखिये। यदि ये भारत का हिस्सा नहीं बनता तो आज भारत का नक्सा कैसा होता। 

EDUCATION INSTITUTE OF INDORE

               इंदौर के शिक्षण संसथान 

 













अभी तक मैंने अधिकतर बड़े -बड़े शिक्षण संस्थान केवल राज्यों की राजधानी में देखे थे। जबकि इंदौर किसी राज्य की राजधानी नहीं है लेकिन   इंदौर शिक्षा के लिहाज से बहुत अधिक तरक्की कर रहा है। वहां पर शिक्षा की अच्छी व्यवस्था है। वहां IIM  और IIT  जैसे शिक्षण संस्थान है। वहां देश के हर कोने से बच्चे शिक्षा पाने  के लिए आते है। उन्हें शिक्षा से जुडी हुई हर सुविधा प्राप्त हो जाती है। इंदौर में किताबो का  पूरा  बाजार है। जिसमे हर विषय की किताबे मिल जाएँगी। कोचिंग के लिए भी संस्थान  है। 

         हर तरफ शिक्षा पाने के उत्सुक छात्र दिखाई देते है। उनके हँसते -खिलखिलाते चेहरे देख कर मन खुश हो जाता है। उनके खाने -पीने  की भी अनेक व्यवस्थाएं है।  

name of indore

                        इंदौर का नाम 


 मैंने देवताओ के राजा इंद्र का नाम सुना था। लेकिन कोई भी अच्छाई  की कल्पना नहीं कर पाती  थी  .मेरे दिमाग में हमेशा सिंहासन छीन  जाने के डर  से   सहमा  हुआ  इंसान  नजर आता था। क्योंकि इन्दर भगवान ने सौ यज्ञ करके देवताओ के राजा का  पद पाया था  . वह अनेक षड्यंत्र करके लोगो की तपस्या भंग  करने में लगे  रहते  थे   ताकि कोई उसका पद न छीन ले।  
     मैने  इंद्र भगवान का कोई मंदिर नहीं देखा था।  लेकिन इंदौर जाकर पता चला वहां इन्दरेश्वर भगवान का बहुत बड़ा मंदिर है। इनके नाम पर ही इंदौर का नाम पड़ा है। वहां उनकी पूजा की जाती है।  आप कल्पना करके देखिये आपको भी इन्द्रेश्वर भगवान के मंदिर आसानी से नहीं मिलेंगे। छोटे -छोटे अनेक देवताओ की पूजा , तस्वीरें और मूर्तियां  घर -घर में मिल जाएँगी लेकिन  देवताओ के देवता इंद्र भगवान की कोई तस्वीर अलग से मैंने किसी घर या मंदिर में इससे पहले नहीं देखी  थी। 
      यहाँ तस्वीर या मूर्ति ही नहीं पूरा शहर उनके नाम से आबाद पाया तो हैरान हो गई। 

#indore me chhappan bhog

                     इंदौर मे  छप्पन  भोग    

       

  इंदौर में एक और स्थान खाने -पीने  के लिए प्रसिद्ध है उसका नाम छप्पन भोग है। यानि 56  दुकाने अलग -अलग स्वाद के लिए प्रसिद्ध है  यहां बड़े -बड़े अक्षरों में छप्पन लिखा हुआ है। इसके कारण ये विशेष रूप से जाना जाता है। इसमें छप्पन खाने की दुकाने अपने लाजवाव स्वाद के लिए जानी  जाती है। यहां आपका पेट भले ही भर जाये लेकिन मन नहीं भरता। 
        यहाँ आने के बाद सब चीजों का स्वाद लेने का मन करता है। यहां दुकानों के बाहर बैठने का इंतजाम नहीं है बल्कि सब दुकानों के सामने विशेष रूप से सामूहिक स्थान बना है जहां पर  आप बैठ कर खाना खा सकते है इसके आलावा थकान  भी उतारी  जा सकती है।  इस तरह की  बैठने के स्थानों की   कल्पना नहीं की होगी।  इतनी अधिक दुकाने होने के बाबजूद हर तरफ सफाई है।  स्वाद और सफाई के लिए छप्पन भोग बेजोड़ है। 

#safe city indore

                         इंदौर सुरक्षित  शहर है 

 

    इंदौर अन्य राज्यों की अपेक्षा सुरक्षित है। भारत के अन्य राज्यों की अपेक्षा अपराध आधे से भी कम  होते है। यहां प्रशासनिक ढांचा उत्तम है। इसलिए लोग अपने को सुरक्षित महसूस करते है। इसी कारण यहाँ पर रात्रि बाजार लगते है। यदि सुरक्षा का इंतजाम सही नहीं होता तो लोग घर से बाहर निकलने की अपेक्षा घर के अंदर रहना पसंद करते। 
       अपने बच्चो को अकेले शिक्षा पाने के लिए इंदौर नहीं भेजते। आप खुद सोचिये बच्चो की पढ़ाई जरूरी है या उनका जिन्दा और सुरक्षित रहना। आपको सभ्य और सुशिक्षित बच्चे हर तरफ मिल जायेंगे। उन्होंने हमारी  बहुत मदद की। 
        वहां के आटोरिक्शा वाले भी दिन या रात  किसी को परेशान नहीं करते है। बल्कि वे वाजिव किराया वसूलते है। हमें ऑटो वालो से भाव-ताव  करने की आदत है लेकिन वे बहुत कम अंतर  से किराया वसूलते है। लगभग सबका सामान किराया होता है। 
       आपको इंदौर में जाकर एक अलग अहसास होगा। जिसे व्यान करना मुश्किल है 

#IS INDORE MINI MUMBAI

           क्या इंदौर मिनी मुंबई है। 

     

  हाँ इंदौर को मिनी मुंबई कहा जा सकता है। मुंबई महाराष्ट्र का व्यापारिक केंद्र है। वैसे ही इंदौर मध्यप्रदेश  का व्यापारिक केंद्र है। यहाँ व्यापार  के सिलसिले में पूरे  भारत से लोग आते है। 
      मुंबई में हर राज्य के लोग मिल जाते है।  वैसे ही इंदौर में पूरे भारत के लोग मिल जायेंगे। इसी कारण यहां के खान -पान  में विविधता है। अलग -अलग भाषा बोलने वाले लोग मिल जायेंगे। इस कारण  सांस्कृतिक विविधता भी पाई जाती है।  हर धर्म के लोग होने के कारण हर त्यौहार मनाये जाते है।  जैसे दुर्गापूजा , होली, दिवाली, ईद क्रिसमस  आदि।  यहां पर मुंबई के सामान कॉटन  मिल भी है। 
      यहाँ पर पढ़ाई  की अच्छी व्यवस्था है। ऊँची शिक्षा प्राप्त करने के लिए दूर -दूर से लोग आते है।  सुरक्षा के बेहतर इंतजाम होने  के कारण लोग रातो में भी सड़को पर घूमते मिल जायेंगे। मुंबई में भी लोग किसी समय घर से निकलते हुए झिझकते नहीं  है ।  सुरक्षा की बेहतर व्यवस्था होने के कारण ही रात  को सर्राफा बाजार का फ़ूड कोर्ट  चलायमान है। वरना  पूरी रात चलने वाले बाजार आपको कितनी जगह मिलते है। 
         इंदौर  के शासक मराठा  होल्कर थे। वहां  की प्रसिद्ध रानी अहिल्या बाई होल्कर का नाम आपने जरूर सुना होगा। 

#rat ko khane ka maja in indore

          इंदौर का सर्राफा बाजार या फ़ूड कोर्ट

   


 आपने ऐसे   किसी बाजार की कल्पना की है। जो रात  के आठ बजे खुलकर सुबह तक चलता है यहाँ पर अनेक तरह के खाने -पीने  का सामान मिलता है। जहाँ सारी  सड़के सुनसान हो जाती है। आवागमन के साधन नगण्य हो  जाते है ऐसे समय में इस बाजार की रौनक बढ़ने लगती है। आपको इसे  देखकर यकीन करना मुश्किल हो जायेगा। जिस वक्त हम सोने की सोचने लगते  है। उस समय ये बाजार लगना  शुरू हो जाता है। 
       जितने  खाने के सामान पूरे  इंदौर  में दिखाई नहीं देते। उससे ज्यादा सामान इस अकेले सर्राफा  बाजार में मिल जाता है। इंदौर  में बाकि भारत की अपेक्षा गर्मी अधिक होती है। इस कारण हम शाम के समय  शहर देखने निकले थे। जिसके कारण सर्राफा  बाजार हम रात  यानि आठ बजे पहुंच गए. उस समय सर्राफा बाजार बंद होना शुरू हुआ था। और फूडकोर्ट लगना  शुरू हुआ था। यहाँ के बाजार में पूरे भारत की अपेक्षा खाने -पीने  के सामान का स्वाद अलग था। उसको सजाने का तरीका मन को लुभा रहा था। 
       हमने अनेक तरह का खाने का स्वाद लेना शुरू किया। कुछ ही समय में हमारा पेट भर गया। लेकिन मन नहीं भरा। हम तीन लोग घूमने गए थे। हमें लग रहा था हमे पूरी चीज नहीं खानी  चाहिए थी बल्कि एक चीज लेकर बाँट कर  खानी  चाहिए थी। जिससे हर खाने का मजा लिया जा सकता। 
        अब हमे बहुत अफ़सोस हो रहा था। हम कई दिनों के लिए इंदौर  में क्यों नहीं रुक सके। हमे और बहुत सारी  चीजे खाने का मौका मिल सकता। जब रात  के दस बजे हम लौटने लगे। उस समय लोगो का  इस बाजार में आना जारी था। 
      मै  हमेशा दस बजे सो  जाती हूँ। इसके बाद खाने के बारे में सोचना भी नहीं चाहती। लेकिन इस बाजार की बढ़ती हुई रौनक देखकर लग रहा था। यहाँ रात  को खाने की रौनक परवान चढ़ती है।
        यदि आपको इंदौर  जाने का मौका मिले तब आप  आठ बजे से पहले मत खाइये। उसके बाद अपने ऊपर नियंत्रण करना छोड़ दीजिये। यही इस जगह के मजे है।  

#ujjain ki nadi

                उज्जैन की नदी 

 


   



  उज्जैन में शिप्रा नदी बहती है। इसकी पावनता मानी  हुई है। जैसे लोग गंगा नदी में नहाकर  अपने को  पावन  करते है। वैसे ही शिप्रा नदी के किनारे लोगो की  भीड़ लगी होती है। इस नदी के किनारे बैठ कर लोग पत्तो में दीप,  फूल और पैसे बहाते  है। 
       शाम के समय शिप्रा नदी के कई घाटों पर आरती होती देखी  जा सकती है।  सभी जगह एक साथ आरती न होकर कुछ समय के अंतराल पर होती है जिसके कारण हम बहुत समय तक मंत्रमुग्ध होकर देखते रह जाते है। 
        यहां की आरती में ढोल,बाजो  आदि वाद्ययंत्रों के साथ शंखध्वनि विशेष तौर पर इस्तेमाल की जाती है  इसके कारण माहौल में आध्यात्मिकता  का समायोजन हो जाता है।  आरती में शंख का इस्तेमाल मैंने किसी और जगह पर नहीं देखा है। हर तरफ होती हुई आरती , ढलता हुआ सूरज देखते हुए दोनों घाटों से सुमधुर आती हुई आवाज मन को मोह लेती है।
      नदी के किनारे मछलियों के लिए आटे  की गोलिया बेचने वाले बैठे रहते है। जब इन गोलियों को नदी में डालते है तब बहुत सारी  मछलियां इन्हे खाने के लिए आ जाती है। मछलियों को देखते हुए आरती का रसस्वादन करना  बहुत अच्छा लगता है।  
      इस अलौकिक अनुभव का रसपान करने के लिए उज्जैन की नदी के किनारे जाना ही पड़ेगा। 

INDORE KI SAFAI

                            इंदौर की सफाई 

     

  इंदौर की सीमा  में कदम रखते ही आप हैरान रह जायेंगे। क्या ये भी भारत का हिस्सा है। यहाँ के हर कोने में सफाई है। कोई भी गंदगी फैलाता  दिखाई नहीं देता है। आपको एक बार तो यकीन नहीं होगा। इतने सारे  लोग हर तरफ घूम रहे है। उसके बाबजूद कही गंदगी नहीं है।  आप अपने घर में बीस लोगो को बुला लीजिये अपना घर ही बेगाना लगने लगता है।  लेकिन इंदौर में रहने वाले लोग सफाई से रहना सीख  गए है।  इतने साफ शहर को देखकर बाहर से आने वाले भी गंदगी नहीं फैलाते। वे भी सुधर जाते है। 
        इस बात पर भरोसा करना मुश्किल होता है। लोगो के घर भी इतने साफ नहीं होते जितने इंदौर  का हर कोना। कही  भी धूल और कूड़ा दिखाई नहीं देता है। सुबह -सुबह ही सारा शहर  साफ दिखाई देता है।
          मैने  एक जगह शौचालय में गंदगी देखी। वह सुलभ शौचालय था। मुझे बहुत गुस्सा आया। यहाँ पैसे भी दिए, फिर भी गन्दा था। पैसे लेने वाले से बात की। तब उसने कहा -मै  सफाई कर रहा था। आप को देखकर बाहर आ गया। वरना  थोड़ी देर बाद आपको यहाँ भी सफाई मिलती। उसकी बातो में मुझे सच्चाई दिखी क्योंकि जब मै अंदर गई थी तब वह सफाई कर रहा था। हर तरफ पानी बिखरा हुआ था। लेकिन मुझे कहीं और जाना था इसलिए मै  सब्र न कर सकी. वहां सफाई से पहले ही उसका इस्तेमाल करने चली गई थी । उस बेचारे का कोई दोष नहीं था।
        वहां कही भी बड़े -बड़े कूड़ेदान नहीं थे। .कही भी कूड़े के ट्रक  आते जाते दिखाई नहीं दिए। ऐसी सफाई मुझे भारत में कही और दिखाई नहीं दी।  इंदौर भारतीयों को अचंभित करने में सक्षम है।  इस अचम्भे को आप भी अनुभव करके  अवश्य देखिये। 

# problem caused by china"s one child policy

      चीन की एक बच्चा पैदा करने की नीति  के कारण उपजा व्यवधान 

 







  सन  1978  में चीन सरकार ने अपने देश की जनसंख्या  को नियंत्रित करने के लिए सभी बालिग लोगो को केवल एक बच्चा पैदा करने की नीति  बनाई थी। जिसके कारण  बहुत सालो बाद जनसंख्या नियंत्रण में आ गई। लेकिन उससे सम्बन्धित अनेक समस्याएं भी पैदा हो गई है। जिनके बारे में उस समय के लोगो ने सोचा नहीं था। 
    चीन में भी भारत के सामान पुत्र -मोह है। जब एक बच्चे  की बंदिश लगाई गई तब सबने अल्ट्रासॉउन्ड के द्वारा गर्भ के अंदर ही बच्चे के लिंग के बारे में जानकारी हासिल करना शुरू कर दिया। उसके बाद हर इंसान केवल पुत्र पैदा करने के मोह को अपने अंदर सीमित  नहीं रख सका। 
     अब जैसे ही लोगो को पुत्री के गर्भ में होने का पता चलता तब उसी समय वे उसका गर्भपात करवा देते अंतत पुत्र प्राप्त कर लेते। उसकी प्राप्ति के लिए  अनेक बेटियों को गर्भ में ही मारने से गुरेज नहीं था। अब सभी के घर में केवल लड़के थे। किसी घर में ,किसी को भी  लड़की की जरूरत महसूस नहीं हो रही थी। 
       जब तक लड़के बच्चे थे तब तक सब कुछ सही लग रहा था। जब उनकी शादी का समय आया उन्होंने लड़कियां देखनी शुरू की तब आसपास लड़कियां नहीं थी। इंसानी फितरत है। लड़को  को एक उम्र के बाद विपरीत लिंगी साथी की जरूरत पड़ती है। ऐसे में क्या किया जाये। उनका स्वाभाविक विकास रुक जाता है। उनमे मनोवैज्ञानिक बीमारियां पैदा हो जाती है। 
         सामाजिक भावनाये खत्म होने लगती है।  जो स्वाभाविक लगाव है। उसे लड़कियों के आभाव में अपराध समझा जाने लगता है। अपनी इच्छाओ की पूर्ति के लिए लड़के क्या करे। उन्हें कैसे समझाया जाये की ये इच्छाएं  सनातन समय से  है। इसी से समाज की उत्पत्ति और विकास होता है। लेकिन उनकी यही भावनाये लड़कियों की कमी के कारण अपराध की श्रेणी में आ गयी है। 

  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...