बुरे लोग शर्मिंदा क्यों नहीं होते
गलत लोगों की परवरिश ऐसे माहौल मे होती है जहां गलतियाँ अधिकतर लोग करते है । गलतियाँ क रने वालों को शर्मिंदा नहीं किया जाता है । उन्हे सजा नहीं मिलती बल्कि उन्हे महिमामण्डित किया जाता है । वह इस काम को गलत नहीं समझते है । उन्हे बचपन से गलती करने पर बड़ावा दिया जाता है । जिसके कारण वह गलत को गलत नहीं समझ पाते है ।
किसी भी काम को गलत या सही समाज और परिवार निर्धारित करता है । जब उस काम को करने पर आपको गलत नहीं कहा जा रहा तो वह इंसान कैसे गलत समझ सकता है । यदि वह काम को गलत समझने लगेगा तो उस काम को करने से बचने की कोशिश करेगा ।
गलत लोग किसी का खून करके भी दुखी नहीं होते है । उसका इल्जाम भी दूसरों पर लगाने की कोशिश करते है कई बार खून की सजा से बचने के लिए अनेक खून करते चले जाते है खून करने से जरूरी नहीं उन्हे लाभ मिल रहा हो । कई बार इस तरह के लोग दूसरों को तड़पता देख कर खुश होते है । बहता हुआ खून उन्हे सुकून देता है । अपने इस शौक को पूरा करने के लिए इसे काम के रूप मे पैसे लेकर करने लगते है ।
इस तरह के लोग हमेशा दूसरों को दुख देकर खुश होते है । उन्हे प्यार का मतलब पता नहीं होता है । वह यदि प्यार मे पडते है तब अपनी शर्तों पर दूसरों को चलाना पसंद करते है । दूसरों को सुख देना उनके जीवन का मकसद नहीं होता है ।
अमरीका और मुस्लिम देश के रहन -सहन मे अंतर है ।अमरीका के खुलेपण को यदि कोई मुस्लिम देश की औरत अपना लेगी तो दंड की भागीदार होगी । मैंने कई मुस्लिम छोटी लड़कियों को सिर ढके देखा है जबकि हर देश मे सिर ढकना जरूरी नहीं होता है । उस देश मे बिना खुद को ढके वहाँ की महिला खुद को कमतर महसूस करती है जबकि उनका सिर ढकना हमे अजीब लगता है ।
बुरे लोगों के लिए दंड मायने नहीं रखता है वह शारीरिक दंड से डरते नहीं है वह उसे हँसते हुए सहन करते है जिससे साधारण इंसान टूट जाता है बुरे लोग उस दंड के सामने भी कड़े बने रहते है ।
कुछ लोग कठोर माहौल मे पलने के कारण मानसिक रूप से मजबूत होते है । जिन्हे प्यार से पाला जाता है वे स्वभाव से कोमल होते है । उन्हे हमेशा सब कुछ मन माफिक मिला होता है जिसके कारण विपरीत माहौल का सामना नहीं कर पाते है । उन्हे विपरीत माहौल मे टूटते देर नहीं लगती है । इस तरह के लोग यदि आत्महत्या भी कर ले तो बड़ी बात नहीं होती है ।
आजकल कहा जाता है यदि आप बच्चे का लंबा जीवन चाहते है तो उसकी सभी जरूरत पूरी न करे । उसे समय-समय पर डांटना भी जरूरी है । आपके बच्चे के साथ समाज के अन्य लोग प्यार से व्यवहार नहीं करेगे उनके चाहने से सभी जरूरत पूरी नहीं करेगे उनका सामना करवाने के लिए कठोर व्यवहार जरूरी होता है ।
दयालु लोग खुद पर इल्जाम लगते ही टूट जाते है वह हमेशा सफाई देने की कोशिश करते है उनके लिए इल्जाम लगना जीवन और मरण का सवाल बन जाता है । गलत लोग इल्जामों पर गर्व करते है।
बुरे लोग दूसरों को डराने से खुशी महसूस करते है । गलत लोग दूसरों को डरा कर खुद को सर्वश्रेष्ठ साबित करते है । उसके लिए हथियारों का सहारा लेने से भी नहीं बाज आते है । उन्हे दूसरों को डरा कर सुख मिलता है ।
यह उनकी आदत मे शुमार हो जाता है उन्हे साधारण लोगों के समान जीवन अच्छा नहीं लगता है । वह साधारण जीवन से ऊब जाते है । उनके जीवन मे उतार -चड़ाव न आये तो उन्हे अच्छा नहीं लगता है वे रोमांचित नहीं होते है । अलग तरह के लोगों पर इल्जामों का अलग असर होता है ।
दयालु सारी दुनियाँ को अच्छा समझते है जब इल्जाम लगता है तब वह अपने को एकाकी समझते है जिसके कारण निंदा उन्हे तोड़ देती है । जबकि बुरे लोग सारी दुनियाँ को अपने समान बुरा समझते है वह जैसे को तैसा व्यवहार करते है ।
हर उम्र के लोगो का अलग व्यवहार होता है इससे उम्र का संबंध नहीं है । कुछ बच्चे भी अपराध कर सकते है तो कई बार उम्र के आखिरी मोड पर पँहुचने वाले भी अपराध मे लिप्त मिल जाएंगे ।पहली बार इल्जाम लगने पर इंसान टूट जाता है बाद मे उसे इल्जाम सहने की आदत पड जाती है ।
बुरे लोग बुरे कामों का श्रेय लेने से पीछे नहीं रहते है वे दूसरों के इल्जाम भी खुद पर लेते दिख जाएंगे । उनपर एक या अनेक अपराध का असर नहीं होता है । वह जेल जाने के बाद भी दुखी नहीं होते बल्कि जेल की सजा के बाद और भी बुरे बनकर बाहर निकलते है । उनके अंदर प्यार और दयालुता की भावना के मायने खत्म हो जाते है ।
बुरे लोग समाज मे मुश्किल से 1% होते है जबकि अच्छे 99%होते है जिसके कारण अच्छे समाज का निर्माण होता है । हर समाज मे अच्छे और बुरे लोग होते है इसलीये दोनों को स्वीकारना पड़ता है एक ही परिवार के सभी लोगों का व्यवहार समान नहीं होता है । इसलीये जीवन मे विविधता मिलती है । यही विविधता जीवन को बेरंग होने से बचाती है ।