#REVENGE OF THE SCYTHE CORPSES (NOWSHERA )

                       सिरकटी लाशो का बदला (नौशेरा )

 जब से मोदी सरकार सत्ता में आयी थी तबसे सेनिको की मौत की खब्रों से  मन दहल उठता था। लोगो के मन में बेकसूर सेनिको  की मौत सोचने पर मजबूर करती थी। इतनी लाशे देखने के बाद कितनी माये अपने लालो को मौत की चादर में लपेटने के लिए तैयार होंगी। इससे पहले इस तरह की खबर आम नहीं होती थी जबसे मोदी सरकार सत्ता में आयी रोज ऐसी खबरे सुनाई देने लगी। मुझे भी इन्हे सुनकर घबराहट होती थी। .
       उनके घायल, तिरंगे में लीपटे शब और कश्मीर में जनूनी जनता  के द्वारा हताहत सेनिको की बेबसी देखती  थी।तब मुझे बहुत गुस्सा आता था।  सरकार ने सेनिको को किस तरह पंगु बना दिया है  जिसके कारण  वे हाथो में हथियार होते हुए भी सहनशक्ति की मूर्ति बनकर  पत्थर खाये जा रहे है ,खून से नहाये हुए सैनिको को देखकर  दिल में विचार आते थे इस तरह घायल सेनिको के मन में आक्रोश नहीं उभरता होगा। जब तुमने हमे अपनी रक्षा करने के काबिल नहीं छोड़ा तो वक्त आने पर अन्य को बचाने की कोशिश में अपनी जान क्यों दे। आम  इंसान इतना घायल होने पर दुसरो की मदद के लिए आगे कभी नहीं आ सकता।
     आज मेजर गोगोई का मेडल मिलना इस बात को बताता है। इस सरकार ने कुछ हुकूक सेना को भी दिए है। जिसके हाथो में हथियार है उसके लिए ऐसी नाइंसाफी सहन करना बहुत मुश्किल होता है। उन्होंने नौ सौ की भीड़ में से एक को पकड़ कर जीप से बांध कर उसे घुमवाया था जिसके कारण विपक्षी दलो ने सैना की कार्यवाही को मानवीयता के खिलाफ दर्शाया था। उनकी वोटों की राजनीति सेना का मनोबल तोड़ने का काम कर रही है इसकी कोई परवाह नहीं कर रहा था।गोगोई का बयान की हमने नौ सो लोगो को बचाने के लिए यह काम किया था। क्योंकि सैनिको के हथियार यदि चल जाते या उस भीड़ को रोका न जाता तो आप ही सोचिये क्या हो सकता था।
           अभी नौशेरा के बंकरो का तोड़े जाने की खबरे मुझे उन सिर कटी लाशो का बदला लग रहा है। अपने साथियो की सिरकटी  लाशो को देखना कितना दहशत भरा होता होगा। उनका कितना खून खोलता होगा। सेनानायक ने तभी एलान कर दिया था इसका बदला लेकर रहेंगे। जो उन्होंने नौ मई को नौशेरा के बंकरो को नेस्तनाबूत करके ले लिया। हमारे परमजीत और प्रेमसागर जैसे जवानो को सरहद पर पहरेदारी करते हुए धोखे से, अकेले देखकर मारा था। उनकी पहरेदारी के कारण वे आतंकवादियों को भारत में दाखिल नहीं करवा पा रहे थे।
        इसे पहले UPA सरकार के समय ऐसी दुर्घटना देखकर एक सैनिक का खून खौल उठा था। उसने किसी के आदेश का इंतजार किये बिना पाकिस्तानी सैनिक का उसके देश में जाकर  सर कलम कर लाया था। उसके बारे में सुना हे वह आदेश की अवज्ञा करने के कारण आज सलाखों के पीछे पड़ा है।
     पिछली बार विपक्षी दलों ने सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगे थे लेकिन अबकी बार सरकार ने सीधा विडिओ ही दिखा दी। अब देखते है की विपक्षी दल किस बात को मुद्दा बनाते है।
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#BAHUBALI FILFM'S BUMPER EXPLOSION

                          बाहुबली का धमाका 

    भारत में जितनी फिल्मे बनती थी। उनमे जो फिल्मे सौ करोड़ कमा लेती थी। उन्हें सुपर हिट मान लिया जाता था। जो नायिकाओ की फिल्मे सौकरोड़ तक पहुंच जाती थी तो उन्हें बहुत ज्यादा काबिल का तमगा मिल जाता था। सलमान खान की फिल्मे दो सौ करोड़ के अंदर आती थी। जबकि आमिर खान की फिल्मे तीन सौ करोड़ तक पहुंच जाती थी। उनसे ज्यादा काबिल हीरो हिंदी सिनेमामें को ई और नहीं था।
       बाहुबली ने सारे रिकॉर्ड तोड़ कर १५०० करोड़ तक पहुंच कर हॉलीबुड फिल्मो का मुकाबला कर लिया है। इससे पहले कोई हिंदी फिल्म इतना नहीं कमा सकी  है। इससे पहले मुझे समझ नहीं आता था। हॉलीवुड की फिल्मे इतना ज्यादा कैसे कमा लेती हे। बॉलीबुड की पनद्रह फिल्मे मिलकर जितना कमाती  है।
मुझे काफी फिल्मे देखने का शोक है। मै बहुत सारी फिल्मे पिक्चर हॉल में देखती हूँ। जब छुट्टी वाले दिन कोई हिट फिल्म देखती थी तो लगभग आधा हॉल भरा होता था। यदि काम वाले दिन पिक्चर  देखने जाओ तो मुश्किल से 10 -15 लोग थिएटर में होते थे। शुरू में इतने खा ली हॉल में पिक्चर देखने में डर लगता था। लेकिन बाद में आदत पड़ गयी।
        बाहुबली की टिकट मुझे छुट्टी वाले दिन की नहीं मिल सकी। इसलिए सोमवार को पिक्चर देखने गयी तो हैरान हो गयी। थिएटर काफी सारा भरा हुआ था। आपको इस फिल्म को देखकर अलग अनुभूति होगी। लगता है। हम खुद इस फिल्म के पात्र है। स्पेशल इफेक्ट विशेष रूप से प्रभावशाली है। इससे पहले ऐसी पिक्टराइजेशन केवल विदेशी फिल्मो में दिखाई देती थी। महल ,नदी ,नाले आदि हमें उसी दुनियाँ में पहुंचा देते है।
         इस फिल्म की तैयारी कई साल पहले शुरू हो गयी थी। इसके अभिनेता प्रभास को फिल्म के निर्देशक ने डेढ करोड़ के व्यायाम करने के साधन दिए थे। जिससे वे अपने शरीर को इतना सुगठित बना सके।उन्होंने अपना वजन सौ किलो से 130  किलो तक बढ़ाया लेकिन उसको तोंदू नहीं होना चाहिए था बल्कि सुगठित  होना जरूरी था।  उन्होंने विशेष खान -पान का ध्यान रखा।
इन अभिनेताओं और अभिनेत्रियों की हिम्मत को दाद देने का मन करता है इन्हे देखकर लगता है इनकी किस्मत कितनी अच्छी है। इन्हे जरा सा बोलने के इतने अधिक रूपये मिलते है। लेकिन ये कितनी जल्दी वजन बढ़ाते है उसी रफ्तार से घटा भी लेते है। 
          इसकी अभिनेत्री अनुष्का शेट्टी ने इससे पिछली फिल्म के लिए बारह किलो वजन बढ़ाया और इस फिल्म के लिए उतनी जल्दी घटा भी लिया। जबकि आम लोगो के लिए दो किलो वजन घटाना भी मुश्किल हो जाता है। यदि वजन बढ़  गया तो जिंदगी भर वजन घटा नहीं पाते है।
        फिल्म में कपड़े भी विशेष रूप से बनाये गए है। इस फिल्म के अंतिम दृश्य पर 30 करोड़ रूपये खर्च हुए है। जबकि बहुत सारी फिल्मो का वजट  केवल इतना होता है।
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#abrogation of right to do (justice karnan)

 जस्टिस कर्णन  को दी गयी सजा मुझे    भ्रस्टाचारीयो को बेनकाब किये जाने का बदला लग रही हे। उन्होंने सबसे पहले प्रधानमंत्री जी को चिट्ठी में भ्रस्टाचारीयो के नाम लिख कर भेजे थे। उस पर उचित कार्यवाही नहीं की गयी बल्कि पदस्थ जस्टिस पर मानहानि का मुकदमा चला दिया गया। यदि वे गलत होते तो सबसे पहले प्रधानमंत्री को पत्र से इत्तिला नहीं देते। उन्होंने कुछ देखा था तभी इतना बड़ा कदम उठाने का फैसला किया।
 
    उनके साहस को दाद देने का मन करता है। जिन्होंने भ्रस्ट जजों के खिलाफ बोलने की हिम्मत जुटाई। मेरा किसी तरह से जजों से वास्ता नहीं पड़ता लेकिन आस -पास से उड़ती खबर सुनाई देती है। जिससे मुझे जजों की ईमानदारी पर शक होता है। बहुत कम लोग अपने पेशे के लोगो का पर्दाफाश करने की कोशिश करते है। वरना सभी को लगता है यदि सामने वाले पर कीचड़ उछालेंगे तो छींटे हम पर भी गिरेंगे। उन्ही छीटों का सामना कर्णन को करना पड़ रहा है
        उनसे कहा जा रहा था यदि तुम खुद को मानसिक बीमार मान लो तब  तुम्हारे ऊपर कार्यवाही नहीं की जाएगी। उन्हें अनेक तरह से अपमानित किया जा रहा है। उनकी सेवानिवृति जून में होनी है। उनकी सेवानिवृति का इंतजार भी नहीं किया जा सका।
       पहली बार पदस्थ जस्टिस को इतनी बड़ी(6 महीने जेल ) सजा मानहानि की दी गयी है। मानहानि के लिए ये सबसे बड़ी सजा है। कोई भी जज मानहानि के दायरे में आकर सलाखों के पीछे जायेगा इससे पहले किसी ने सोचा भी नहीं था। ये कलकत्ता हाईकोर्ट के जज है। इससे पहले जो भी जज कानून के दायरे में अपराधी साबित हुए वे पैसो के कारण अपराधी साबित हुए। इनपर इस तरह का कोई आरोप साबित नहीं हो सका।
     जज की परीक्षा को पास को मानसिक बीमार कभी नहीं कर सकता। इतनी बड़े पद तक पहुंचने वाले को मानसिक रोगी करार देने की कोशिश करना। न्यायव्यवस्था की कमी है
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#the courage to call the mughals an inveterate

        मुगलो को आक्रांता कहने का साहस 


आज पहली बार राजनीतिक मंच से योगी  आदित्यनाथ जैसे नेता ने मुगलो को आक्रमणकारी कहने की हिम्मत दिखाई है। इससे पहले अन्य किसी नेता के द्वारा ऐसा नहीं कहा गया क्योंकि उनमे साहस की कमी थी।
    बचपन से इतिहास में हमेशा पढ़ा था मुसलमान मंगोलिया , तुर्क और ईरान से भारत में आये। उन्होंने भारतीय धर्म पर आघात करने के लिए मंदिरो को तोडकर सारी धन -दौलत लूट कर ले गये या लोगो की भावनाओ को आहत करने के लिए उनपर मस्जिदे बनवा दी लेकिन सच्चाई जानते हुए भी कोई नेता आवाज उठाने के लिए तैयार नहीं था। क्योंकि उन्हें लगता था उनका मुस्लिम वोट दूसरी पार्टी के पास चला जायेगा ।
     महमूद गजनी और मोहम्मद गौरी ने भारत पर कई बार आक्रमण किया। बाबर से पहले इन आक्रांताओ ने भारत को लूटकर अपने देश की सम्पदा बढ़ाई। लेकिन बाबर इस हरी -भरी जमीं की दौलत और शानो -शौकत  को देखकर यही रुकने के बारे में सोचने लगा। 
       उसके वंशज हुमायु ,अकबर और  जहाँगीर आदि राजाओ ने बर्षो राज किया। उन्हें भारतीयों ने अपना मुक़ददर  समझ लिया। उन्होंने भारतीय  शिवाजी ,राणाप्रताप जैसे राजाओ को महत्व देना बंद कर दिया जिन्होंने सारी जिंदगी भारतीयों को आजादी दिलवाने में होम कर दी।
    इन आक्रांताओ ने   हिन्दू धर्म के विनाश के सभी उपाय किये। लोगो को जबरदस्ती मुस्लिम बनाया। लेकिन आज वे ही मुस्लिम अपने को सच्चे मुस्लिम समझ कर हिन्दुओ और हिंदुस्तान से नफरत करते है जबकि पुराने समय में वे हिन्दू ही थे।विदेशो से आने वाले केवल 10 % मुसलमान थे जबकि 90 %भारतीय हिन्दुओ का धर्म बदलवाकर मुसलमान बनाया गया।  उनके अंदर की नफरत हमे सोचने पर मजबूर करती है। जो ओरंगजेब ने दूसरा मुस्लिम देश के सपने देखे थे। उसका सपना अब पूरी तरह से सच हो रहा है।

  •       हिन्दू भारत को हिंदुस्तान कहते हुए डरता है। जबकि भारत में रहने वाला मुस्लिम इसी देश में रहते हुए
  • इसके झंडे जलाता है
  •  पाकिस्तान का झंडा फहराता है। 
  • अपने राज्य या इलाको से हिन्दुओ को बाहर निकालने में अपनी पूरी ताकत लगा देता है।
  •  पाकिस्तानी नेताओ को अपने आयोजनों में बुलाकर गौरवान्वित होता है 
  •  भारतीय प्रधानमंत्री को बुलावा देना उनके लिए शर्म की बात है। यदि ये भारत को अपना देश समझते तो इस देश के नेताओ का भी समर्थन करते। उन्हें अपमानित करने की कोशिश नहीं करते। 
  • हिन्दू धर्म ग्रंथो और संविधान को जला देना उनके लिए आम बात है 
  •  भारतीय राष्ट्रीयगान को गाने में अपनी तौहीन समझते है 
  बहुत सारी सड़को के नाम मुगल बादशाहो के नाम पर देखने को मिल जाएँगे  ।

भारत विरोधी नारे लगाते हुए मुसलमान मिल जायेंगे।

  • किसी मस्जिद और मजारो पर आने वाले दान पर उन्ही का अधिकार होता है जबकि मंदिरो के दान पर टैक्स देना पड़ता है 
      यदि इन लोगो से कहो जिस देश का गुणगान कर रहे हो उसी देश में जाकर क्यों नहीं रहते तो उनका जबाब होता है -क्यों ये देश हमारा भी है। 
    भारत के आलावा किसी अन्य देश में यदि ऐसी हरकते की जाये तो उन्हें देश में रहने का अधिकार नहीं मिल सकता केवल भारत ही ऐसा देश है।  जहाँ मुस्लिम नागरिक किसी के लिए कुछ भी गलत कह सकता है। लेकिन कोई भी उनका विरोध करे तो उसे धर्मनिरपेक्षता के रस्ते की बाधा करार दिया जाता है. राजनेता भी सच्चाई का सामना करने से डरते थे इसलिए इससे पहले कभी कोई नेता  मुखर नहीं हुए।
     आज योगी जी ने जनता की आवाज को पहचान कर साहस दिखाया है। 
     कोई भी मुस्लिम भारत को अपना देश मानने के लिए तैयार नहीं है। शाहरुख़ खान जैसे अभिनेता को भारत में रहने से डर लगता है। लेकिन कभी किसी और देश में जाकर पनाह मांगते नहीं देखा या किसी भारतीय की भलाई के लिए कोई परोपकार करते नहीं देखा गया। ये लोग केवल पाकिस्तान को ही अपने धन के दर्शन कराते है।
     में केवल यही चाहती हु भारत में रहने वाले सभी भारत का सम्मान करे अन्य  धर्म के लोगो को भी सम्मान की दृष्टि से देखे।
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#what a modern yogi became a successful merchanat

               बदलते हुए योगी की एक नई पहचान 

रामदेव जी का पतंजलि अब ब्रांड बन गया है। वह  बहुराष्ट्रीय कम्पनी के सामने प्रतियोगिता बन के खड़ा  हो गया  है। जिसने उनके लिए प्रतिस्परर्धा त्मक चुनौती ला दी है। उन्होंने वे सारे उपाय आजमाने शुरू कर दिए है। जो अब तक व्यापारी इस्तेमाल करते थे। लोगो के अंदर उन उत्पादों को घर में लाने की होड़ सी मच गयी है। उन्होंने इन्हे बेचने के लिए उच्च स्तर के लोगो को विज्ञापन में लिया हे.हर जगह उनके विज्ञापन दिखाई दे जाते है। उन्होंने पूरे भारत में 6000 दुकानों में अपने उत्पाद बेचने शुरू कर दिए है। लेकिन अब छोटे दुकानदार भी पतंजलि उत्पाद अपनी दुकानों में रखने लगे है।
       आज से लगभग 50 साल पहले सरकारी आयुर्वेदिक औषधालय होते थे। जो एक एक करके बंद होते चले गए। एक समय आया जब दिल्ली में आयुर्वेदिक  डिस्पेंसरी  और अस्पताल नहीं थी। साधारण लोग ढंग की जगह पर जाकर आयुर्वेदिक उपचार नहीं करवा सकते थे। वैद्य के पास छोटी जगहों में रहने वाले  केवल गरीब और लाचार लोग ही उपचार के लिए जाते थे।
      अब रामदेव जी के कारण आयुर्वेद में  भरोसा पैदा हो गया है। उनकी औषधियां,अस्पताल ,खाद्य पदार्थ  और इलाज   करवाने में लोग शान से बखान करने लगे है। मेरी जान -पहचान के लोग अब स्वास्थ्य लाभ के लिए भारत से ही नहीं विदेशो से  आयुर्वेदिक औषधालय में आने लगे है। उन्हें देखकर गौरव की भावना पैदा होती है।
     लोगो के मन में एलोपेथिक इलाज का नशा उतरने लगा है। क्योंकि ये एक समय में एक अंग का उपचार करती है। ये दवाइयाँ किसी और अंग को नुकसान पंहुचा रही होती है। इनके चंगुल में फंसने वाला हमेशा के लिए मरीज बन कर रह जाता है।
      भारतीय योग और आयुर्वेद दोनों  मिलकर इंसान को तन और मन दोनों से हमेशा के लिए निरोग बना देता है। इसके किसी और अंग पर विपरीत असर नहीं होता है।ये दवाइया एक समय में सभी अंगो का उपचार करती है।  इनके द्वारा मानसिक और शारीरिक बीमारियों का खात्मा हो जाता है।
      मेने काफी समय से प्राणायाम के बारे में सुना था लेकिन प्राणायाम कैसे किया जाता था। मुझे पता नहीं था। इसे जानने का कोई उपाय भी नहीं मिल रहा था। हमेशा ऋषि -मुनि इसका प्रयोग करके स्वस्थ होते थे। ये उनके लिए बनाया गया है। साधारण लोग इसे सीख नहीं सकते।
        इसे सीखने का तरीका रामदेव के द्वारा जानकर में बहुत हैरान हुए। ये बहुत आसान था इसके द्वारा हमारे शरीर की 90 % गंदगी साँस के द्वारा बाहर निकल जाती है। प्राणायाम के द्वारा हमें साँस लेने का सही तरीका बताया जाता है। मानव जीवन पर्यन्त साँस लेता है। लेकिन अस्वच्छ वायु और साँस लेने का गलत तरीका हमें बीमार बनाता है।
       मोदी जी ने आयुर्वेद और योग के प्रचार के लिए पुरुस्कार की घोषणा करके लोगो को प्रोत्साहित किया है। जिसके भविष्य में अच्छे परिणाम आएंगे। उन्होंने अर्थ को परमार्थ के साथ जोड़ कर सर्वसुलभ तक पहुँचा दिया है। इनसे पहले योगी केवल योग साधना तक सीमित रहते थे। लेकिन इन्होने योगी की छवि बदल दी है।
      पतंजलि औषधियों ,खाद्य -पदार्थ से लेकर सौंदर्य प्रसाधन भी बनाने लगा है। इनमे किसी तरह का केमिकल इस्तेमाल नहीं किया जाता हे इनके उत्पाद स्वास्थ्य की दृष्टि से उत्तम है। जो प्रत्येक घर में स्वीकार्य है। इन्होने भारत के कई राज्यों में उत्पादन इकाइयां शुरू की है। अब कश्मीर में भी इसकी शुरुरात कर रहे है।
    ये केवल पुराने आयुर्वेदिक तरिके तक सीमित नहीं है। बल्कि इनके रीसर्च केन्द्रो में बीमारियों के ईलाज की नई दवाइया ईजाद करने के लिए 200 वैज्ञानिक नियुक्त किये है.
      11 साल पहले ये साईकिल पर अपने उत्पाद बेचा करते थे। आज इनका ब्रांड प्रत्येक घर तक पहुँच गया है। अब इन्होने शहीदो के बच्चो के लिए विद्यालय खोलने की घोषणा की है।यह सराहनीय है।
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#today"s heartbroken romiyo

 आज भी लड़कियाँ अपने हालत का सामना खुद करने में असमर्थ है। उन के लिए शब्दों में अपने दुःख को बयान करना बहुत मुश्किल होता है। वे पिटती  है पर विरोध करने की जगह ,रोती रहती है। दुनियाँ में बदनाम होती रहती है। लेकिन शब्दों में उसका जिक्र करने से खौफ खाती रहती है।
     मुझे लड़कियों की कमजोरी बहुत दुःख देती है। वे अपने बराबर के इंसान को इतना बलबान समझ लेती है कि पिटने  के बाद भी आँखों में आंसू उनके दुःख को बता रहे होते है  लेकिन होठ चुप रहते है।
      एक लड़की रेखा  पूरे इलाके में बदनाम हो रही थी। उसके बारे में अनेक खबरे आ रही थी। लेकिन इतनी छोटी लड़की की रुसवाई का यकीं करना मेरे लिए मुश्किल था। मै उसके लिए कुछ अच्छा कर नहीं सकती थी तो उसकी बुराइयों में हिस्सा लेने वालो का साथ देना मेरे लिए बहुत मुश्किल होता था।
    मेरे दिमाग में बहुत सुंदर लड़की लोगो की नजरो का शिकार हो सकती थी लेकिन वह लड़की कोई खास सुंदर नही थी। काले रंग की साधारण नक्श की लड़की थी। उसके काम करने का तरीका किसी को प्रभावित नहीं करता था। जो काम करती थी वो समय के बीत जाने  के बाद ,आधा -अधूरा होता था।
   एक दिन उसने रोते हुए अपना दर्द बयान किया। कि उसकी मम्मी दुर्घटना में बुरी तरह घायल   है। वह लाख कोशिशों के बाद भी  घर को पूरी तरह संभाल नहीं  पा रही है। वह केवल 14 साल की उम्र की थी  घर की बड़ी लड़की होने के कारण घर की सारी जिम्मेदारी उसे उठानी पड़ती है। जिसके कारण वह व्यवस्थित नहीं हो पाती है। इस तरह अव्यवस्था के बीच कई साल बीत गए.
       जब वह 16 साल की हुई उसकी माँ दुनिया से प्रस्थान कर गयी। वह अपना दर्द माँ के आभाव में किसके सामने बयान करे उसे समझ नहीं आता था। पिता के सामने मुखर होने से उसे झिझक हो रही थी।
      एक दिन वह बहुत बुरी तरह रो रही थी। उसकी सिसकियाँ मुझे बेचैन करने लगी। मैने उसका मुँह धुलवाया। और पानी पिलाया। जिससे वह शांत हो कर अपनी बात बता सके। उसे शांत होने में काफी समय लगा।
   उसने कहा -"अब   उसकी माँ मर चुकी थी। वह पिता के सामने अपने बारे में बताने में असमर्थ थी।  "
        एक लड़का रणधीर  हर वक्त उसका पीछा करता था। जो उसकी गली का लड़का था। जिसकी अभी  पढ़ाई पूरी नहीं हुई थी। लेकिन उस पर प्यार का नशा इस कदर हावी हो गया था। खुद पढ़ता नहीं था। उसे भी पढ़ने नहीं देता था। हर वक्त उसका समय रेखा का पीछा करने में लगा रहता था। जिससे उसका मन किसी काम में नहीं लगता था।
     रणधीर उससे बहाने बना कर बात करने की फ़िराक में रहता था। उसे जबरदस्ती अपनी बाइक के पीछे बैठने के लिए मजबूर करता था। यदि मना करती थी। तो बहुत मारता था। लोगो को उसका बाइक पर बैठना तो दिखाई देता था लेकिन किस मजबूरी में वह बाइक पर बैठती है ये किसी को दिखाई नहीं देता था।
        मैने इस का जिक्र उसके घर में किया तो उसके पिता ने विद्यालय के समय उसके पीछे आना शुरू किया जिसके कारण वह उसे रस्ते में रोकने से बचने लगा। लेकिन कितने दिन तक उसके पिता उसकी रखवाली करेंगे मुझे समझ नहीं आया।
     .  उनसे पुलिस में शिकायत करने के लिए कहा तो उन्होंने इससे मना कर दिया इसके कारण मेरी बेटी बदनाम हो जाएगी।
    बड़ो की ऐसी सोच मुझे सोचने पर  मजबूर करती है। यदि आज भी लड़कियों को हर वक्त मजबूत सहारे की जरूरत पड़ेगी तो कितने दिन तक उसके पिता उसे घर में रख कर पढ़ाई करवाएंगे। मुझे लगता है जल्दी ही वे इस जिम्मेदारी से मुक्ति के लिए उसका किसी भी इंसान से विवाह कर देंगे।
     मेने उस लड़की को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनने की प्रेरणा देनी शुरू कर दी है। जिससे वह किसी के कंधे का सहारा लेने की जगह मजबूती से अपने दम पर उस जैसे लड़को का सामना कर सके।
          उसे हर कदम पर प्यार के मारे नासमझ मजनू मिलेंगे। जिन्हे मालूम ही नहीं  जिंदगी केवल प्यार के भरोसे नहीं बिताई जा सकती। जीवन में पैसे की भी जरूरत होती है  यदि रणधीर पढ़ाई में ध्यान लगाए तो एक दिन सफल होने पर उसे इस तरह की छिछोरी हरकते करने की जरूरत नहीं पड़ेगी रेखा के अभिभावक खुद उसके घर रिश्ता लेकर आएंगे।
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  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...