रानीखेत
दिल्ली की भीड़भाड़ में रहने वालो के लिए रानीखेत का माहौल ऐसा लग रहा था मानो स्वर्ग में आ गए है। बिलकुल शांत वातावरण प्रदुषण का नामोनिशान नहीं था। हरे भरे जंगल और साफ सुथरी सड़के कही कूड़ा -कर्कट नहीं दिखाई दिया। लग रहा था यहाँ के लोग कितने सफाई पसंद है। हर तरफ सफाई दिखाई दे रही थी। पेड़ों के पत्ते बिना धूल के हरे भरे बहुत सुंदर लग रहे थे।ये पेड़ लगभग ४० से 60 फीट तक ऊँचे थे। उन्हें देखकर मन नहीं भर रहा था। दिल्ली के पत्तो को बिना पानी से साफ किये मुंह में डालने की हिम्मत कोई विरला ही कर सकता है। वहाँ के पत्तो को छूने का मन अनायास ही कर उठता है।
एक बार मेरी सहेली ने मुझे बताया था कि -खेतों में घूमते हुए जब कोई सब्जी खाने का मन करता था हम उसे तोड़ कर और पोंछ कर खा लेते थे।
हमने उसका बहुत मजाक बनाया था कि - तुम बहुत गंदगी पसंद हो बिना धोए कभी खाना नहीं चाहिए।लेकिन यहाँ आकर पता चला कि रानीखेत जैसी जगह पर धूल -मिटटी और गंदगी का नाम ही नहीं था।
वहाँ के होटलों की खिड़किया अधिकतर कांच की बनी हुई है। उनसे देखते हुए पता ही नहीं चलता की कमरे और बाहर के बीच में कांच की दीवार है। वे शीशे इतने साफ थे कि उनकी विशेष सफाई के बारे में लोगो से पूछा तो जानकर हैरानी हुई। बाहर से उन शीशों को कोई साफ ही नहीं करता। वे तो केवल अंदर की तरफ से साफ किये जाते है। बाहर से साफ करना उन्हें बहुत कठिन था। क्योंकि उनको बाहर खड़े होकर साफ करने का कोई स्थान नहीं था। इसलिए उनकी बातो पर यकीं करना पड़ा।
रानीखेत में किसी तरह की आवाज सुनाई नहीं दे रही थी। वहाँ केवल प्रकृति की आवाज ही गुंजायमान थी इतना शांत माहौल मन को मोह रहा था। 7 बजे तक सड़के सुनी हो गई। सारी दुकाने बंद हो जाने के कारण बाहर निकल कर घूमना व्यर्थ हो जाता है। कमरे में बैठ क्र t.v. देखकर या कोई खेल खेलकर समय बिताया जा सकता है। यहाँ डिश ऐन्टेना के द्वारा ही t.v. सिग्नल पकड़ पाता है। यहाँ सरकार के लिए प्रत्येक स्थान तक बिजली पहुंचा पाना बहुत कठिन है। इसके लिए सड़कों पर सोलर लाइट का इंतजाम किया गया है। मेने जीवन में पहली बार सूर्य की ऊर्जा से सड़के रोशन देखी। सोलर ऊर्जा से पहाड़ों पर बिजली की जरूरत पूरी करना आसान है।
रानी खेत की आबादी बहुत कम है। यहाँ के लोग बहुत मेहनती और सीधे -सादे है । मुझे वहाँ की औरते बहुत कम शाल पहने दिखाई दी जबकि ठण्ड बहुत अधिक थी। उन्हें काम करने में दिक्क्त महसूस न हो इसलिए शाल का इस्तेमाल नहीं करती है।पहाड़ी लोग मुझे मोटे नहीं दिखाई दिए। वहाँ का वातावरण और उनकी कर्मठता ही उन्हें सुडौल बनाए हुए थी
मुझे वहाँ इंटरनेट की कमी महसूस हुई। दिल्ली में रहने के कारण इसकी बहुत आदत पड जाती है कई फोन के सिग्नल नहीं आ रहे थे. हमें लगा हमारा फोन ख़राब हो गया लेकिन दिल्ली आने पर फिर से सब ठीक हो गया।
वहाँ का पानी का स्वाद बहुत अच्छा था। उसमे प्रदूषण का कण नहीं था। वहाँ कही भी हमें पानी की बोतल खरीदने की जरूरत महसूस नहीं हुई। हर जगह का पानी लग रहा था मानो r.o. से साफ करके लाया गया है।
रानीखेत में गोल्फकोर्स बहुत बडी और खुली हुई जगह थी इतनी बड़ी जगह में यह फैला हुआ था कि मैदानी इलाका लग रहा था।
सैनिक संग्रहालय में कुमाऊ रेजिमेंट से सम्बंधित चीजे रखी गई थी वहाँ के सैनिक अधिकारी ने इतने मनोरंजक तरी के से उन सबका वर्णन किया कि हमारे मन में फौजियों के कठोर बर्ताव का भरम दूर हो गया। .चौबटिया बाग,राममंदिर ,झुला देवी मंदिर बहुत अच्छे लगे। इस मंदिर को आप घंटियों वाला मंदिर भी कह सकते है। इस मंदिर में लोगो की इच्छाएं पूरी होने पर लोग घंटिया बांध जाते है. कहावत है जबसे यह मंदिर बना हे हिंसक प्राणियों के आक्रमण कम हो गए है।
जीवन का अनूठा अनुभव लेना चाहते हो तो रानीखेत का भ्रमण अवश्य करना चाहिए। आपको स्वर्गिक अनुभूति का अहसास होगा।

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