हिंदी में ज्यादा अंक कैसे लाये
हिंदी में अच्छे अंक के बारे में सभी के दिमाग में यही बात रहती है।कि इस विषय में कम नम्बर मिलते है। इस कारण बच्चे हिंदी की अपेक्षा दूसरे विषय लेते है। कुछ पाढ़यक्रम में या सरकारी नौकरी के लिए 10 कक्षा में हिंदी विषय को पास करना बहुत जरूरी होता है। इसके बिना सरकारी नौकरी या किसी विशेष पाठ्यक्रम में प्रवेश निषेध होता है। निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले या अंग्रेजी माद्यम से पढ़ने वालो के दिल में हिंदी विषय को लेकर विशेष डर बैठा होता है। आज में उनके मन से वह डर दूर करने की कोशिश कर रही हूँ।
पेपरों में जितने नम्बर का प्रश्न आये उसे उतने ही हिसाब से करना है। मान लो एक प्रश्न एक नंबर का है। उसे केवल एक अक्षर में उत्तर दे देना चाहिए या अधिक से अधिक एक लाइन में उत्तर देना काफी है। इससे ज्यादा समय देना समय की बर्बादी मानी जाएगी।
दो नम्बर की प्रश्न का उत्तर केवल दो लाइनो तक सीमित रखे।
तीन नम्बर के प्रश्न का उत्तर केवल तीन से पांच लाइनो तक सीमित रहना चाहिए।
कुछ प्रश्न एक नंबर और पांच नंबर दोनों में आ जाते है। एक नंबर के प्रश्न को केवल सीमित शब्दों में उत्तर दे। उसमे पूरा ज्ञान उड़ेलने की जरूरत नही होती है। जबकि 6 नम्बर के प्रश्न में कमसकम आधा पेज जरूर भरे वरना सही नंबर नही मिल सकेंगे।
सबसे अधिक अंक निबंध के है। छात्र उसे याद करने की अपेक्षा मन से लिखने पर जोर देते है। लेकिन जब आप निबंध मन से लिखोगे तो नम्बर 3 या चार ही मिलेंगे। उससे ज्यादा नंबरों के लिए आपको इसे याद करना बेहद जरूरी है। लेखको के वाक्य या कविताओ की पक्तियों को लिखने से अधिक नंबर मिलते है। जिसका महत्व हम नही समझते। हमेशा पहला पेराग्राफ और आखिरी पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इसका प्रभाव पुरे निबंध के नंबरों पर पड़ता है।
पत्र लिखने के तरीके के अनुसार नम्बर मिलते है। यदि पत्र पेराग्राफ की तरह लिखोगे तो उसे काट दिया जाता है कोई उसे पढ़ना जरूरी नही समझता। पत्र अधिकतर पांच नंबर का होता है जिसमे लिखने के तरीके के ही 3 नंबर तक प्राप्त हो सकते है। आप पत्र का महत्व समझ ही गए होंगे।
प्रश्नो के उत्तर पेराग्राफ में देने की जगह पॉइंट में लिखने से ज्यादा नंबर मिलते है। पेराग्राफ में अद्यापक को सीमित ज्ञान का आभास होता है जबकि क्रम से लिखने पर उसे ज्यादा और विशेष ज्ञान का भ्रम होता है।
व्याकरण के प्रश्नो के नंबर सही होने पर पूरे मिलते है। इस का विशेष ध्यानं रखना चाहिए। व्याकरण हमेशा अच्छी तरह याद करना चाहिए। जो आपने 2 कक्षा में पड़ा होता है। वह किसी ना किसी रूप में हमेशा प्रयोग होता रहता है। जबकि बाकि पाठ्यक्रम बदलता रहता है। जबकि व्याकरण हमेशा एक ही रहता है। यदि आपने शुरू की कक्षाओ में सही तरीके से व्याकरण का अभ्यास किया है तो इसका सारी जिंदगी के अलावा नौकरी की प्रतिस्पर्धा में फायदा पहुचेगा।
यदि पेपर 100 नंबर का है। तो उसमे 40 नम्बर के प्रश्न केवल व्याकरण से सम्बंधित होते है जो कभी बदलते भी नही है।
हमेशा सुलेख पर विशेष ध्यान देना चाहिए। सुलेख लिखने वाले को हमेशा गन्दी लिखावट वाले से ज्यादा नंबर मिलते है। समान लिखने पर भी अच्छी लिखावट वाला ज्यादा नंबरों का भागीदार बन जाता है। सुंदर लेख का अपना महत्व है।
यदि इन सब बातो पर विशेष ध्यान रखा जाये तो आजकल हिंदी में भी 100 में से 100 नंबर मिल सकते है।
हिंदी में अच्छे अंक के बारे में सभी के दिमाग में यही बात रहती है।कि इस विषय में कम नम्बर मिलते है। इस कारण बच्चे हिंदी की अपेक्षा दूसरे विषय लेते है। कुछ पाढ़यक्रम में या सरकारी नौकरी के लिए 10 कक्षा में हिंदी विषय को पास करना बहुत जरूरी होता है। इसके बिना सरकारी नौकरी या किसी विशेष पाठ्यक्रम में प्रवेश निषेध होता है। निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले या अंग्रेजी माद्यम से पढ़ने वालो के दिल में हिंदी विषय को लेकर विशेष डर बैठा होता है। आज में उनके मन से वह डर दूर करने की कोशिश कर रही हूँ।
पेपरों में जितने नम्बर का प्रश्न आये उसे उतने ही हिसाब से करना है। मान लो एक प्रश्न एक नंबर का है। उसे केवल एक अक्षर में उत्तर दे देना चाहिए या अधिक से अधिक एक लाइन में उत्तर देना काफी है। इससे ज्यादा समय देना समय की बर्बादी मानी जाएगी।
दो नम्बर की प्रश्न का उत्तर केवल दो लाइनो तक सीमित रखे।
तीन नम्बर के प्रश्न का उत्तर केवल तीन से पांच लाइनो तक सीमित रहना चाहिए।
कुछ प्रश्न एक नंबर और पांच नंबर दोनों में आ जाते है। एक नंबर के प्रश्न को केवल सीमित शब्दों में उत्तर दे। उसमे पूरा ज्ञान उड़ेलने की जरूरत नही होती है। जबकि 6 नम्बर के प्रश्न में कमसकम आधा पेज जरूर भरे वरना सही नंबर नही मिल सकेंगे।
सबसे अधिक अंक निबंध के है। छात्र उसे याद करने की अपेक्षा मन से लिखने पर जोर देते है। लेकिन जब आप निबंध मन से लिखोगे तो नम्बर 3 या चार ही मिलेंगे। उससे ज्यादा नंबरों के लिए आपको इसे याद करना बेहद जरूरी है। लेखको के वाक्य या कविताओ की पक्तियों को लिखने से अधिक नंबर मिलते है। जिसका महत्व हम नही समझते। हमेशा पहला पेराग्राफ और आखिरी पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इसका प्रभाव पुरे निबंध के नंबरों पर पड़ता है।
पत्र लिखने के तरीके के अनुसार नम्बर मिलते है। यदि पत्र पेराग्राफ की तरह लिखोगे तो उसे काट दिया जाता है कोई उसे पढ़ना जरूरी नही समझता। पत्र अधिकतर पांच नंबर का होता है जिसमे लिखने के तरीके के ही 3 नंबर तक प्राप्त हो सकते है। आप पत्र का महत्व समझ ही गए होंगे।
प्रश्नो के उत्तर पेराग्राफ में देने की जगह पॉइंट में लिखने से ज्यादा नंबर मिलते है। पेराग्राफ में अद्यापक को सीमित ज्ञान का आभास होता है जबकि क्रम से लिखने पर उसे ज्यादा और विशेष ज्ञान का भ्रम होता है।
व्याकरण के प्रश्नो के नंबर सही होने पर पूरे मिलते है। इस का विशेष ध्यानं रखना चाहिए। व्याकरण हमेशा अच्छी तरह याद करना चाहिए। जो आपने 2 कक्षा में पड़ा होता है। वह किसी ना किसी रूप में हमेशा प्रयोग होता रहता है। जबकि बाकि पाठ्यक्रम बदलता रहता है। जबकि व्याकरण हमेशा एक ही रहता है। यदि आपने शुरू की कक्षाओ में सही तरीके से व्याकरण का अभ्यास किया है तो इसका सारी जिंदगी के अलावा नौकरी की प्रतिस्पर्धा में फायदा पहुचेगा।
यदि पेपर 100 नंबर का है। तो उसमे 40 नम्बर के प्रश्न केवल व्याकरण से सम्बंधित होते है जो कभी बदलते भी नही है।
हमेशा सुलेख पर विशेष ध्यान देना चाहिए। सुलेख लिखने वाले को हमेशा गन्दी लिखावट वाले से ज्यादा नंबर मिलते है। समान लिखने पर भी अच्छी लिखावट वाला ज्यादा नंबरों का भागीदार बन जाता है। सुंदर लेख का अपना महत्व है।
यदि इन सब बातो पर विशेष ध्यान रखा जाये तो आजकल हिंदी में भी 100 में से 100 नंबर मिल सकते है।

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