#world culture festival

       
 विश्व सांस्कृतिक महोत्सव  की भव्यता देखकर आँखे चकाचोंध हो गयी। उसके मंच की लम्बाई और चौड़ाई  इससे पहले कभी किसी ने नही देखी  थी। इतना बड़ा मंच जिसपर एक समय में 35 हजार लोग अपना कार्यक्रम दे सके इससे पहले किसी ने कल्पना भी नही की थी।
          इस कार्यक्रम  को लेकर बहुत ज्यादा राजनीतिक  कठिनाइयाँ  पैदा की गयी। उन लोगो को इतनी भी शर्म नही आई कि  इसके द्वारा भारत का गौरव बढ़ेगा घटेगा नही। इस कार्यक्रम की धूम देश -विदेश में छाई हुई है।  गुरूजी का नाम शांति स्थापित करने वालो में अग्रगणीय है। इसके लिए उनका नाम शांति के नोबल पुरुस्कार के लिए अमरीका के द्वारा भेज दिया गया है।
     अभी तक विवेकानंद जी के आलावा किसी अन्य ने धर्म के मार्ग पर बिना किसी मतभेद के इतना नाम देश विदेश में नही कमाया है।हम उनके नाम को मिटटी में मिलाने में लगे ये अच्छा नही है।
        प्राकृतिक विपदा रूपी बारिश ने भी अवरोध पैदा किया जिसके कारण चारो और ठण्ड और कीचड़ बड़  गयी। बारिश की बूंदे और ठिठुरन का सामना करते हुए भी लोगो ने पूरे कामो को देखा और अपना सहयोग दिया। इस संगठन के लोग दुसरो की सहायता करने के लिए सदैव तैयार रहते है।  
            लोगो का उत्साह देखने लायक था। मुझे इस कार्यक्रम को देखने के लिए 3  घंटे जाम में फंसना पड़ा। उसके बाद कीचड़ में  4  किलोमीटर पैदल चलकर वहाँ पहुँच,  लोगो का जमघट देखकर हैरान हो गयी। मेरे जैसे अनेक लोग इतनी परेशानियों के बाबजूद वहाँ पहुंचकर अपने जीवन को सार्थक समझ रहे थे। लोगो के उत्साह में कोई कमी नही थी.
        इस कार्यक्रम को 185  देशो में देखा गया और 168 देशो के लोगो ने इसमें शिरकत की। इस में सभी धर्मो के लोगो ने अपने विचार प्रस्तुत किये। सभी देशो के लोगो ने अपने देश के भव्य कार्यक्रम पेश किये। हमें एक ही मंच पर सभी देशो के लोगो को देखने का मौका पहली बार मिला है। 185 देशो के लोगो ने भारत की विविधता में एकता देखी। भारतीय कपड़ो , नृत्य कलाओ और  वाद्य यंत्रो की  विविधता कही और नही देखी जा सकती है।
      कई देशो ने गुरूजी से विश्व सांस्कृतिक महोत्सव कार्यक्रम को उनके देश में आयोजित करने के लिए आग्रह किया है। यह हम सबके लिए सम्मान की बात है।
     इस कार्यक्रम में जब पाकिस्तान का सूफियाना नृत्य  पेश हुआ तब लोगो में विशेष उत्साह देखने को मिला। मुझे लग रहा था मुस्लिम देशो के लोग विरोध स्वरूप इसमें भाग नही लेंगे। लेकिन अधिकतर मुस्लिम देशो के लोग इसमें शामिल हुए जो   इनकी हिन्दू छवि को सर्वधर्म समभाव में बदलने में सफल रहा ।
      जीने की कला के माध्यम से हमें बताया गया हमारे शरीर की ९०% गंदगी सांसो के द्वारा बाहर निकाल दी जाती है लेकिन साँस लेने का तरीका यदि हमे सही तरह से आ जाये।
     हमें सदेव मुस्कुराते रहने का पाठ सिखाया जाता है हम निश्छल  भाव से मुस्कुराना भूल चुके है। मुस्कुराने से हमारे चेहरे की बहुत सारी मांसपेशिया कार्य करती है जिससे खून का दौरा बढ़ जाता है।  चेहरे की सुंदरता भी बढ़ जाती है। जबरदस्ती मुस्कुराने की कोशिश करते -करते कब  हमारे  दुःख दूर हो जाते है। और हम खुशियो के सागर में गोते लगाने लगते है इसका अहसास ही नही होता। वैज्ञानिक शोध से भी यह सही साबित हो चूका है।
     भारत के बहुत सारे मुख्यमंत्रियों और मंत्रियो ने आकर इस उत्सव का गौरव बढ़ाया है। केवल कांग्रेस ने अपनी कड़वाहट छिपाने की कोशिश नही की।
     दिल्ली के मुख्यमंत्री जी ने गुरूजी से स्वछता अभियान में सहयोग देने का आह्वान किया है इनके सहयोग से भारत सफाई के कार्यक्रम में सफल होगा। इस संगठन के लोग निष्काम भाव से समर्पित होते है। उन्हें दुसरो के लिए काम करके ख़ुशी होती है।  

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