#rail ke safar me badlav

     
रेल का सफर मेने कई बार किया है लेकिन इस बार सफर में आन्नद का अनुभव हुआ। मुझे रेल के सफरमें पहले की अपेक्षा सफाई अधिक देखने को मिली पहले मुझे  कभी रेल में इतनी ज्यादा सफाई कभी दिखाई नही दी थी।  रेल की पटरियां और प्लेटफार्म इस तरह साफ थे जैसे घर के फर्श हो दिल्ली जैसी जगह जहाँ  लाखो लोग आते है वहाँ  घर जैसी सफाई हैरानी का सबब बन रही थी। इससे पहले रेल की पटरी को देखने की हिम्मत नही होती थी वहाँ  भी सफाई दिख रही थी।
     रेल के टॉयलेट में सफाई थी लेकिन पानी के कम प्रयोग के कारण बदबू का अनुभव हो रहा था। उससे मुक्ति का भी कोई उपाय होना चाहिए। 
      इससे पहले शताब्दी ट्रेन में पत्रिका "रेलबंधु "नही मिली। इस बार पत्रिका पढ़ने के बाद उसके लेख अच्छे लगे। इसमें रेल के सफर के बारे में बताया गया था। उसमे मनोरंजक लेख भी थे। रेल बजट में हुए परिवर्तन को विस्तृत रूप से बताया गया था। रेल से जुड़े स्थानो पर होने वाले उत्सवो  के बारे में बताया गया था। जिन्हे घूमने का शौक हे यह उनके लिए लाभप्रद साबित होगा। 
      गाड़ी के शुरू होते ही गाड़ी में पानी की व्यवस्था शुरू हो गयी सुबह और ठण्ड के समय एक लीटर की पानी की बोतल पीने   की हिम्मत नही होती लेकिन एक लीटर की  बोतल मिलने पर थोड़ी  देर बाद उसे पीने के बारे में सोचना पड़ा लेकिन दिल्ली से काठगोदाम के पांच  घंटे के सफर में पूरी बोतल खत्म बहुत कम लोग कर सके थे. अधिकतर लोग आधी  से अधिक पानी भरी बोतले  वहाँ छोड़ कर चले गए। पानी की बर्बादी देख कर दुःख हो रहा था। इसके स्थान पर लम्बे सफर और  गर्मी के दिनों में एक लीटर और छोटे सफर में आधी लीटर पानी की बोतलों की  व्यवस्था करने से पानी की बचत होगी। जिन्हे ज्यादा प्यास लगती है उनके मांगने पर दूसरी बोतल का प्रबंध किया जा सकता है। सर्दी में ज्यादा पानी पीने  वाले २० % लोग ही होंगे। 
    पानी के एकदम बाद नींबू पानी दे गए। उसके बाद अख़बार आ गया। लगभग आधे घंटे के बाद चाय और बिस्कुट दे गए।  ये सब इतनी जल्दी आ  रहे थे कि उनके काम की प्रशंसा करने का मन कर रहा था। साढ़े  आठ बजे तक नाश्ता भी दे गए। अभी एक सामान खा कर निबटे भी नही थे की दूसरा सामान आ  जाता  था।  उनके काम की फुर्ती देखकर हैरानी हो रही थी। खाना भी गर्म और स्वाद था। . उसके बाद पुरे सफर में कुछ नही मिला। 
     लेकिन नाश्ता करने के बाद वेटर जब हमसे टिप लेने आये वह बिलकुल अच्छा नही लगा। ये सरकारी कर्मचारी है। इन्हे महीने भर का वेतन मिलता है। उनके टिप मांगने पर पाबंदी लगनी चाहिए। 

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