#yuva andolan or rajniti

                               युवा आंदोलन और राजनीति 
 हमारी राजनीति इस कदर गिर चुकी है। कि अब केवल वोट बैंक को बढ़ाने के बारे में ही सब सोचते है। किसी के अंदर देशभक्ति की भावना नही रही है। जो देशद्रोही   पार्टी का वोट बैंक बढ़ाने में सहायक होता है। उसके सभी गुनाह माफ़ करके ,उसे थाम कर, देशभक्त साबित करने में सभी राजनीतिक पार्टियाँ अपनी  रोटियाँ सेकने लगती  है। 
       हमने हजार साल की दासता इसी कारण सही है। सभी लोग अपने छोटे -छोटे स्वार्थ में लगे रहे किसी ने भी देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी नही समझी। जिसके कारण करोड़ो लोगो ने अपनी जान गवाई। हमारा देश सपेरों और जंगली लोगो का देश कहलाने लगा। हमारी उन्नत संस्कृति को तबाह कर दिया गया।  इस बात से लोगो पर असर नही होता था वे अपने क्षुद्र स्वार्थो में लीन रहे.
     कुछ क्रांतिकारियों ने विदेशो में जाकर उन्नत ज्ञान प्राप्त किया तब उन्हें भारतीयों की हीनता और दूसरे देशो  के लोगो की स्वतंत्रता का अभास  हुआ। उसे देखकर उनके अंदर विद्रोह पनपने लगा। उन्होंने देश को आजाद कराने की अलख जगा दी। उसके परिणामस्वरूप नया खून सुलगने लगा। उनके उत्सर्ग के कारण हम आजाद देश में रह रहे है। 
         लेकिन आज सभी राजनीतिक पार्टिया   देशभक्ति की भावना से रहित  है।इशरतजहां को आतंकवादी हरकतों में भाग लेने के कारण  उसको  साथियो समेत मौत की नीद सुला दिया गया था ।अनेक राजनीतिक पार्टियो के दबाब में आकर  उन पुलिस अफसरों को जेल की सजा सुना दी गयी। उनकी एक भी बात सच नही समझी गयी। 
         डेविड हेडली के बयान के नुसार इशरत जहाँ आतंकवादी थी  जब हेडली के अनुसार इशरत को मोदी को मारने के लिए भेजा गया था। उस बात पर भी राजनीतिक पार्टियाँ यकीं करने के लिए तैयार नही है। अब तक हेडली के प्रत्यावर्तन की मांग की जा रही थी। मुंबई कांड के हत्यारों को कटघरे के अंदर भेजने का शोर मच रहा था। लेकिन अब अपने भेद खुलने के कारण राजनीतिक पार्टियाँ हेडली के बयानों को झूठा साबित करने में लगी है।  यहाँ तक कि इशरत जहा की मौत  को शहादत करार दिया जा रहा है। उसकी मौत की सच्चाई पर से अब तो पर्दा उठ जाना चाहिए। हम अपने सैनिको और पुलिस वालो के कर्तव्य परायणता को कब तक संदेह से देखेंगे। 
        रोहित बेमुला ,कसाब, अफजलगुरू आदि अनेक देशद्रोहियो के लिए कब तक आंदोलन होते रहेंगे। हमारे युवा वर्ग को कब तक राजनीतिक पार्टियाँ गुमराह करती रहेंगी। उन्हें भी सच्चाई का सामना करना चाहिए।  
      बहुत सारे विश्विद्यालयों का ऐसा माहौल बन गया है कि  देश के विद्रोहियों के समर्थन में   नारे लगाये जा रहे है। भारतीय झंडा जलाया जा रहा है। उन्हें अनेक तरह से युवा वर्ग सम्मानित कर रहा है। युवा नेता अपने को लोगो की  निगाहो  में लाने के लिए गलत तरीको का इस्तेमाल करने से भी गुरेज नही कर रहे है। इसके कारण वे छोटी उम्र में ही लोगो के आकर्षण का केंद्र बन रहे है। इसके कारण उन्हें बहुत ज्यादा पैसा और सम्मान मिल रहा है। उनके सम्मान को देखकर लोग उस तरफ भाग रहे है। लेकिन भविष्य में इसके परिणाम किसी को नजर नही आ रहे है। 
        हमसे 70 साल की आजादी पचाई नही जा रही। हमारे नेता फिर से हमें हजार साल पहले की दासता के बंधनो में जकड़ने के लिए उतावले दिखाई दे रहे है। हमें सतर्क होकर सोचना चाहिए इसमें हमारी कितनी भलाई है। वरना फिर से भारत गुलामी के अंधेरो में खो जायेगा। 

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