#siyachin or bharat

                 सियाचिन और भारत 
   सियाचिन  की लड़ाई संसार की ऐसी लड़ाई है जो सबसे ऊंचाई पर और बेहद खतरनाक हालातो में लड़ी जा रही है। ये ऐसी लड़ाई है जिसमे आमने सामने के युद्ध में लोग कम मरते है बल्कि खतरनाक हालातो में अब तक 900 लोगो ने अपनी जान गवाई है। 
         आजादी के समय  इसके बटवारे पर ध्यान नही दिया गया।यहाँ का तापमान -50 तक चला जाता है ऑक्सीजन की बेहद कमी होती है। चारो तरफ केवल बर्फ दिखाई देती है। दृश्यता एक मीटर तक मुश्किल से होती है। वहाँ अकेले सैनिक पहरेदारी नही करते बल्कि कमसकम १० सैनिक आपस में रस्सी से बंधे होकर बाहर निकलते है।बर्फ की अतिशयता के कारण खाइया बर्फ से ढक जाती है। इस कारण उनका पता नही चल पाता है इसलिए सुरक्षा के तहत वे रस्सी से बंधे होते है। यदि कोई एक दुर्घटना का शिकार हो तो बाकि उन्हें बचा सके। लेकिन फ़रवरी के हादसे में सभी 10 सैनिक  काल के मुँह में समां गए। जनवरी में 4 सेनिको की आहुति हमें देनी पड़ी है। 
       अंग्रेजो को  लगा इतनी ख़राब स्थिति वाली जगह के लिए कौन कब्जा करने के लिए लड़ेगा लेकिन 1984 में जब पाकिस्तान  ने पर्वतारोहियों के द्वारा यहाँ अभियान शुरू किया तब भारत का ध्यान इस तरफ गया। भारत ने भी पर्वतारोही सैनिको  के दल को यहाँ भेजना शुरू किया। जिससे भारत का सियाचिन पर कब्जा बना रहे। ये ऐसी जगह है  जहाँ  से पाकिस्तान ,अफगानिस्तान,चीन  और रशिया जमीनी रस्ते से पहुचना आसान है।सियाचिन में भारत ऊंचाई पर स्थित होने के कारण युद्ध में हारता नही है बल्कि युद्ध होने पर पाकिस्तान को नुकसान ज्यादा होता है.
       यहाँ पर सैनिको को तैनात रखने का खर्च  करोडो  में  आता है जबकि सैनिको को मैदानी इलाको के सामान गर्म और ताजा खाना नसीब नही होता बल्कि उन्हें पैक खाने पर गुजारा करना पड़ता है। मकान भी केवल बर्फ के बने होते है  जिसमे सही मायने में करवटे बदलना भी मुश्किल होता है। वहाँ की ठण्ड का सामना करने के लिए विशेष रूप से तैयार कपड़े पहने जाते है। उन्हें नहाने और पीने के लिए मुश्किल से एक बोतल पानी मिलता है। यहाँ तीन महीने के लिए तैनाती होती है लेकिन ये हट्टे-कट्टे सैनिक इतने समय में कमजोर और बीमार होकर वापिस लौटते है। आप सोच के देखिये सेनिको के सामान जीवट कितने लोगो में होता है। ऐसी परिस्थिति उन्हें भी बीमार बना देती है।
       उन सेनिको तक सामान केवल हवाई रास्ते से और गर्मियों के दिनों में पहुँचाना  आसान होता है। जमीनी रास्ते से सभी काम असंभव है। हेलीकॉप्टर भी अच्छे मौसम में ही उड़ान भर पाते है वरना दृश्यता के आभाव में उनके लिए उड़ान भरना असंभव होता है। 
     इतनी खतरनाक परिस्थितियों में  कर्तव्य का निर्वाह करने वाले सैनिको को सलाम करने का जी चाहता है। 

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