#pariksha ke ank

                                                             परीक्षा के अंक 
     
         आजकल  बच्चो और बड़े दोनों में परीक्षा को लेकर तनाव भरा हुआ है। किस तरह बच्चा अच्छे नंबर लेकर पास हो जाये। उनके दिमाग में उसके पास होने की बात कहीं नही है। बल्कि उसके 90 परसेंट से ऊपर नंबर लाने का तनाव है। उन्हें पता है उनका बच्चा यदि  पास होकर कही प्रवेश पाने लायक नम्बर  नही ला  सका   तो उसकी मेहनत बेकार चली जाएगी तब कितने दुःख का सामना करना पड़ेगा। 
       पिछले साल मेरी सहेली की बेटी की  जब परीक्षा की तैयारी चल रही थी वह बहुत ज्यादा तनाव में रहने लगी। उसकी बेटी की  भूख -प्यास सब खत्म हो गयी। वह बहुत ज्यादा घबराने लगी। डर के कारण उसे उलटी लग गयी। उसके शरीर में पानी की कमी हो गयी। इस दरम्यान उसे कई बार डॉ के पास ले जाना पड़ा। उसकी माँ छुट्टी लेकर उसके साथ रहती पता नही बेटी की कितनी तबियत ख़राब हो जाये। उसे हर तरह में मानसिक तनाव से मुक्त रखने की कोशिश की जा रही थी। 
       उसका परीक्षा परिणाम में 95  परसेंट नम्बर प्राप्त हुए। लेकिन किसी के चेहरे पर ख़ुशी की आभा नजर नही आ  रही थी। जब कॉलेज में फार्म भरने का समय आया। उसने लगभग दस कॉलेज भर दिए। उसे जिस कॉलेज में प्रवेश चाहिए था। उसमे उसे प्रवेश नही मिल सका यहाँ तक उत्तरी केम्पस के किसी कॉलेज में प्रवेश नही मिला। वह बहुत हताश हो गयी। जिस कॉलेज में सबसे पहले नम्बर आया उसमे प्रवेश ले लिया।
      दूसरी लिस्ट में जिसमे नंबर आया उसमे प्रवेश दिला  दिया इस तरह से उसे लगभग पांच कॉलेज में प्रवेश दिलाया गया। ग्रेडिंग के हिसाब से अच्छे कॉलेज के चककर में कई कॉलेज बदल दिए गए लेकिन अंत तक उसे अपनी  पसंद के कॉलेज में प्रवेश नही मिल सका.क्योंकि उस कॉलेज की लिस्ट 98 परसेंट पर बंद हो चुकी थी। 
       आप खुद सोच कर देखिये बच्चे और उनके अभिभावकों की इतनी ज्यादा मेहनत भी उन्हें उनके लक्ष्य तक पंहुचा नही सकी.इस समय अपनी पसंद के कॉलेज में प्रवेश मिलना एक समस्या बन गयी है। सभी के चेहरे से हंसी गायब हो चुकी है।  बच्चो से ज्यादा उनके अभिभावक तनाव का सामना कर रहे है।  विद्यालयों के अद्यापक हर संभव कोशिश कर रहे है जिससे बच्चो को सफलता दिलाई जा सके।
       मुझे लगता है अभिभावकों को इतना तनाव अपने पेपर देते समय नही हुआ होगा जितना अब वे बच्चो के कारण तनाव में है। उनके बच्चे उसके  समय के हिसाब से ज्यादा मेहनत कर रहे है। दिन -रात किताबो में डूबे रहने के बाद भी जब मंजिल बहुत दूर दिखाई दे तब उन्हें कैसे हिम्मत दी जाये।    

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