परीक्षा के दिनों में बच्चे किस तरह अच्छे नम्बर ला सकते है। इस बारे में अपने विचार आपसे साझा कर रही हूँ। अच्छे नंबर लाना केवल याद करने पर निर्भर नही करता बल्कि आप उसे किस तरह प्रस्तुत करते है .इस बात पर अधिक निर्भर करता है।
मेने बहुत बच्चो को बहुत अधिक याद करते देखा है। लेकिन पेपरों के अंक उस पढ़ाई के मुताबिक नही आते है। उनके चेहरे पर दुःख की छटा साफ दिखाई देती है। उनके अभिभावक भी प्रतिस्पर्धा के जमाने में उसकी प्रस्तुति से संतुष्ट नही होते जबकि उनके अनुसार बच्चे को मेहनत के हिसाब से कम नंबर मिले है.
जैसे आप कही जाने से पहले अपने आप को अच्छी तरह से सजा सवार कर जाते है। वैसे ही पेपर करते वक्त अपना लेख गंदा करने से बचे। यदि अपने 30 प्रश्नो के उत्तर गंदे लेख में लिखे है। साथ वाले छात्र ने उन्ही प्रश्नो के उत्तर सुलेख में लिखे है। तो सुन्दर लेख वाले बच्चे को अद्यापक अनचाहे हर उत्तर में आधा नंबर फालतू देता चला जाता है। आप खुद सोचिये सामान सामग्री होने पर सुलेख वाला छात्र 15 नम्बर फालतू पा लेता है। ये 15 नम्बर कमसेकम है कुछ अद्यापक ऐसे में इससे ज्यादा नम्बर भी दे सकते है। क्योंकि सबसे पहले हमें अपने कार्य से अद्यापक को प्रभावित करना होता है।
आप पेपर करते समय किसी उत्तर को लिखते और काटते है। यदि एक बार ऐसा करते है तो उसे अनदेखा किया जा सकता है लेकिन बारबार होने पर पढ़ने वाले को झुंझलाहट होने लगती है। उसका असर भी नंबरों पर पड़ता है।
कभी प्रश्न मत लिखो। केवल प्रश्न का नम्बर और पहला अक्षर काफी है क्योंकि प्रश्न लिखने के नम्बर नही मिलते। अद्यापक को केवल पहचानना होता है कि किस प्रश्न का उत्तर लिखा गया है।
प्रश्न १,२ ,३ के हिसाब से लिखो यदि 2 का उत्तर नही आता तो उसकी जगह छोड़ कर अगले प्रश्न का उत्तर लिखना शुरू कर देना चाहिए उस उत्तर पर अधिक समय बर्बाद करना बेकार है।
मान लो प्रश्न 3 के - क, ख ,ग, घ, चार प्रश्न है आपको 2 प्रश्नो के उत्तर आते है बाकि 2 के नही। आप उसे वही छोड़ दे लेकिन उन उत्तरो के लिए स्थान भी वही छोड़ना है। क्योंकि अद्यापको को उसका उत्तर किसी और जगह पर मिलता है उसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है चारो प्रश्नो के उत्तर के नम्बर एक ही स्थान पर देने के कारण गलती हो जाती है क्योंकि उस खाने में हमने 2 लिखे हुए उत्तरो के नम्बर लगा दिए...दो उत्तर किसी अन्य स्थान पर मिलने पर उसकी झुंझलाहट लाजमी है। जिसका खमियाजा आप खुद सोचिये किसे उठाना पड़ेगा।बोर्ड के पेपरों में मार्कशीट में गलती के लिए कोई स्थान नही होता है।गलती होने पर उसे फाड़ के दूसरी बनानी पड़ती है।
किसी भी उत्तर को लिखने के बाद एक पंक्ति जरूर छोड़नी चाहिए क्योंकि अगला उत्तर सही तरीके से अलग से नजर आ सके।
लम्बे उत्तर का जबाब देते समय पॉइंट में देने की कोशिश करनी चाहिए पेराग्राफ में नही। पेराग्राफ में लिखने पर अद्यापक कम नंबर देता है। उन्हें लगता है इसने विस्तृत उत्तर नही दिया है जबकि पॉइंट में लिखने पर उसे अधिक ज्ञान का भान होता है।
मुख्य बात को अवश्य रेखांकित करना चाहिए।
प्रश्न पत्र पर जितने प्रश्नो के उत्तर लिख चुके हो उसे उसी समय चिन्हित कर देना चाहिए ताकि अंत में जब आप प्रश्न पत्र पढ़े तो आपको देखते ही पता चल जाये किसका उत्तर लिखना बाकि है। कई बार याद आता हुआ उत्तर भी छूट जाता है। बाद में इस बात का बहुत दुःख होता है।
अभी मेने सिर्फ वही गलतिया बताई है जो बच्चे अधिकतर करते है।








