#papar me achhe number kese laye

           
 परीक्षा के दिनों में बच्चे किस तरह अच्छे नम्बर ला  सकते है। इस बारे में अपने विचार आपसे साझा कर रही  हूँ।  अच्छे नंबर लाना केवल याद करने पर निर्भर नही करता बल्कि आप उसे किस तरह प्रस्तुत करते है  .इस बात पर अधिक निर्भर करता है। 
      मेने बहुत बच्चो को बहुत अधिक याद करते देखा है। लेकिन पेपरों के अंक उस पढ़ाई के मुताबिक नही आते है। उनके चेहरे पर दुःख की छटा साफ दिखाई देती है। उनके अभिभावक भी प्रतिस्पर्धा के जमाने में उसकी प्रस्तुति से संतुष्ट नही होते जबकि उनके अनुसार बच्चे को मेहनत के हिसाब से कम नंबर मिले है.
        जैसे आप कही जाने से पहले अपने आप को अच्छी तरह से सजा सवार कर जाते है। वैसे ही पेपर करते वक्त अपना  लेख गंदा करने से बचे। यदि अपने 30   प्रश्नो के उत्तर  गंदे लेख में लिखे है। साथ वाले छात्र ने उन्ही   प्रश्नो के उत्तर  सुलेख में लिखे है। तो सुन्दर लेख वाले बच्चे को अद्यापक अनचाहे हर उत्तर  में आधा नंबर फालतू देता चला जाता है।  आप खुद सोचिये सामान सामग्री होने पर सुलेख वाला छात्र 15  नम्बर फालतू पा  लेता है। ये  15  नम्बर कमसेकम है कुछ अद्यापक ऐसे में इससे ज्यादा नम्बर भी दे सकते है। क्योंकि सबसे पहले हमें अपने कार्य से अद्यापक को प्रभावित करना होता है। 
        आप पेपर करते समय किसी उत्तर को  लिखते और काटते है। यदि एक बार ऐसा करते है तो उसे अनदेखा किया जा सकता है लेकिन बारबार होने पर पढ़ने  वाले को झुंझलाहट होने लगती है। उसका असर भी नंबरों पर पड़ता है। 
       कभी प्रश्न मत लिखो। केवल प्रश्न का नम्बर और पहला अक्षर काफी है क्योंकि प्रश्न लिखने के नम्बर नही मिलते। अद्यापक को केवल पहचानना होता है कि  किस प्रश्न का उत्तर लिखा गया है। 
      प्रश्न १,२ ,३  के हिसाब से लिखो यदि 2  का उत्तर नही आता  तो उसकी जगह छोड़ कर अगले प्रश्न का उत्तर लिखना शुरू कर देना चाहिए  उस उत्तर पर अधिक समय बर्बाद करना बेकार है। 
        मान लो प्रश्न 3 के - क, ख ,ग, घ, चार प्रश्न है  आपको 2  प्रश्नो के उत्तर  आते है  बाकि 2 के नही। आप उसे वही  छोड़ दे लेकिन उन उत्तरो के लिए स्थान भी वही  छोड़ना है। क्योंकि  अद्यापको को उसका उत्तर किसी और जगह पर मिलता है उसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है चारो प्रश्नो के उत्तर के नम्बर एक ही स्थान पर देने के कारण गलती हो जाती है क्योंकि उस खाने में हमने 2 लिखे हुए उत्तरो के नम्बर लगा दिए...दो उत्तर किसी अन्य स्थान पर मिलने पर उसकी झुंझलाहट लाजमी है।  जिसका खमियाजा आप खुद सोचिये किसे उठाना पड़ेगा।बोर्ड के पेपरों में मार्कशीट में गलती के लिए कोई स्थान नही होता है।गलती होने पर उसे फाड़ के दूसरी बनानी पड़ती है।  
      किसी भी उत्तर को लिखने के बाद एक पंक्ति जरूर छोड़नी चाहिए क्योंकि अगला उत्तर  सही तरीके से अलग से नजर आ सके।
लम्बे उत्तर का जबाब देते समय पॉइंट में देने की कोशिश करनी चाहिए पेराग्राफ में नही। पेराग्राफ में लिखने पर अद्यापक  कम  नंबर देता है। उन्हें लगता है इसने विस्तृत उत्तर नही दिया है जबकि पॉइंट में लिखने पर उसे अधिक ज्ञान का भान होता है। 
      मुख्य बात को अवश्य रेखांकित करना चाहिए। 
     प्रश्न पत्र पर जितने प्रश्नो के उत्तर लिख चुके हो उसे उसी समय चिन्हित कर देना चाहिए ताकि अंत में जब आप प्रश्न पत्र पढ़े  तो आपको देखते ही पता चल जाये किसका उत्तर लिखना बाकि है। कई बार याद आता हुआ उत्तर भी छूट जाता है। बाद में इस बात का बहुत दुःख होता है। 
      अभी मेने सिर्फ वही गलतिया बताई है जो बच्चे अधिकतर करते है।    

#pariksha ke ank

                                                             परीक्षा के अंक 
     
         आजकल  बच्चो और बड़े दोनों में परीक्षा को लेकर तनाव भरा हुआ है। किस तरह बच्चा अच्छे नंबर लेकर पास हो जाये। उनके दिमाग में उसके पास होने की बात कहीं नही है। बल्कि उसके 90 परसेंट से ऊपर नंबर लाने का तनाव है। उन्हें पता है उनका बच्चा यदि  पास होकर कही प्रवेश पाने लायक नम्बर  नही ला  सका   तो उसकी मेहनत बेकार चली जाएगी तब कितने दुःख का सामना करना पड़ेगा। 
       पिछले साल मेरी सहेली की बेटी की  जब परीक्षा की तैयारी चल रही थी वह बहुत ज्यादा तनाव में रहने लगी। उसकी बेटी की  भूख -प्यास सब खत्म हो गयी। वह बहुत ज्यादा घबराने लगी। डर के कारण उसे उलटी लग गयी। उसके शरीर में पानी की कमी हो गयी। इस दरम्यान उसे कई बार डॉ के पास ले जाना पड़ा। उसकी माँ छुट्टी लेकर उसके साथ रहती पता नही बेटी की कितनी तबियत ख़राब हो जाये। उसे हर तरह में मानसिक तनाव से मुक्त रखने की कोशिश की जा रही थी। 
       उसका परीक्षा परिणाम में 95  परसेंट नम्बर प्राप्त हुए। लेकिन किसी के चेहरे पर ख़ुशी की आभा नजर नही आ  रही थी। जब कॉलेज में फार्म भरने का समय आया। उसने लगभग दस कॉलेज भर दिए। उसे जिस कॉलेज में प्रवेश चाहिए था। उसमे उसे प्रवेश नही मिल सका यहाँ तक उत्तरी केम्पस के किसी कॉलेज में प्रवेश नही मिला। वह बहुत हताश हो गयी। जिस कॉलेज में सबसे पहले नम्बर आया उसमे प्रवेश ले लिया।
      दूसरी लिस्ट में जिसमे नंबर आया उसमे प्रवेश दिला  दिया इस तरह से उसे लगभग पांच कॉलेज में प्रवेश दिलाया गया। ग्रेडिंग के हिसाब से अच्छे कॉलेज के चककर में कई कॉलेज बदल दिए गए लेकिन अंत तक उसे अपनी  पसंद के कॉलेज में प्रवेश नही मिल सका.क्योंकि उस कॉलेज की लिस्ट 98 परसेंट पर बंद हो चुकी थी। 
       आप खुद सोच कर देखिये बच्चे और उनके अभिभावकों की इतनी ज्यादा मेहनत भी उन्हें उनके लक्ष्य तक पंहुचा नही सकी.इस समय अपनी पसंद के कॉलेज में प्रवेश मिलना एक समस्या बन गयी है। सभी के चेहरे से हंसी गायब हो चुकी है।  बच्चो से ज्यादा उनके अभिभावक तनाव का सामना कर रहे है।  विद्यालयों के अद्यापक हर संभव कोशिश कर रहे है जिससे बच्चो को सफलता दिलाई जा सके।
       मुझे लगता है अभिभावकों को इतना तनाव अपने पेपर देते समय नही हुआ होगा जितना अब वे बच्चो के कारण तनाव में है। उनके बच्चे उसके  समय के हिसाब से ज्यादा मेहनत कर रहे है। दिन -रात किताबो में डूबे रहने के बाद भी जब मंजिल बहुत दूर दिखाई दे तब उन्हें कैसे हिम्मत दी जाये।    

#rajnitik dhancha

             
  हमारा राजनीतिक ढांचा इस कदर बिगड़ गया है कि लोगो के अंदर देशभक्ति की भावना खत्म हो गयी है। उन्होंने  केवल अपने आज को संवारने में सारी ताकत लगा दी  है। हमारे देश के  अधिकतर विश्विद्यालयों को देशद्रोहियो का अखाडा बना दिया गया है। कुछ लोगो ने स्वार्थवश ऐसा किया है वे हमारे नेता बनने का दम्भ भरते है।
       उन्होंने  वोट बैंक  बढ़ाने के सारे हथकंडे अपनाने शुरू कर दिए है। उनकी मंशा देखकर लगता है पाकिस्तान को फौज रखने की जरूरत नही है। उसे भारत और कश्मीर सौगात के रूप में हमारे नेता थाली में सजाकर सौपने के लिए तैयार है।
         पहले इस तरह के नारे कभी -कभार सुनाई देते थे लेकिन पहले हैदराबाद में ,फिर जवाहर लाल नेहरू विश्विद्यालय में, दिल्ली विश्विद्यालय में अब ये ज्वाला जाधवपुर विश्विद्यालय तक पहुँच चुकी है।  हमारे बच्चे देशद्रोही नही है। उन्हें भड़काया या लालच देकर इस तरह के बयान देने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। ये नेताओ की सोची समझी नीति है जिसके कारण हमारे युवा अपनी सोचने की ताकत गवा बैठे है। ये युवा किसी दूसरे देश से नही आये बल्कि ये हमारे चारो और फैले बच्चे है जिन्हे बरगलाया गया है। 
         भारतीय विश्विद्द्यालय कश्मीर को आजाद करने ,अफजल की फांसी का  बदला , कसाब और मकबूल भट्ट  की फांसी का विरोध अब कर रहे है। जबकि इनको मोदी के शासन से पहले फांसी दी गयी है। आरएसएस ,बीजेपी और मोदी सरकार के विरोध में नारे लगाने का तुक अब समझ नही आ  रहा है। इनकी बरसी मनाई जा रही है। इससे क्या प्रकट हो रहा है.
      पहले समय में विरोधी पार्टिया  जनता का ध्यान हटाने के लिए दंगा करवाती  थी। अब दंगो के स्थान पर युवा आंदोलन करवाये जा रहे है।मुझे जानकर हैरानी हुई इस सारे प्रपंच के कारण आप पार्टी से 3900 और कांग्रेस  पार्टी से ३००००० लोगो ने अपनी सदस्य्ता त्याग दी है। 
       हमारे सिख नेता जो कांग्रेस की सदस्य्ता छोड़ चुके है उनका बयान मुझे सोचने पर मजबूर कर रहा है। उनके अनुसार पहले पंजाब में कांग्रेश ने भिंडरावाला जैसे लोगो को खड़ा किया। उसके द्वारा आतंकवाद को बढ़ावा दिया। जब वह उनके नियंत्रण से बाहर होकर खालिस्तान देश की मांग करने लगा और पंजाब आतंकवाद का पर्याय बन गया तब उसे हरमिंदर साहव के अंदर मरवा दिया गया। इन सब में पंजाब के 36000 लोगो ने अपनी जान गवाई।  जिस समय पंजाब में आतंकवादियों की सेना तैयार की गयी थी तब उस समय के नेताओ ने सोचा भी नही होगा उनके कारण इस तरह का बबंडर मच जायेगा। 
      उन्होंने कहा है - जितने लोग शहीद हुए है उनकी विधवाए , घायल और अपंग सैनिक विरोध स्वरूप जंतर -मंतर पर धरना देंगे। 
       पाकिस्तान में विराट कोहली के प्रशंसक के द्वारा घर की छत पर तिरंगा फहराने की सजा के तौर पर 10 साल जेल में रहना पड़ेगा। उस देश में कोई इंसान पाकिस्तान का झंडा जलाने या देश विरोधी नारा लगाने की हिम्मत कर सकता है। वहाँ किसी नेता ने उस इंसान के लिए आंसू बहाने की गुस्ताखी नही की। 
       ये भारत ही ऐसा देश बन गया है। जहाँ  सेनिको या पुलिस कर्मियों की शहादत पर राजनीतिक पार्टिया आंसू नही बहाती बल्कि देशद्रोहियो के आंसू पोंछने फटाफट पहुंच जाती है। इससे तो लोगो को यही प्रेरणा मिलेगी" देशभक्त बनने की अपेक्षा देशद्रोही बनने के ज्यादा फायदे है।"
      हमारे सैनिक अपने परिवारो से दूर रह कर 24 घंटे देश की रक्षा में लगे रहते है। इस तरह के बयानों  से उनका मन कड़वाहट से नही भर जायेगा। कोन अपने लालो को सेना में भेजने के लिए तैयार होगा। उनकी शहादत की  कीमत उनका पूरा परिवार सारी जिंदगी आँसुओ में डूब कर बीताता है। 
      हमें देश के नौजवानो के अंदर देशभक्ति की भावना भरने की कोशिश करनी चाहिए ना की देश को नुकसान पहुंचा कर बदनाम करने की। 

      
         

#yuva andolan or rajniti

                               युवा आंदोलन और राजनीति 
 हमारी राजनीति इस कदर गिर चुकी है। कि अब केवल वोट बैंक को बढ़ाने के बारे में ही सब सोचते है। किसी के अंदर देशभक्ति की भावना नही रही है। जो देशद्रोही   पार्टी का वोट बैंक बढ़ाने में सहायक होता है। उसके सभी गुनाह माफ़ करके ,उसे थाम कर, देशभक्त साबित करने में सभी राजनीतिक पार्टियाँ अपनी  रोटियाँ सेकने लगती  है। 
       हमने हजार साल की दासता इसी कारण सही है। सभी लोग अपने छोटे -छोटे स्वार्थ में लगे रहे किसी ने भी देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी नही समझी। जिसके कारण करोड़ो लोगो ने अपनी जान गवाई। हमारा देश सपेरों और जंगली लोगो का देश कहलाने लगा। हमारी उन्नत संस्कृति को तबाह कर दिया गया।  इस बात से लोगो पर असर नही होता था वे अपने क्षुद्र स्वार्थो में लीन रहे.
     कुछ क्रांतिकारियों ने विदेशो में जाकर उन्नत ज्ञान प्राप्त किया तब उन्हें भारतीयों की हीनता और दूसरे देशो  के लोगो की स्वतंत्रता का अभास  हुआ। उसे देखकर उनके अंदर विद्रोह पनपने लगा। उन्होंने देश को आजाद कराने की अलख जगा दी। उसके परिणामस्वरूप नया खून सुलगने लगा। उनके उत्सर्ग के कारण हम आजाद देश में रह रहे है। 
         लेकिन आज सभी राजनीतिक पार्टिया   देशभक्ति की भावना से रहित  है।इशरतजहां को आतंकवादी हरकतों में भाग लेने के कारण  उसको  साथियो समेत मौत की नीद सुला दिया गया था ।अनेक राजनीतिक पार्टियो के दबाब में आकर  उन पुलिस अफसरों को जेल की सजा सुना दी गयी। उनकी एक भी बात सच नही समझी गयी। 
         डेविड हेडली के बयान के नुसार इशरत जहाँ आतंकवादी थी  जब हेडली के अनुसार इशरत को मोदी को मारने के लिए भेजा गया था। उस बात पर भी राजनीतिक पार्टियाँ यकीं करने के लिए तैयार नही है। अब तक हेडली के प्रत्यावर्तन की मांग की जा रही थी। मुंबई कांड के हत्यारों को कटघरे के अंदर भेजने का शोर मच रहा था। लेकिन अब अपने भेद खुलने के कारण राजनीतिक पार्टियाँ हेडली के बयानों को झूठा साबित करने में लगी है।  यहाँ तक कि इशरत जहा की मौत  को शहादत करार दिया जा रहा है। उसकी मौत की सच्चाई पर से अब तो पर्दा उठ जाना चाहिए। हम अपने सैनिको और पुलिस वालो के कर्तव्य परायणता को कब तक संदेह से देखेंगे। 
        रोहित बेमुला ,कसाब, अफजलगुरू आदि अनेक देशद्रोहियो के लिए कब तक आंदोलन होते रहेंगे। हमारे युवा वर्ग को कब तक राजनीतिक पार्टियाँ गुमराह करती रहेंगी। उन्हें भी सच्चाई का सामना करना चाहिए।  
      बहुत सारे विश्विद्यालयों का ऐसा माहौल बन गया है कि  देश के विद्रोहियों के समर्थन में   नारे लगाये जा रहे है। भारतीय झंडा जलाया जा रहा है। उन्हें अनेक तरह से युवा वर्ग सम्मानित कर रहा है। युवा नेता अपने को लोगो की  निगाहो  में लाने के लिए गलत तरीको का इस्तेमाल करने से भी गुरेज नही कर रहे है। इसके कारण वे छोटी उम्र में ही लोगो के आकर्षण का केंद्र बन रहे है। इसके कारण उन्हें बहुत ज्यादा पैसा और सम्मान मिल रहा है। उनके सम्मान को देखकर लोग उस तरफ भाग रहे है। लेकिन भविष्य में इसके परिणाम किसी को नजर नही आ रहे है। 
        हमसे 70 साल की आजादी पचाई नही जा रही। हमारे नेता फिर से हमें हजार साल पहले की दासता के बंधनो में जकड़ने के लिए उतावले दिखाई दे रहे है। हमें सतर्क होकर सोचना चाहिए इसमें हमारी कितनी भलाई है। वरना फिर से भारत गुलामी के अंधेरो में खो जायेगा। 

#hanumanthappa koppad

                                                   हनुमनथप्पा की मौत    
       
 हनुमनथप्पा ऐसा जावांज  सैनिक है जो एक मिसाल बन गया है जिस ठंडी हवा में लोगो के लिए जीवित बचना असम्भव है। ऐसे सर्द मौसम में उसने 125  घंटे गुजारे। इस सर्द मौसम में 15  मिनट में यदि मदद न मिले तो अधिकतर लोग दुनिया से कूच  कर जाते है।  उसके 6  दिन जीवित बचे रहना जादू के समान है। इसके लिए वैज्ञानिक शोध कर रहे है कि  उसकी मजबूत इच्छाशक्ति या उसका तंदरुस्त शरीर उसे  इतने समय तक जीवित रख सका। 
           जिस वातावरण में ऑक्सीजन की कमी ,पानी का अभाव, -50  डिग्री तापमान ,35  फीट तक बर्फ में दबा हुआ इंसान किस तरह इतने समय तक जीवित रह सका। इस कदर विपरीत माहौल में इंसान की त्वचा गलने लगती है। कुछ समय में शरीर के अंग काम करना  बंद कर देते है। इंसान की मानसिक स्थिति काम करने लायक नही रहती उसकी हालत पागलो के समान हो जाती है। खाने के अभाव में उसका जीवन जिज्ञासा का कारण बन गया है। इतने ख़राब मौसम में सैनिको की भूख -प्यास खत्म हो जाती है। नींद नही आती ,बेहद ठण्ड के कारण हार्ट अटैक जैसी बीमारी के शिकार  हो जाते है। 
        हनुमनथप्पा एक ऐसे छोटे से गाँव  से ताल्लुक रखते है  जहाँ उन्हें पढ़ने के लिए 6  किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। बचपन से उनके अंदर सेना में जाने की इच्छा थी। तीन बार सेना में ना चुने जाने के बाद भी उनके अंदर सैनिक बनने की इच्छा कम नही हुई। चौथी बार में उनका सेना के लिए चयन हो सका।
       उनके 13 साल के कार्यकाल में उन्होंने अपनी पसंद  से अधिक जोखिम वाली जगहे मांगी।  नौकरी के १० साल उन्होंने जोखिम वाली जगह जैसे कश्मीर,उत्तर -पूर्व और लद्दाख में बिताये । ऐसे जबांज सैनिक आजकल कम मिलते है जो मौत का डट कर सामना करते है। 

#siyachin or bharat

                 सियाचिन और भारत 
   सियाचिन  की लड़ाई संसार की ऐसी लड़ाई है जो सबसे ऊंचाई पर और बेहद खतरनाक हालातो में लड़ी जा रही है। ये ऐसी लड़ाई है जिसमे आमने सामने के युद्ध में लोग कम मरते है बल्कि खतरनाक हालातो में अब तक 900 लोगो ने अपनी जान गवाई है। 
         आजादी के समय  इसके बटवारे पर ध्यान नही दिया गया।यहाँ का तापमान -50 तक चला जाता है ऑक्सीजन की बेहद कमी होती है। चारो तरफ केवल बर्फ दिखाई देती है। दृश्यता एक मीटर तक मुश्किल से होती है। वहाँ अकेले सैनिक पहरेदारी नही करते बल्कि कमसकम १० सैनिक आपस में रस्सी से बंधे होकर बाहर निकलते है।बर्फ की अतिशयता के कारण खाइया बर्फ से ढक जाती है। इस कारण उनका पता नही चल पाता है इसलिए सुरक्षा के तहत वे रस्सी से बंधे होते है। यदि कोई एक दुर्घटना का शिकार हो तो बाकि उन्हें बचा सके। लेकिन फ़रवरी के हादसे में सभी 10 सैनिक  काल के मुँह में समां गए। जनवरी में 4 सेनिको की आहुति हमें देनी पड़ी है। 
       अंग्रेजो को  लगा इतनी ख़राब स्थिति वाली जगह के लिए कौन कब्जा करने के लिए लड़ेगा लेकिन 1984 में जब पाकिस्तान  ने पर्वतारोहियों के द्वारा यहाँ अभियान शुरू किया तब भारत का ध्यान इस तरफ गया। भारत ने भी पर्वतारोही सैनिको  के दल को यहाँ भेजना शुरू किया। जिससे भारत का सियाचिन पर कब्जा बना रहे। ये ऐसी जगह है  जहाँ  से पाकिस्तान ,अफगानिस्तान,चीन  और रशिया जमीनी रस्ते से पहुचना आसान है।सियाचिन में भारत ऊंचाई पर स्थित होने के कारण युद्ध में हारता नही है बल्कि युद्ध होने पर पाकिस्तान को नुकसान ज्यादा होता है.
       यहाँ पर सैनिको को तैनात रखने का खर्च  करोडो  में  आता है जबकि सैनिको को मैदानी इलाको के सामान गर्म और ताजा खाना नसीब नही होता बल्कि उन्हें पैक खाने पर गुजारा करना पड़ता है। मकान भी केवल बर्फ के बने होते है  जिसमे सही मायने में करवटे बदलना भी मुश्किल होता है। वहाँ की ठण्ड का सामना करने के लिए विशेष रूप से तैयार कपड़े पहने जाते है। उन्हें नहाने और पीने के लिए मुश्किल से एक बोतल पानी मिलता है। यहाँ तीन महीने के लिए तैनाती होती है लेकिन ये हट्टे-कट्टे सैनिक इतने समय में कमजोर और बीमार होकर वापिस लौटते है। आप सोच के देखिये सेनिको के सामान जीवट कितने लोगो में होता है। ऐसी परिस्थिति उन्हें भी बीमार बना देती है।
       उन सेनिको तक सामान केवल हवाई रास्ते से और गर्मियों के दिनों में पहुँचाना  आसान होता है। जमीनी रास्ते से सभी काम असंभव है। हेलीकॉप्टर भी अच्छे मौसम में ही उड़ान भर पाते है वरना दृश्यता के आभाव में उनके लिए उड़ान भरना असंभव होता है। 
     इतनी खतरनाक परिस्थितियों में  कर्तव्य का निर्वाह करने वाले सैनिको को सलाम करने का जी चाहता है। 

#galiyo me bhara ganda pani(mcd )ki hadtal

   
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मुझे बहुत दुःख के साथ कहना पड  रहा है। हमारे इलाके नत्थू कॉलोनी में पिछले कई दिनों से सफाई कर्मचारी नही आ  रहा है। उन्हें सरकार और mcd के अंदरुनी झगडे के कारण कई महीने से वेतन नही मिला है। हमारी और उनकी दयनीय दशा के लिए किसे जिम्मेदार ठहराऊ। उन सफाई कर्मचारियों को जिनको कई महीने से वेतन नही मिला , केंद्र या राज्य सरकार। जिसके झगडे में हम जैसे आम इंसान कूड़े और गंदगी के ठेर पर बैठने के लिए मजबूर हो रहे है।
      हमारी  10  फीट की छोटी सी गली है। जिसमे दोनों तरफ 2 -२ फीट जगह में कच्ची नालियाँ बनाई गयी है। कुल मिला कर चलने की जगह केवल 6 फीट बचती है। उस थोड़ी सी जगह में पानी के पाइप बिछे हुए  है। हमारे इलाके में चौड़ी सड़क पर सीवर लाइन डाली जा चुकी है। लेकिन पतली और छोटी गलियो में सीवर डालने से मना करते है लेकिन जब छोटी और पतली गलियो वालो से सब कुछ (चार्जेज )लिया जाता है तो उन्हें भी सीवर दिया जाना चाहिए। आप खुद बताइये इतनी पतली गली में लगभग 15 परिवारो के पाइप अलग - अलग बड़े सीवर तक जायेंगे तब कितनी सड़क खोदनी पड़ेगी। उस 6  फिट की बची हुई सड़क पर कितनी खुदाई की जाएगी। हमने mcd वालो से कई बार अनुरोध किया कि पतली गली में भी सीवर की उतनी ही जरूरत है जितनी बड़ी सड़क वालो को लेकिन उन पर कोई असर नही हुआ। ये सिलसिला 15 साल से चल रहा है। वे हमारी फरियाद  सुनकर चले जाते है लेकिन कोई उचित कार्यवाही करने के लिए तैयार नही होते। जब हमसे हर तरह के चार्जेज लिए जा रहे है तो सुविधाये भी देनी चाहिए लेकिन कोई हमारी परेशानी सुनने के लिए तैयार नही होता हम किससे  फरियाद करे।
         जब से mcd वालो की हड़ताल शुरू हुई है तब से गन्दा पानी नालियो से जा नही रहा। बल्कि पूरी सड़को पर फैला हुआ है। हम कामकाजी लोग घर से निकलने के लिए किस तरह रास्ता तय करते है। इतनी बदतर जिंदगी की आप कल्पना भी नही कर सकेंगे। मुझे सभी से शिकायत है जो आम इंसान की मज़बूरी नही समझ रहे है बल्कि लोगो की भावनाओ से खिलवाड़ कर रहे है। में चाहती हूँ  जो कैमरे के सामने झाड़ू लेकर फोटो खिचवा रहे है। जरा मेरी नत्थू कॉलोनी गली न. 7 में आकर एक बार इसे पैदल पार करके दिखाए या इसकी सफाई करने की हिम्मत दिखाये जिससे मै भी जानू यथार्थ और नाटक  में कितनी सच्चाई है।
        हमारी गली के लोगो को भी आधुनिक तरीके से जीवन जीने का अधिकार है। यदि आप उचित समझते है तो इन सड़को की भी प्रेशर क्लीनिंग करवा के दिखाए यहाँ की नालियाँ लगभग 15  फीट तक गहरी है लेकिन उचित सफाई नही होने के कारण गाद  से भरी हुई है। सफाई कर्मचारी  सही ढंग से सफाई नही करके जाता इसलिए दिनोदिन गंदगी बढ़ती जा रही है।
     हमारी गली में पिछले 7  दिन से पानी भरा हुआ है। इस हालत में गली में पाँव रखने की हिम्मत नही होती लगभग सभी परिवार घरो में कैद हो गए है। आप ही इससे निजाद पाने का तरीका हमें बताये।  

  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...