#panna dhai sacrifices to save udaysingh

      उदयसिंह  को बचाने  के लिए पन्ना धाय का त्याग 

       



 



पन्ना धाय  और उदय की कहानी  जिसने सुनी है। उसके लिए राजा उदयसिंह  को समझना आसान है। पन्ना धाय ने उदयसिंह  का जीवन बचाने  के लिए अपने बेटे की क़ुरबानी दे दी थी। एक साधारण बच्चे के लिए जीवन जीना जितना आसान होता है। राजकुमारों के लिए जीवन जीना  एक चुनौती होती है। उन्हें बचाने  के लिए कितने लोगो को रखा जाता है। तब भी कितनो को जीना नसीब हो पाता है। सोच कर  देखिये। 

       उसी हिसाब से उनका पालन -पोषण करने वाले भी तलवार की नौक पर चलते है। राजा के बदलते ही उनका और उनके परिवार के जीवन पर खतरा मंडराने लगता है।  हमने बचपन में पन्ना धाय  के बलिदान की कहानी सुनी थी। उसने अपने बेटे को मौत के घाट उतरते हुए देख कर भी उफ़ नहीं की थी। माँ की ममता पर उसने नियंत्रण रखा ताकि बेटे की क़ुरबानी बेकार न जाये। आज इसी कारण पन्ना धाय  और उदयसिंह की कहानी याद  की जाती है। वरना  कितने लोग जीते और मरते है। किसी को याद् नहीं रहते है  .जिनका काम असाधारण होता है। उन्हें दुनियां याद  रखती है। 

    उदयसिंह  राणा  प्रताप के बेटे थे। उनके पिता सारा जीवन अकबर से टककर  लेते रहे अंत समय तक हार नहीं मानी  . वह उस इंसान के झुझारू बेटे थे। राणा निर्माण उदयसिंह ने 1567  इसबी में उदयपुर का  करवाना  शुरू किया।  उन्ही के नाम पर इस शहर का नाम रखा गया है। यह आज भी अपनी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। 

   इस शहर का पुराना  नाम शिवि था। यह मेवाड़  राजस्थान के दक्षिण मध्य में एक रियासत थी। https://www.blogger.com/blog/post/edit/7394749868577857146/5331213636919215221

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#WHICH CITY IS THE BEST OF THE UDAYPUR AND JAYPUR

 उदयपुर और जयपुर मे सबसे अच्छा कौन सा शहर 

     




 

 जयपुर  राजस्थानी शहरों जैसा  एक शहर है। जहाँ सुबह और रात  सुहानी होती है। जबकि दोपहर बहुत गर्म होती है। यदि आप रात को  घूमना चाहो तो बहुत अच्छा लगता है। लेकिन भारतीय परम्परा में हम केवल दिन में घूमना पसंद करते है  . दिन के समय इतनी अधिक गर्मी महसूस होती है। कि  पानी पीने  की इच्छा पूरी नहीं हो पाती है। कितना भी पानी ले लो कम  पड़  जाता है। इसलिए यहां सर्दियों में जाना सही रहता है। हम जैसे लोग जो भरी गर्मी का सामना कर सकते है। लेकिन प्यास के कारण जान निकलने लगती है। 

       उदयपुर में जयपुर की अपेक्षा मौसम सुहाना होता है।  यहां पर हरियाली के दर्शन अधिक होते है। यहाँ पर ऊँचे पहाड़ उनपर बने हुए महल और मंदिर बहुत अच्छे लगते है। दोनों जगहों पार महल और मंदिर बहुत है। 

       राजस्थान की  जयपुर राजधानी रही है।  यहां पार भीड़ बहुत है जबकि उदयपुर में कम  भीड़ होती है। 

     जयपुर गुलाबी नगरी है तो उदयपुर सफेदनगरी है। दोनों की सुंदरता निराली है। 

     जयपुर की अपेक्षा मुझे उदयपुर ज्यादा  अच्छा लगा। यहां के लोग सीधे -सादे  है। वैसे सभी की अलग पसंद होती है। जयपुर में पड़ने वाले ज्यादा बच्चे और संसथान है। उसकी अपेक्षा उदयपुर में शिक्षा से संबंधित गतिविधियां कम  है। 

 में दिल्ली जैसी भीड़ -भाड़ के इलाके में रहती हूँ। इसलिए मुझे हमेशा शांति की तलाश रहती है। जहां मन का सुकून मिले हमेशा ऐसी जगह पर जाना अच्छा लगता है। यदि आप को भी ऐसी जगह अच्छी लगती है तो उदयपुर जरूर जाइये। आपको अच्छा लगेगा।               

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#ROMANTIC CITY OF THE EAST

                     पूरब का रोमांटिक शहर

 






विदेशो में रोमांटिक शहर का नाम आपने बहुत सारे शहरो का सुना होगा। लेकिन भारत में रहते हुए इस तरह की उपमा के बारे में कभी आपने सुना होगा।  मुझे नहीं लगता। भारत में प्यार छुपाने  में लोग सारी  कोशिश करते है। भारत में   ऐसा भी कोई शहर होगा जहां प्यार के दीवाने पहुंचते है। 

    चारो तरफ प्रकृति भी प्यार को बढ़ाने में सहयोग दे रही होगी। जहां हर तरह ख़ुशी महसूस होती है। अनेक छोटे बड़े होटलो में इस तरह के इंतजाम किये जाते है। जहां लोग सहूलियत महसूस कर  सके। 

     यहां के लोग डर  से दूर रहते है। उन्हें खतरे का अहसास कम  होता है।  यहां  पर लोगो को घर जैसा अहसास होता है। यहां के महल आदि जगह पर आकर राजसी अहसास होता है। 

 संसार के अधिकतर देशो से लोग प्यार का अहसास महसूस करने के लिए इस नगरी में आते है। यहां आकर उन्हें प्यार का अहसास की सुगंध फैली नजर आती है।  यहां आपको इससे सम्बन्धित अश्लीलता कही नजर नहीं आएगी। बल्कि हर तरफ एक खुशनुमा अहसास फैला नजर आता है। 

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# उदयपुर कब घूमने जाए

                   उदयपुर कब घूमने जाए 

         


राजस्थान एक गरम प्रदेश है । यहाँ का मौसम रात और सुबह सुहाना होता है लेकिन दिन मे बहुत गर्मी पड़ती है । यह राजस्थान के अन्य प्रदेशों की अपेक्षा  ठंडा  है । लेकिन यहाँ पर भी गर्मी पड़ती है । 

      आप अक्टूबर  से अप्रेल के महीने तक उदयपुर घूमने जा सकते है । आपको धरती पर स्वर्ग का अहसास होगा । आप वहाँ जाना बहुत पसंद करेंगे । ऊंचे पहाड़ ,बहती हुई नदी और बड़ी -बड़ी झीले    हमे  अपने पास बुला रही है । सुबह उठकर झीलों को देखना और शाम को ढलते हुए सुरज की किरणों का नदी के पानी के साथ खेलना । कई स्थानों पर शाम के समय विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है । जो मन को पकड़ लेता है । उठने की इच्छा  नहीं होती है ..

#NATURE CREATED THE BOUNDARY OF UDAIPUR

       उदयपुर की सीमा  का निर्माण   प्रकृति ने किया 

       


 उदयपुर की सीमा  प्राकृतिक है जिसे नदी और पहाड़ो ने बनाया है। कोसी नदी इसे  पूर्व  के सुन्सारी  जिले  से अलग करती है। कोसी  नदी उत्तर दिशा में बहती हुई भोजपुर और कोटंग से अलग करती है सिंधुली डिस्ट्रिक्ट पश्चिम में  तवा  खोला और दक्षिण मे  शिवालिक की छोटी पहाड़ियों से सिरहा और सप्तारी के तराई के इलाको से अलग करती है। उदयपुर के पूर्व में कोशी टप्पू वन्यसंरक्षण हे। जहा  अनेक पशु पक्षी रहते है जो सुन्सारी  और सप्तारी  जिले में पड़ता है। 

     पुराने समय में ये नेपाल के पूर्वी विकास क्षेत्र सागरमाथा जोन में पड़ता था। लेकिन अब इसे उससे अलग कर दिया गया है। 

#why udaypur called white city

             क्या उदयपुर सफ़ेद शहर है 

     


  आपने  पिंक सिटी जयपुर का नाम सुना होगा। नीला शहर जोधपुर को कहते है।  जब मे  उदयपुर पहुंची तब वहां के अधिकतर घर और महल सफेद रंग से रंगे  हुए थे। लोग अपनी हैसियत के अनुसार संगमरमर का इस्तेमाल करते दिखाई दिए। 

      राज महल भी सफेद रंग से रंगे  हुए थे। साथ ही वहां पर संगमरमर का इस्तेमाल भी बहुतायत से हुआ था। नीली झीलों और हरियाली के बीच में सफ़ेद रंग के बने हुए घर दूर से दिखाई देते है। 

    वहां पर प्रदूषण कम  है जिसके कारण उनपर मिटटी और मैल  का संगम नहीं है। इतनी अधिक झील राजस्थान जैसे इलाके में देखना हैरान करता है। 

   इसे राजस्थान का कश्मीर भी कहा जाता है। इसकी छटा निराली है 

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#FOUR DAYS REQUIRED TO VISIT UDAIPUR

     उदयपुर घूमने के लिए 4  दिन जरूरी 

   


  उदयपुर झीलों का शहर है। वहां पर एक दिन केवल नावों  की सैर और झीलों  के बीच में जगमंदिर को  देखने में  बीत जाता है। .इन झीलों  तरह की नाव  चलती है। साधारण नाव  और स्पीड बॉट  दोनों का मजा जरूर लेना चाहिए।   

दूसरा दिन बड़ा तालाब का शांत माहौल , सज्जनगढ़ के किले को देखने  , डूबते  हुए सूरज को निहारने में बीतता है। डूबता सूरज को देखने के लिए बहुत सारे पर्यटक वहां  पहुंचते है।  इतनी भीड़  उदयपुर में किसी और स्थल पर डूबते  हुए सूरज को देखने के लिए उमड़ती नहीं देखीं। सज्जनगढ़ किले में चिड़ियाघर भी है।  वहां के चिड़ियाघर को देखने के लिए समय जरूर  रखिये। 

      बागौर की हवेली  ,सहेलियों की बाड़ी ,  कार संग्रहालय और जगमंदिर देखने के लिए जरूरी है। 

     चौथे दिन आप जगदीश मंदिर और उदयपुर का सीटीपॅलेस को देखने मे बीत जायेगा।  यदि इन्हे नहीं देख पाओगे तो मन में मलाल रहेगा।  इसलिए  से कम समय लेकर उदयपुर मत जाना 

#COURTYARD OF MAIDEN

                          सहेलियों की बाड़ी 

     



 


 

राजस्थान में  औरतो पर बहुत  बंदिशे रही है।  बाकि भारत की अपेक्षा इस समय भी राजस्थान का माहौल औरतो के लिए बाहर निकलने लायक नहीं है लेकिन तब भी उनके लिए घर में ही अनेक सुविधाओं का इंतजाम किया जाता है। 

       आप को यह बात अजीब लगेगी लेकिन आप सोच कर देखे जितने भी आक्रमणकारियो ने भारत में प्रवेश किया वे अधिकतर पश्चिमी क्षेत्र से आये। इसलिए उनके साथ  आक्रमणकारियों ने  सबसे ज्यादा गलत व्यवहार किया । इस कारण औरतो को चारदीवारी में सुरक्षित रखा जाने लगा। आगे चलकर उन्हें इसी की आदत पड़  गयी। 

        सहेलियों की बाड़ी  एक लोकप्रिय और दर्शनीय स्थल है इसका निर्माण राणा सांगा  ने करवाया था। उद्यान के पास एक संग्रहालय है। सहेलियों की बाड़ी  एक राजकुमारी और उसकी अड़तालिस  सहेलियो  के लिए बनवाया गया था। राजस्थान के गर्म माहौल में बाग -बगीचों और फब्बारों के बीच में  यह जन्नत का अहसास देता है.  उसके लिए अद्भुत वास्तुकला का इस्तेमाल किया गया है। 

   बाग के  ताल में खिले हुए कमल के फूल और अनेक जानवरो के आकार  के फव्वारों में से निकलता हुआ पानी अलग अहसास देता है 

#udaypur palace 2

                               उदयपुर पैलेस 2 

         






         वहां पर विशेषतौर पर राजा रानियों से सम्बंधित कपडे और जेवरात  रखे हुए है। इसके आलावा उनकी  उन कपड़ो को  पहने  हुए तस्वीरें भी लगी हुई है। उनके जेवर आदि देखकर हैरानी होती है।  राजघराने की  पुरानी और नयी तस्वीरें रोमांचित कर देती है। हम जैसे साधारण लोग  खुद को  को राजा -महाराजा  के रूप में महसूस करने  लगे। 

          हमारे घरो में चांदी  मुश्किल से आधा किलो मिलेगी। लेकिन वहाँ  पूरा एक महल  चाँदी  के  सामान से सजा हुआ था। जिसमे प्रत्येक बर्तन कम -से  -कम  दस किलो का होगा। ऐसे बर्तन  बहुत सारे  थे। वहां पर चांदी  का घोडा, हाथी   पर बैठने का हौदा ,बग्गी ,दरवाजा जैसे बड़े -बड़े सामान देखकर आंखे खुली रह गई। 

         हम अपनी थोड़ी सी चीजों पर घमंड करते फिरते है। वहां पहुंचकर लगा हमारी इनके सामने कोई हैसियत  नहीं है। हम जैसे लोग केवल टिकट लेकर उन जगहों पर जाने का लुत्फ़ उठा सकते है। 


#udaypur palace 1

                        उदयपुर का महल 

     


  उदय पुर महल देखने का शुल्क  (300 /-)लगता है। वरिष्ठ नागरिको को और बच्चो को    रियायत दी जाती है इसलिए अपने साथ ID  प्रूफ रखना चाहिए    लेकिन इस महल के सामने इस शुल्क की ज्यादा अहमियत नहीं है। इस महल में बहुत कुछ देखने के लिए है जिसके सामने इतने पैसे देने  ज्यादा नहीं लगते है।  

        आप इसमें राजस्थानी वास्तुकला का अद्भुत   रूप देख सकते है। इसके झरोखे जहां से रानियां बाहर के दृश्य देख पाती  थी जिन्हे बाहर के लोग आसानी से नहीं देख सकते थे। इसमें राजाओ और रानियों के इस्तेमाल की वस्तुए भी रखी  गई है। कई कमरे तो बिलकुल इस तरह से सजे हुए है जैसे अभी इनमे आकर वो रहने वाले है। इस तरह से सजा हुआ पहला महल हमने देखा है  जिसका हर कोना सजा हुआ है। 

      उस समय की वस्तुए, शीशे के काम की पच्चीकारी का विशेष प्रयोग हुआ है। जिसका बारीक़ काम हैरान कर देता है। यहां के पुरे कमरे पच्चीकारी के काम से सुसज्जित है। जिनके लिए    विदेशो से  सामान मंगवाया गया है।  

        इनको अमीर  लोग विशेष तौर पर अपने परिवार के  विशेष समारोह के लिए इस्तेमाल कर सकते है। पिछले दिनों इसमें चार दिनों के  समारोह के लिए 800  करोड़  दिए गए।   यहाँ आकर राजसी अहसास महसूस होता है।   

  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...