#AJ KI PANCHVATI

          आज की पंचवटी 

सीता का हरण रावण ने जिस जगह किया था उसका नाम पंचवटी था। उस जगह जाने का मेरा मन बर्षो से था। मेरी नासिक में पंचवटी देखने की इच्छा अब पूरी हुई। मेरे ध्यान में पंचवटी हरीभरी जगह के रूप में स्थापित थी। ...जिसमे चारो और हरियाली के बीच एक पर्णकुटी में सीता ,राम और लक्ष्मण रहते थे। उनकी पर्णकुटी के पास गोदावरी नदी बहती थी लेकिन वहाँ जाने पर सब मिथ साबित हुआ। वहाँ पर्णकुटी के स्थान पर मुझे कंक्रीट का जंगल दिखाई दिया जैसे भारत में प्रत्येक जगह पर दिखाई देता है। उस स्थान पर एक सुंदर सा मंदिर बना दिया गया है। 
     


 हरियाली के स्थान पर  केवल पांच वट के पेड़ दिखाई देते है। वहाँ उतनी भीड़भाड़ है जितनी किसी अन्य तीर्थ स्थान पर दिखाई देती है। सीता गुफा नामक जगह में  घूम कर लगने वाली लाइन मन को हतोसाहित करती है। उन लाइनों में लग कर कई घण्टो में गुफा में देखने का मौका मिल पाता है। उस छोटी सी  गुफा में सीता जी की  मूर्ति रखी हुई है। 
      शांत स्वच्छ गोदावरी के घाट को पहचानना बहुत मुश्किल होता है। हर तरफ रौशनी की जगमगाहट के बीच पक्के घाटों के बीच गोदावरी नदी खो सी गयी है। पहले तो में इसे कोई तालाव समझी थी। लेकिन बाद में पंचवटी के पास गोदावरी की पहचान करवाई गयी तब अहसास हुआ मै  नदी देख रही हूँ।
      यदि रामलीला में अपने जिस जगह का वर्णन देखा है उस कल्पना को छोड़ कर पंचवटी देखने जाओगे तभी आपको सही पंचवटी के दर्शन हो पाएंगे। हजारो साल पुराणी पंचवटी की कल्पना को साथ ले जाने की भूल मत करना वरना मेरी तरह हतोत्साहित हो जाओगे। अब जंगल के स्थान पर केवल कंक्रीट का जंगल रह गया है।  

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