मुंबई की सजीव जिंदगी
हिंदी में बोर्ड पर लिखा जाता है। लेकिन शुद्ध हिंदी का प्रयोग नहीं होता बल्कि दिल्ली में जैसे मुफ्त लिखा जाता है यहाँ उसकी जगह मोफत देख कर हैरानी होती है लेकिन यहाँ मराठी और हिंदी दोनों जोड़ दिया जाता है। यहाँ आकर शुद्ध हिंदी बोलने और लिखने वाले कम दिखाई देते है। लेकिन उनकी हिंदी के इस्तेमाल करने के तरिके को देखकर मुझे आज की केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का सम्बाद याद आता है। "उन्होंने प्रसिद्ध सीरियल में शुद्ध हिंदी बोलने के कारण लिया गया था क्योंकि निर्देशक को हिंदी बोलने वाली लड़की नहीं मिल रही थी। "मुंबई घूमते हुए मुझे कई चीजे बहुत अजीब लगी। यहाँ पर अधिकतर जगहों पर
यहाँ पर अधिकतर जगह गिनती में देवनागरी हिंदी का प्रयोग होता है जैसे -१२३४ दिल्ली के लोगो को इसे समझना मुश्किल होता है। क्योंकि दिल्ली की पढ़ाई में ऐसे अंक अब इस्तेमाल नहीं होते हे। बच्चे जगह जगह गिनती के बारे में पूछ रहे थे।
यहाँ पर अनेक स्थानों पर सुलभ शौचालय बने हुए है। उनके लिए अलग से जगह निर्धारित नहीं की गयी है। बल्कि फुटपाथ पर ही बना दिए गए है। इतनी छोटी जगह पर इससे पहले मेने कभी सुलभ शौचालय नहीं देखे थे। जबसे सुलभ शौचालय की व्यवस्था शुरू हुई है तब से लोगों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। लेकिन सुलभ शौचालय के नियन्ता अपनी मर्जी से पैसे वसूल करते है। कही दो या कही पांच रूपये तक वसूल करते है।
मेने अब तक रेतीले समुद्र तट देखे थे। लेकिन यहाँ पर अनेक तरिके के समुद्र तट देखने को मिले नरीमन पॉइंट पर विशेष आकर के डिजायन के ब्लॉक दिखाई दिए तो बेस्टेण्ड पर ऐसा लग रहा था जैसे कोल्रतार में घोल कर रोड़ी डाल कर छोड़ दिया है। चौपाटी पर रेतीला मैदान है। यहाँ पर दिल्ली की अपेक्षा बहुत खुलापन दिखाई दिया। लेकिन यहाँ के समुद्र मे गंदगी दिखाई दे रही थी। जिसके कारण नहाने या पानी में खेलने की इच्छा नहीं हुइ।
लोकल ट्रेनों की टिकट बहुत सस्ती है। पांच रूपये की टिकट में बहुत लम्बा सफर कर सकते है। ये किसी और शहर में सम्भव नहीं है। इन ट्रेनों में तीन जगह महिलाओ के लिए अलग डिब्बे बने होते है। आगे -पीछे और बीच में लेकिन इनमे बहुत भीड़ होती है। जिन्हे इसमें चढ़ने की आदत होती है उन्हें आसानी होती है लेकिन भीड़ वाले समय में सामान के साथ चढ़ना बहुत मुश्किल होता है।
यहाँ की लोकल ट्रैन मन को मोह लेती है। जगह की तंगी के कारण प्लेटफार्म सड़क से दिखाई देते है। जैसे दिल्ली की मेट्रो जल्दी- जल्दी आती है। वैसे ही लोकल बहुत जल्दी आती रहती है।
मुंबई सपनो की नगरी में एकबार यात्रा जरूर करनी चाहिए। यहाँ अमीरो की अट्टालिकाओं से लेकर झोपडी में रहने वाले लोग भी रहते है।
यहाँ होटलो में रहना महंगा है लेकिन अगर सस्ते और अच्छे खाने की कोई कमी नहीं है। यहाँ पर खाना मगवाना किसी भी समय संभव है। हमने अपने होटल के कमरे में रात के एक और दो बजे तक खाना मंगवा कर देखा है। यहाँ के खाने में गुजराती जायका है। मतलब हल्की मिठास मिल जाती है।
मुंबई को देखकर कहा जा सकता है -"ये कभी सोता नहीं है।


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