सह्याद्रि के पहाड़ो की विविधता महाराष्ट्र में सह्याद्रि के पहाड़ है। मैने बहुत यात्राएँ की है अनेक तरह के पहाड़ देखे है। कही हरेभरे ,कही सूखे बिना हरियाली वाले पहाड़ ,गोल और नुकीले पहाड़ तो सभी ने देखे होंगे, लेकिन मेने पहली बार अलग -अलग आकारों के पहाड़ देखे जिन्हे देखकर प्रकृति की ताकत समझ में आयी किस शक्ति ने पहाड़ो को इतनी विविधता प्रदान की।
इन्हे देखकर यकीन करना मुश्किल हो रहा था। इनमे कुछ पहाड़ इस तरह बीच में से कई हिस्सों में कटे हुए थे। जैसे भगवान की विशाल तलवार ने इन्हे कई हिस्सों में काटने की कोशिश की है। सबसे ऊपर वाला पहाड़ अभी आपको सही तरह से समझ नहीं आ रहा होगा लेकिन सीधा खड़ा पहाड़ तकरीबन सात -आठ जगह से कटा हुआ है।
कुछ पहाड़ सबसे ऊँचाई पर बिलकुल पठार की शक्ल में है। वहाँ पर बहुत बड़ी आबादी निवास करती है। लगभग कई हजार लोग वहाँ रहते हुए देखकर यकीन करना मुश्किल हो रहा था। में मैदान में हूँ। या पहाड़ की ऊँचाई पर खड़ी हूँ। .
कही शिवलिंग के आकार के पहाड़ थे। जिन्हे देखकर लग रहा था जैसे कोई यहाँ पूजा करने आता है। कुछ बिलकुल नुकीले पहाड़ दिखाई दे रहे थे। यहाँ के पहाड़ो में पेड़ो के कारण हरियाली नहीं थी। इन पहाड़ो पर बहुत कम पेड़ दिखाई दे रहे थे बारिश के दिनों की घास हरीभरी हो जाती है। लेकिन अभी ये घास सुखी होने के कारण पीली और मुरझाई दिखाई दे रही थी।
इनमे गुफाओ के दर्शन भी हो रहे थे। इनमे कई छोटे मंदिर बने हुए थे। इन्हे देखकर मुझे एलिफेंटा ,अजंता एलोरा और कन्हेरी की गुफाये याद आ रही थी।
आपको मौका मिले तो इन विविधता भरे पहाड़ो की यात्रा अवश्य करना। एक नए अनुभव का अहसास होगा।
इन्हे देखकर यकीन करना मुश्किल हो रहा था। इनमे कुछ पहाड़ इस तरह बीच में से कई हिस्सों में कटे हुए थे। जैसे भगवान की विशाल तलवार ने इन्हे कई हिस्सों में काटने की कोशिश की है। सबसे ऊपर वाला पहाड़ अभी आपको सही तरह से समझ नहीं आ रहा होगा लेकिन सीधा खड़ा पहाड़ तकरीबन सात -आठ जगह से कटा हुआ है।
कुछ पहाड़ सबसे ऊँचाई पर बिलकुल पठार की शक्ल में है। वहाँ पर बहुत बड़ी आबादी निवास करती है। लगभग कई हजार लोग वहाँ रहते हुए देखकर यकीन करना मुश्किल हो रहा था। में मैदान में हूँ। या पहाड़ की ऊँचाई पर खड़ी हूँ। .
कही शिवलिंग के आकार के पहाड़ थे। जिन्हे देखकर लग रहा था जैसे कोई यहाँ पूजा करने आता है। कुछ बिलकुल नुकीले पहाड़ दिखाई दे रहे थे। यहाँ के पहाड़ो में पेड़ो के कारण हरियाली नहीं थी। इन पहाड़ो पर बहुत कम पेड़ दिखाई दे रहे थे बारिश के दिनों की घास हरीभरी हो जाती है। लेकिन अभी ये घास सुखी होने के कारण पीली और मुरझाई दिखाई दे रही थी।
इनमे गुफाओ के दर्शन भी हो रहे थे। इनमे कई छोटे मंदिर बने हुए थे। इन्हे देखकर मुझे एलिफेंटा ,अजंता एलोरा और कन्हेरी की गुफाये याद आ रही थी।
आपको मौका मिले तो इन विविधता भरे पहाड़ो की यात्रा अवश्य करना। एक नए अनुभव का अहसास होगा।




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