कश्मीर में सैनिको की दयनीय स्थिति
हमारे राजनीतिक दल अपने फायदे के लिए और शासन पर अपना नियंत्रण रखने के लिए सेनिको की बलि चढ़ाने और उनका अपमान करने से पीछे नहीं रहते। उनके दिमाग में भारत की भलाई के बारे में सोचने का समय नहीं होता। वो अपने स्वार्थ के लिए और दूसरे दल से खुद को ऊँचा दिखाने के लिए सभी सीमायें लाँघ जाते है- आजकल कश्मीर में सैना के हाथ किस तरह से बांध दिए गए है। हम सभी को दिखाई दे रहा है।
- एक हथियार बंद सैनिक को किस तरह पत्थर से मारा जा रहा है।
- उनपर थप्पड़ो की बारिश की जा रही है।
- उनका अनेक तरह से अपमान किया जा रहा है। उन्हें अपमानित करके किसका भला हो रहा है। जरा सोच के देखिये।
वर्तमान मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री एक दूसरे पर कटाक्ष करके मन का गुबार निकाल कर अपने को सर्वश्रेष्ठ साबित कर रहे है। फारुख अब्दुल्ला का बयान हास्यापद लगता है जब वे कहते है" -ये पत्थर महबूबा मुफ़्ती के कहने पर बरसाए जा रहे है। "इसका मतलब फारुख जी के शासन कल में उनके कहने पर इससे पहले आतंकवादी गलत हरकते करते होंगे।
उन्होंने एक पत्थर बाज का वीडियो दिखाया है। जिसमे एक पत्थर बाज को जीप से बांध कर घुमाया जा रहा है। उन्हें इस तरह पत्थर बाज के घुमाने पर एतराज है लेकिन सैनिको के अपमान पर वे मूक रहे या झूठ साबित करने में अपनी पूरी ताकत लगा रहे है।
उनके अनुसार वर्तमान मुख्यमंत्री अपने राज्य में अराजकता फैलाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। जरा सोच के देखिये कोई भी पदस्थ मुख्यमंत्री अराजकता के माहौल में कैसे शासन कर सकती है। मुझे तो इसमें आतंकवदियों और विपक्षी दल का हाथ लग रहा है आतंकवादियों और विपक्षी दल का हाथ लग रहा है।
- सैना के हाथ इस कदर बांध दिए गए है कि वह अपनी रक्षा हथियारों के साथ होने पर भी नहीं कर पा रही है।
- उनसे हम अपनी रक्षा की उम्मीद किस भरोसे करे।
- वे केवल अपमान सहने के लिए सैना में भर्ती हुए है।
- उनके अपमानित होते वीडियो देखकर या उनकी लाशे देखकर कौन अपने बेटो को सेना में भेजना चाहेगा।
मुझे बॉलीबुड और लोगो के इसके बिरुद्ध आवाज उठाने से हमारे राजनीतिक दल अब इस तरह से सेनिको को लेकर राजनीति करने से दस बार सोचेंगे
जिनकी बदौलत हम सुरक्षित रहकर सभी काम कर पाते है। सुख की नीद सोते है। उनका अपमान हमें किसी तरह बर्दाश्त नहीं करना चाहिए।
जो सैनिक जान की बाजी लगाते है। उनके लिए हमें भी एकजुट होना चाहिए। वरना अराजक तत्व हर और फैल जायेंगे। राजनीतिज्ञों की सुरक्षा ही केवल सब कुछ हो जायेगी। आम जनता पर अराजक तत्व हावी हो जायेंगे।
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