स्मार्टफोन और समस्याएं
आजकल हर तरफ स्मार्ट फोन , डिजिटल इंडिया ,डिजिटल मनी का शोर मचा हुआ है। ऐसा लगता है कि पूरा संसार इस फोन में समा गया है। इसमें इतने सारे काम होने लगे है कि इसके बिना रहना संभव नही लगता है। कुछ समय में हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। लोग सोते जागते फोन के साथ दिखाई देते है। हम जैसे लोग सोते समय अलार्म के कारण फोन साथ रखते है। जबकि रात में फोन नही आते है।ये फोन इतनी अहम चीज बन गया है। उतना ही चोरो का ध्यान इसे लूटने में लग गया है। पिछले 6 महीने में मेरे परिवार के 5 फोन चोरी हो गए। आपको लगेगा की हम लोग लापरवाह है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी। तीन फोन मेट्रो ट्रेन में बैग के अंदर से चोरी हो गए। एक टेबल पर ऑफिस में से उठा ले गया।
चौथे फोन की दास्ताँ सुनकर आप हैरान रह जायेगे। मेरी बेटी सुबह के समय स्कूटी से छोटी होली के दिन आ रही थी। उसकी दायीं जेब पर साथ के बाइक सवार ने गुब्बारा मारा। ध्यान बंटते ही चलती स्कूटी से उसकी जेब से फोन लेकर भाग गए। उनका पीछा करने पर भी धोखा देकर गायब हो गए।
हम उसी समय पुलिस स्टेशन मानसरोवर पार्क FIR दर्ज कराने गए। पुलिस ऑफिसर की ड्यूटी बदलने का समय था। इसलिए उन्होंने टालमटोल करते रहे। उनका व्यवहार हमारे साथ सहानुभूति पूर्ण था। लेकिन कोई काम नही हो रहा था। हम सुबह 8 बजे से वहाँ बैठे हुए थे लेकिन 10 बजे तक कुछ कार्य नही हुआ। इस बीच वे हमें दो बार फोन छीनने की जगह भी ले गए। हमने उनसे बहुत सारी बाते की लेकिन उन्होंने हमारे फोन की FIR नही लिखी। इस बीच हमें ये भी पता चला कि कुछ दुरी पर सीसीटीव लगे हुए है। हमने उनसे कहा उनका फुटेज दिखला दो। उन्होंने आना -कानी की और FIR भी दर्ज नही की।
11 बजे उन्होंने कहा ये मामला दूसरे थाने के अंदर आता है। आपकी शिकायत वहाँ दर्ज की जाएगी। उन्होंने हमारे इतने सारे घंटे बर्बाद कर दिए थे। उसके बाद उनका नकारात्मक जबाब सुनकर मुझे बहुत गुस्सा आया। उन्होंने सीसीटीव का फुटेज देखने के लिए बुलाने के लिए कहा था। हमने मानसरोवर पार्क वाले पुलिस ऑफीसर से ऑनलाइन FIR घर से दर्ज करवाने के लिए कहा तो उन्होंने कहा -आपको अभी कैमरे में उन लड़को की पहचान करवाने ले चलेगे इसलिए पुलिस स्टेशन जाना जरूरी हे। उनके शब्दो में उम्मीद दिखाई दे रही थी।
उसके बाद हम दूसरे थाने ज्योतिनगर पहुँचे। . वहाँ भी अफसर का इंतजार करना पड़ा। उन्होंने जब FIR कंप्यूटर पर लिखनी शुरू की ,तो लाइट चली गयी। उसका इन्तजाऱ करना पड़ा। जब लाईट आयी तो नेट नही आ रहा था। काफी मुश्किल से FIR दर्ज हुई। हमने उन्हें उस गाड़ी का आखिरी नम्बर (7717 ) बताया।उन्होंने कहा यदि आप पूरा नम्बर बताओ तब काम हो सकता है। आप खुद सोचिये जिसके साथ ऐसा हादसा हुआ है। उसके लिए पूरा नम्बर देखकर याद रखना इतना आसान होता है।फोन छिनते ही उन्होंने बाइक पूरी रफ्तार से दौड़ा दी थी
लेकिन अब 25 दिन बाद भी कोई उम्मीद दिखाई नही दे रही। उस पुलिस वाले का फोन खटखटाते रहते है अभी तक सीसीटीव से पहचान करवाने के लिए भी नही बुलाया गया। सब कुछ डिजिटल FIR नम्बर हमें मिला अफसर का फोन नम्बर और नाम भी दिया गया। लेकिन कोई भरोसा नही मिला।
उन फोनो के चोरी होने के साथ, उन्होंने डिजिटल पेमेंट करने के लिए पैसे भी डलवा रखे थे ,उन्होंने उसमे अपने आवश्यक नोट भी लिखे हुए थे। कई आवश्यक चीजे भी उसके साथ चली गयी। आप खुद सोच के देखिये स्मार्ट फोन के द्वारा दुनिया यदि मुट्ठी में आ गयी है। तो कुछ ही समय में दुनिया लूट भी जाती है। आजकल पर्स की तरह फोन हाथो से लुटे जा रहे है। जब तक सरकार सही तरह से कार्यवाही नही करती हम डिजिटल कैसे हो सकेंगे
जब सरकारी मशीनरी इस तरह से काम करती है तो डिजिटल इण्डिया कैसे हो सकेगा।

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