पाकिस्तान का बदला कुलभूषण जाधव
सेवानिवृत नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव की पाकिस्तानी सरकार के द्वारा चुपचाप फांसी की सजा सुनाना हैरान करने लायक है जिस देश में पूर्व प्रधानमंत्री का बेटा ढाई साल तक आतंकवादियों की कैद में रहा और मुख्यन्यायाधीश के बेटे को भी आतंकवादियों ने कई साल तक कैद करके रखा लेकिन पाकिस्तानी सेना खुद छुड़वाने में नाकाम हुई । उसको छुड़वाने के लिए अमरीकी सैना की मदद ली गयी।
इतने बदहाल देश की सेना ने जाधव जैसे सेवानिवृत व्यापारी को ईरान के चाबहार जैसी जगह से अपहरण करके उसे चीन अधिकृत जगह से जासूसी करते दिखाया जा रहा है। जब उसे पकड़ा गया उस समय उसके बारे में बिलकुल बताने की जरूरत नहीं समझी गयी। कोर्ट में चुपचाप मुकदमा लड़ा गया। किसी वकील को जाधव के मुकदमे की पैरवी करने नहीं दिया गया। भारतीय दूतावास को इसके बारे में बताना जरूरी नहीं समझा गया। तो एकदम फांसी की सजा के बारे में ही घोषणा किसलिए की गयी। जैसे चुपचाप फांसी पर लटका देते जब किसी नियम का पालन नहीं करना था। तो अब इस घोषणा से लगता है वे भारत से किसी तरह की सौदेबाजी करना चाहते है।
जाधव जी की फांसी लगता हैं जैसे भारत ने पाकिस्तान को पूरे संसार से अलग -थलग करने की सजा के तौर पर कदम उठाया है। पाकिस्तान ने इसके द्वारा अघोषित युद्ध की शुरुरात कर दी है।
जब से मोदी सरकार बनी है तब से भारत को परेशान करने के सभी कदम पाकिस्तान के द्वारा उठाये जा रहे है। पाकिस्तान ने आतंकवादियों को दूसरे देशो के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार किया था। ये आतंकवादी दूसरे देशो को बर्बाद करने के साथ अपने देश की तबाही का कारण बन रहे है। वहाँ राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री ,और मुख्यन्यायाधीश का परिवार असुरक्षित है तब आम जनता के बारे में सोच के देखिये वे किस तरह जिंदगी जीते होंगे।
पाकिस्तान के हालात केवल विदेशो से मिलने वाली मदद के द्वारा दुरुस्त है। वरना हर तरह से मृत देश की सूची में आ गया है।
मुंबई हमले के आरोपी के बारे में पाकिस्तान में बर्षो बाद भी फैसला नहीं लिया जा सका। उस देश में जाधव के खिलाफ इतनी जल्दी फैसला लेने की वजह सोचने पर भी नहीं मिल रही है।
उनके खिलाफ सबूत सही नहीं है। जाधव के इकबालिया बयान के कारण उन्हें आनन -फानन में फांसी देना गलत है। जेल के अंदर किसी को मार -पीट कर मजबूर करके कोई भी बयान दिलबाया जा सकता है। उन्हें इस बीच किसी भारतीय या परिवार से मिलने नहीं दिया गया। यदि पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था सही होती तो इस तरह की कार्यवाही करने की जरूरत नहीं होती।
पाकिस्तान में जाने वाले या रहने वाले मुझे लगता है हर समय सिर पर कफ़न बांधे रहते है। दिल में दहशत सवार हो रही है। वहाँ के नागरिक आतंकवादियों और न्यायव्यवस्था से किस तरह डरे सहमे रहते होंगे। जब वहाँ के शासक वर्ग ही महफूज नहीं है।
जाधव के लिए दूसरे देशो और संयुक्त राष्ट्र से मदद की गुहार लगानी पड़ेगी। कही पाकिस्तान भी उत्तरी कोरिया के जैसा निरंकुश देश न बन जाये। क्योंकि उसके पास आणविक ताकत आ चुकी है। इसलिए उसने अच्छे -बुरे का भेद करना छोड़ दिया है। उसके लिए शिष्टाचार के नियम कोई मायने नहीं रखते
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