#modi wave or importance of work (mcd election)

                           नगर निगम  चुनाव के मायने 

 चुनाव के नतीजे सोचने पर मजबूर कर रहे है। ये दो साल में इतना परिवर्तन कैसे हो गया। जिस पार्टी को 70 में से 67 सीटे मिली। उनके कार्यकर्ताओ की जमानते जब्त हो रही है। 270 में से केवल 46 सीटों तक कैसे सीमट गयी।

  •      ये केवल मोदी लहर का कमाल नहीं हो सकता , कही न कही  केजरीवाल जी का बड़बोला पन और न नकरात्मकता का माहौल भी है। वे बात के उत्तर में जबाब देते है हम बहुत कुछ करना चाहते है लेकिन केंद्र हमे करने नहीं देता। हमे अपने आस -पास कितने लोग दिखाई देते है जिन्हे आगे बढ़ने के लिए  हर सुविधा मिल जाती है। शीर्ष पर पहुंचने के लिए बहुत लोगो को अपना दुश्मन बनाना पड़ता है। उस जगह के दावेदार बहुत होते है। लेकिन योग्य और हिम्मती इंसान ही अपनी मेहनत के बल पर वहाँ तक पहुंच पाता है। हारे हुए इंसान अपनी असफलता का ठीकरा दुसरो पर फोड़ने की कोशिश करते है। 
  •        जनता को उनके झूठे वादों से भरोसा उठ गया है।
  •  उनके डराने और धमकाने का लोगो पर असर होना बंद हो गया है।
  •  उनके द्वारा दिखाए गए सपनो से लोगो का मोह भंग हो गया है।
  •  वे हमेशा दूसरो को गलत साबित करके खुद को श्रेष्ठ साबित करने में लगे रहते है। 
  • नेता हमेशा कठिनाइयों को दूर करके रास्ते बनाते है। कठिनाइयों का रोना नहीं रोते।

       उनका घमंडी स्वभाव और दूसरो के सुझावों को न मानना। जिसके कारण उनकी पार्टी में असंतोष व्यापने लगा है। सभी को अपना कद छोटा महसूस होने लगा है। कुछ उनकी पार्टी से अलग हो गए है और कुछ अलग होने के लिए तैयार है।

  •          उनकी कथनी और करनी में बहुत अंतर् है। वह बहुत सारी उम्मीदे दिखाते है। लेकिन पूरा नहीं कर पाते है। उनकी पार्टी आम आदमी की पार्टी बन कर सामने आयी थी लेकिन उन्होंने सबसे ज्यादा दोहन आम आदमी का किया। 
  • उनके बेलगाम खर्चे जिनकी पूर्ति जनता के पैसो से करने की कोशिश की जा रही है
  • । कौन सा आम आदमी 16000 की एक थाली में भोजन खाता है। 


    विज्ञापनों पर बेहिसाब खर्चे किसके पैसो से किये जा रहे है।
 राम जेठमलानी जैसे वकीलों की फ़ीस किसके पैसो से दी जा रही है। 
     उनके सभी विधायकों पर भ्रष्टाचार के आरोप गाहे -बगाहे लगते रहते है। उनकी इच्छाओं की पूर्ति के लिए सभी के लिए  अनेक पैसे कमाने के तरीके ईजाद किये जा रहे है। प्रत्येक विधायक एक से अधिक फायदों के पद पर आसीन है। जबकि चुनाव लड़ने वालो को जनता का सेवक कहा जाता है।
     आप के अधिकतर विधायक आपराधिक मामलो में लिप्त है। जबकि ये पार्टी भ्र्ष्टाचार के खिलाफ खड़ी  हुई थी। आम आदमी पार्टी एक आदमी की पार्टी बन गयी है। उसके गलत फैसलों को भी सभी को मानना पड़ता है। वरना उन्हें निष्कासित कर दिया जाता है। पार्टी का मतलब होता है सभी के सुझावों को सुनकर सही फैसले किये जाये। कोई भी इंसान खुद में सम्पूर्ण नहीं होता। हमे दूसरो के सहयोग की हमेशा जरूरत होती है।
     एक इंसान भाग्य के बल पर मुख्यमंत्री बन सकता है लेकिन दूसरे दिन यदि वह प्रधानमंत्री बनने के सपने देखने लगे तो सम्भव नहीं है। उसे इस पद पर रहते हुए काम करके खुद को साबित करना पड़ता है। जनता बेबकुफ़ नहीं है।
     मोदीजी को गाली देने के साथ उनके किये गए निस्वार्थ काम को भी देखना चाहिए। वे एक दिन में प्रधानमंत्री के पद तक नहीं पहुँचे उनकी बर्षो की तपस्या का फल है। उनके सहायको का सहयोग उन्हें  ऊंचाइयों तक पहुंचा रहा है।
         भारत में महात्मा गाँधी के बाद दूसरा इंसान है जिसका भारत के आलावा विदेशो में भी सम्मान हो रहा है। कोई एक इंसान गलत हो सकता है। लेकिन पूरी दुनिया किसी की मुरीद हो रही है। इसे उस इंसान की कामयाबी कहा जायेगा।
     एक समय ऐसा था जब   कई देशो ने उनके आने पर पाबंदी लगाई थी। लेकिन आज उसी के इंतजार में पलके बिछाई जा रही है। ये कोई तिलिस्म नहीं है। उनके किये गए कार्यो का नतीजा है।
     वे बहुत ज्यादा नहीं बोलते बल्कि कार्य करके दिखाते है।
     ये चुनावी नतीजे साबित करते है। केवल सपनो के माध्यम से ऊंचाइयों तक नहीं पहुँचा जा सकता बल्कि उन्हें यथार्थ पर उतारना पड़ता है। जनता को हमेशा बेबकुफ़ नहीं बनाया जा सकता है। जनता अपना अच्छा -बुरा समझती है। वह विकास के बायदो पर वोट नहीं देती बल्कि विकास करने वालो को वोट देती है। ये रास्ता बहुत कठिन है। इस राह में काँटे अधिक हे कलियाँ कम है।
      यदि आप मुझसे सहमत है तो like और शेयर कीजिये। अपने कमेंट भी दीजिये।

#increase noise cause the problem

              बढ़ता शोर परेशानी का सबब  

  पूजा पाठ, जागरण , अजान शादी व्याह के लिए होने वाले शोर शराबे के कारण सभी की एकाग्रता भंग होती है। पढ़ने वालो को बहाना मिल जाता है। बीमार लोगो की तकलीफ बढ़ जाती है। इस शोर का सामना हर बड़े शहर में रहने वाले को करना पड़ रहा है। तकलीफ हर किसी को हो रही है। लेकिन सभ्यता के नाते कोई बोलना नहीं चाहता है।सोनू निगम ने इसके खिलाफ आवाज बुलंद करने की कोशिश की तो उसको लेकर कटाक्ष किये जा रहे है। ये कदम  समुदाय विशेष के लिए  नहीं बल्कि हर शोर के खिलाफ उठाया जाना चाहिए।
 
   
 बड़े शहरो में रहने वाले हर समय शोर गुल का सामना करते है। उन्हें प्रकृति की आवाज सुनाई ही नहीं देती। जबकि एकाग्रता के लिए शांत माहौल होना चाहिए।
       यदि आप किसी छोटे शहर में जाओ तो आपको बड़े शहरो की अशांति का पता चलता है। वहाँ की शांति मन को मोह लेती है। ध्वनि प्रदूषण के बढ़ जाने के कारण सरकार ने कई स्थानों पर  हॉर्न बजाने पर पाबन्दी लगा दी है।
        मेने एक जगह विद्यालय के सामने सिनेमा हॉल देखा वहाँ  बहुत ज्यादा विज्ञापन आदि किया जा रहा था। जिसके कारण मेरा ही ध्यान उस तरफ आकर्षित हो रहा था। बच्चो के मन के बारे में सोचिये उनके लिए पढ़ाई में ध्यान लगाना कितना कठिन होता होगा।
        मंदिर और मस्जिद के पास के मकानों की कीमत कम होने लगी है। अब लोगो के लिए भक्ति भाव कम और काम के प्रति एकाग्रता की भावना ज्यादा महत्व रखने लगी है।  इससे आपको शोर का अंदाजा हो जायेगा।
        नॉर्वे जैसे देशो में लाऊड स्पीकर के आवाज तो दूर वहाँ पार्क में खेलने वाले बच्चो की खिलखिलाहट पर भी पाबंदी लगी हुई है। हम शोर शरावे के बीच रहने के कारण शांति के महत्व का मतलब नहीं समझ पा रहे है।
      शहरो में लोगो की सुनने की क्षमता कम होने लगी है। वे कई तरह की सूक्ष्म आवाज नहीं पहचान पाते।
      पहले जमाने में हर तरफ शांति का माहौल होने के कारण ऊँची आवाज कभी -कभार सुनाई देती थी इस कारण लोग उसे सुनकर आनंदित होते थे। लेकिन बढ़ता शोर, बेचैनी का कारण बनता जा रहा है।
       यदि आप मेरी बात से सहमत है तो like  और share कीजिये। 

#the tragic condition of the soldiers in kashmir

                         कश्मीर में सैनिको की दयनीय स्थिति 

 हमारे राजनीतिक दल अपने फायदे के लिए और शासन पर अपना नियंत्रण रखने के लिए सेनिको की बलि चढ़ाने और उनका अपमान करने से पीछे नहीं रहते। उनके दिमाग में भारत की भलाई के बारे में सोचने का समय नहीं होता। वो अपने स्वार्थ के लिए और दूसरे दल से खुद को ऊँचा दिखाने के लिए सभी सीमायें लाँघ जाते है

  •         आजकल कश्मीर में सैना के हाथ किस तरह से बांध दिए गए है। हम सभी को दिखाई दे रहा है।
  •  एक हथियार बंद सैनिक को किस तरह पत्थर से मारा जा रहा है।
  •  उनपर थप्पड़ो की बारिश की जा रही है।
  •  उनका अनेक तरह से अपमान किया जा रहा है। उन्हें अपमानित करके किसका भला हो रहा है। जरा सोच के देखिये। 
उनके हेलमेट को जबरदस्ती उतारने की कोशिश की जा रही है।
       वर्तमान मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री एक दूसरे पर कटाक्ष करके मन का गुबार निकाल कर अपने को सर्वश्रेष्ठ साबित कर रहे है। फारुख अब्दुल्ला का बयान हास्यापद लगता है जब वे कहते है" -ये पत्थर महबूबा मुफ़्ती के कहने पर बरसाए जा रहे है। "इसका मतलब फारुख जी के शासन कल में उनके  कहने पर इससे पहले आतंकवादी गलत हरकते करते होंगे।
       उन्होंने एक पत्थर बाज का वीडियो दिखाया है। जिसमे एक पत्थर बाज को जीप से बांध कर घुमाया जा रहा है। उन्हें इस तरह पत्थर बाज  के घुमाने पर एतराज है लेकिन सैनिको के अपमान पर वे मूक रहे या झूठ साबित करने में अपनी पूरी ताकत लगा रहे है।
     उनके अनुसार  वर्तमान मुख्यमंत्री अपने राज्य में अराजकता फैलाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। जरा सोच के देखिये कोई भी पदस्थ मुख्यमंत्री अराजकता के माहौल में कैसे शासन कर सकती है। मुझे तो इसमें आतंकवदियों और विपक्षी दल का हाथ लग रहा है आतंकवादियों और विपक्षी दल का हाथ लग रहा है। 

  •         सैना के हाथ इस कदर बांध दिए गए है कि वह अपनी रक्षा हथियारों के साथ होने पर भी नहीं कर पा रही है।
  •  उनसे  हम अपनी रक्षा की उम्मीद किस भरोसे करे।
  •  वे केवल अपमान सहने के लिए सैना में भर्ती हुए है।
  •  उनके अपमानित होते वीडियो देखकर या उनकी लाशे देखकर कौन अपने बेटो को सेना में भेजना चाहेगा।
 सेनिको की सहनशक्ति को सलाम करने का दिल चाहता है जिनके हाथ में हथियार है लेकिन बेहथियार लोग उन्हें अनेक तरह से अपमानित कर रहे है। 
     मुझे बॉलीबुड और लोगो के इसके बिरुद्ध आवाज उठाने से हमारे राजनीतिक दल अब इस तरह से सेनिको को लेकर राजनीति करने से दस बार सोचेंगे
        जिनकी बदौलत हम सुरक्षित रहकर सभी काम कर पाते है। सुख की नीद सोते है। उनका अपमान हमें किसी तरह बर्दाश्त नहीं करना चाहिए। 
        जो सैनिक जान की बाजी लगाते है। उनके लिए हमें भी एकजुट होना चाहिए। वरना अराजक तत्व हर और फैल जायेंगे। राजनीतिज्ञों की सुरक्षा ही केवल सब कुछ हो जायेगी। आम जनता पर अराजक तत्व हावी हो जायेंगे।
      यदि आप मेरे विचारो से सहमत हे तो like और share कीजिये।
           

#pakistan"s revenge kulbhushan jadhav

              पाकिस्तान का बदला कुलभूषण जाधव 

 सेवानिवृत नौसेना अधिकारी  कुलभूषण जाधव की पाकिस्तानी सरकार के द्वारा चुपचाप फांसी की सजा सुनाना हैरान करने लायक है जिस देश में पूर्व प्रधानमंत्री का बेटा ढाई साल तक आतंकवादियों  की कैद में रहा और मुख्यन्यायाधीश के बेटे को भी आतंकवादियों ने कई साल तक कैद करके रखा लेकिन पाकिस्तानी सेना  खुद छुड़वाने में नाकाम हुई ।  उसको छुड़वाने के लिए अमरीकी सैना की मदद ली गयी। 

     इतने बदहाल देश की सेना ने जाधव जैसे सेवानिवृत व्यापारी को ईरान के चाबहार जैसी जगह से अपहरण करके उसे चीन अधिकृत जगह से जासूसी करते दिखाया जा रहा है। जब उसे पकड़ा गया उस समय उसके बारे में बिलकुल बताने की जरूरत नहीं समझी गयी। कोर्ट में चुपचाप मुकदमा लड़ा गया। किसी वकील को जाधव के मुकदमे की पैरवी करने नहीं दिया गया। भारतीय दूतावास को इसके बारे में बताना जरूरी नहीं समझा गया। तो एकदम फांसी की सजा के बारे में ही घोषणा किसलिए की गयी। जैसे चुपचाप फांसी पर लटका देते जब किसी नियम का पालन नहीं करना था। तो अब इस घोषणा से लगता है वे भारत से किसी तरह की सौदेबाजी करना चाहते है। 
      जाधव जी की फांसी लगता हैं जैसे भारत ने पाकिस्तान को पूरे संसार से अलग -थलग करने की सजा के तौर पर कदम उठाया है। पाकिस्तान ने इसके द्वारा अघोषित युद्ध की शुरुरात कर दी है। 
        जब से मोदी सरकार बनी  है तब से भारत को परेशान करने के सभी कदम पाकिस्तान के द्वारा उठाये जा रहे है। पाकिस्तान ने आतंकवादियों को दूसरे देशो के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार किया था। ये आतंकवादी दूसरे देशो को बर्बाद करने के साथ अपने देश की तबाही का कारण बन रहे है। वहाँ राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री ,और मुख्यन्यायाधीश का परिवार असुरक्षित है तब आम जनता के बारे में सोच के देखिये वे किस तरह जिंदगी जीते होंगे। 
         पाकिस्तान के हालात केवल विदेशो से मिलने वाली मदद के द्वारा दुरुस्त है। वरना हर तरह से मृत देश की सूची में आ गया है। 
     मुंबई हमले के आरोपी के बारे में पाकिस्तान में  बर्षो बाद भी फैसला नहीं लिया जा सका। उस देश में जाधव के खिलाफ इतनी जल्दी फैसला लेने की वजह सोचने पर भी नहीं मिल रही है। 
      उनके खिलाफ सबूत सही नहीं है। जाधव के इकबालिया बयान के कारण उन्हें आनन -फानन में फांसी देना गलत है। जेल के अंदर किसी को मार -पीट कर मजबूर करके कोई भी बयान दिलबाया जा सकता है। उन्हें इस बीच किसी भारतीय या परिवार से मिलने नहीं दिया गया। यदि पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था सही होती तो इस तरह की कार्यवाही करने की जरूरत नहीं होती। 
       पाकिस्तान में जाने वाले या रहने वाले मुझे लगता है हर समय सिर पर कफ़न बांधे रहते है। दिल में दहशत सवार हो रही है। वहाँ के नागरिक आतंकवादियों और न्यायव्यवस्था से किस तरह डरे सहमे रहते होंगे। जब वहाँ के शासक वर्ग ही महफूज नहीं है। 
     जाधव के लिए दूसरे देशो और संयुक्त राष्ट्र से मदद की गुहार लगानी पड़ेगी। कही पाकिस्तान भी उत्तरी कोरिया के जैसा निरंकुश देश न बन जाये। क्योंकि उसके पास आणविक ताकत आ चुकी है। इसलिए उसने अच्छे -बुरे का भेद करना छोड़ दिया है। उसके लिए  शिष्टाचार के नियम कोई मायने नहीं रखते 
        यदि आप मेरे विचारो से सहमत है तो like  और share कीजिये। 

#initiation of kejriwal and jang


                                  केजरीवाल और जंग की शुरुआत 

  हम जब भी किसी अच्छे समय की कल्पना करते है। तब दिमाग में एक ही बात रहती है वही समय हमारे लिए अच्छा होगा जब किसी की पाबंदी के बिना काम करेंगे। बचपन में सोचते है वो वक्त बड़े होने पर आएगा। बड़े होने पर अपने से बड़े और रोबदार लोग बुरे लगते है जिनके हिसाब से हमे चलना पड़ता है। उस समय हम ऊँचे पद की कल्पना करने लगते है। लेकिन मेने अब तक की जिंदगी में ऐसा कोई पद या इंसान नहीं देखा जो किसी के प्रति जबाबदेह न हो। 

     जिन देशो में तानाशाही होती है। वहाँ कोई तानाशाह किसी के प्रति  जबाबदेह नहीं होता है। लेकिन एक तानाशाह कितना डरा सहमा जीवन जीता है। उसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते ,उसे रातो को नींद नहीं आती। वह किसी को अपना नहीं समझ पाता। सभी को संदेह की नजर से देखता है। वह विल्कुल अकेला होता है वह जरा सा संदेह होने पर अपने प्रियजन को मरवाने से बाज नहीं आता।
        एक बार रूस के तानाशाह स्टालिन की बेटी का बयान सुनकर हैरान रह गयी -"उसने कहा मुझे बचपन में  समझ नहीं आता था  में जिस रिस्तेदार को एकबार देख लेती हूँ वो मुझे दुबारा क्यों दिखाई नहीं देता।" बड़े होने पर उसे समझ आया की उसके सभी जानने वालो को संदेह के कारण मरवा दिया गया था। उसने बाद में रूस छोड़कर अमरीका में रहना शुरू कर दिया था। वही वह अपने अंतिम समय तक रही।
       मेने अपने आसपास के लोगो से लेकर ऊँचे पदों पर रहकर काम करने वाले लोगो तक परखा है। लेकिन जो लोग जितना अधिक काम करते है उनपर उतना ज्यादा आक्षेप लगाए जाते है। लेकिन वो उनको सहते हुए भी अपने काम में डटे रहते है। वो जिस जगह जाते है। वही फरियादी अपनी फरियाद लेकर पहुँच जाते है। काम के लिए धन्यवाद कम और शिकायते ज्यादा करते दिखाई देते है। उसके बाबजूद उनके होठो पर मुस्कान बनी रहती है। जबकि हम जैसे साधारण लोगो को यदि कोई जरा सा अपशब्द कह दे तो तिलमिला जाते है। 
     मोदी जी जैसे नेताओ को हर तरफ से अपशब्द सुनने को मिलते है लेकिन उनका काम करने का तरीका तारीफ के काबिल है। वे किसी के सामने मुखर होकर गलत नहीं बोलते। लगातार काम करते रहते है। उनका दृढ़निश्चय उन्हें किसी आरोप प्रत्यारोप के सामने झुकने से नहीं रोकता। उनके जैसे कठोर फैसले लेने वाला कद्दाबर नेता आसानी से नहीं मिलेगा। उनकी जबान से कभी नहीं सुना मुझे कोई काम नहीं करने देता मै तुम्हारी भलाई के लिए बहुत सारे काम करना चाहता हूँ। जैसे -जैसे उनके बारे में जाना उनकी परेशानिया समझ में आने लगी। 
         उनके गुजरात के प्रधानमंत्री बनते ही गोधरा कांड हो गया। उससे मुकाबला करने के लिए उन्होंने केंद्र से सेना मांगी। उन्होंने नहीं भेजी उन्होंने अपने दम पर दंगा रोका। जिसके लिए उन्हें लगभग पंद्रह सालो तक रुसवाई का सामना करना पड़ा इस कांड के बाद । कई देशो ने उन्हें अपने देश आने का वीजा तक देने से मना कर दिया। जैसे ये दंगा फैलाने वाले वे अकेले इंसान थे। लेकिन इसके बाद पूरे कार्यकाल में कभी ऐसा दंगा भड़कने नहीं दिया। उसकी शाबासी किसी ने नहीं दी। 
       दूसरे नेता केजरीवाल जी के बारे में जितना जानने की कोशिश करती हूँ। उतना ही उलझती जाती हूँ वे अपने हर काम के लिए दुसरो को दोष देने से बाज नहीं आते। वे पहले हर काम के लिए केन्द्र को दोष देकर बचने का रास्ता देखते थे। आज वे हर काम के लिए बीजेपी या मोदी पर लांछन लगाने लगते है। आजकल उनका आक्षेप शुंगलू कमेटी, ऑफिस, थाली या विज्ञापन से सम्बंधित बाते। वे आजकल हर बात के लिए चुनाव मे हराने का ढोंग करते है। उनसे कौन कहे -जब वे दिल्ली के मुख्यमंत्री बने थे तब बीजेपी ने उन्हें हराने की कोशिश नहीं की थी तब वे अपने दम पर भारी  बहुमत से जीते थे। आज उन्हें अपने पर भरोसा खत्म होता दिखाई दे रहा है.
       नेता वही होता है जो दूसरो के मनोभावों को समझ कर रणनीति बनाता है। हजारो में कोई एक नेता के गुण लेकर आता है। भीड़ का हिस्सा हर कोई बन सकता है। वह हर दबाब के बीच  निर्णय ले सकता है। जब उन्होंने राजयपाल से अनुमति लेकर काम करना जरूरी नहीं समझा तो उसकी जिम्मेदारी लेना भी सीखना चाहिए। उन्होंने राजयपाल नजीब जंग  पर आक्षेप लगा कर उन्हें उनके पद से हटवा दिया। आजकल राजयपाल बैजल से कड़वाहट साफ दिखाई दे रही हे.
       यदि आप मेरे विचारो से सहमत है  तो like और share कीजिये। 
         
     

#PROBLEMS MAKING DIGITAL INDIA WITH SMARTFHONE

   स्मार्टफोन और समस्याएं 

  आजकल हर तरफ स्मार्ट फोन , डिजिटल इंडिया ,डिजिटल मनी का शोर मचा हुआ है। ऐसा लगता है  कि पूरा संसार इस फोन में समा गया है। इसमें इतने सारे  काम होने लगे है कि इसके बिना रहना संभव नही लगता है। कुछ समय में हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। लोग सोते जागते फोन के साथ दिखाई देते है। हम जैसे लोग सोते समय अलार्म के कारण फोन साथ रखते है। जबकि रात में फोन नही आते है। 


     ये फोन इतनी अहम चीज बन गया है। उतना ही चोरो का ध्यान इसे लूटने में लग गया है। पिछले 6 महीने में मेरे परिवार के 5 फोन चोरी हो गए। आपको लगेगा की हम लोग लापरवाह है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी। तीन फोन मेट्रो ट्रेन में बैग के अंदर  से चोरी हो गए। एक टेबल पर ऑफिस में से उठा ले गया।
      चौथे फोन की दास्ताँ सुनकर आप हैरान रह जायेगे। मेरी बेटी सुबह के समय स्कूटी  से छोटी होली के दिन आ रही थी। उसकी दायीं जेब पर साथ के बाइक सवार ने गुब्बारा मारा। ध्यान बंटते ही चलती स्कूटी  से उसकी जेब से फोन लेकर भाग गए। उनका पीछा करने पर भी धोखा देकर गायब हो गए। 
       हम उसी समय पुलिस स्टेशन मानसरोवर पार्क  FIR  दर्ज कराने गए। पुलिस ऑफिसर की ड्यूटी बदलने का समय था। इसलिए उन्होंने टालमटोल करते रहे। उनका व्यवहार हमारे साथ सहानुभूति पूर्ण था। लेकिन कोई काम नही हो रहा था। हम सुबह 8 बजे से वहाँ बैठे हुए थे लेकिन 10 बजे तक कुछ कार्य नही हुआ। इस बीच वे हमें दो बार फोन छीनने की जगह भी ले गए। हमने उनसे बहुत सारी बाते की लेकिन उन्होंने हमारे फोन की FIR नही लिखी। इस बीच हमें ये भी पता चला कि कुछ दुरी पर सीसीटीव लगे  हुए है। हमने उनसे कहा उनका फुटेज दिखला दो। उन्होंने  आना -कानी की और FIR भी दर्ज नही की। 
     11 बजे उन्होंने कहा ये मामला दूसरे थाने के अंदर आता है। आपकी शिकायत वहाँ दर्ज की जाएगी। उन्होंने हमारे इतने सारे घंटे बर्बाद कर दिए थे। उसके बाद उनका नकारात्मक जबाब सुनकर मुझे बहुत गुस्सा आया।   उन्होंने सीसीटीव का फुटेज देखने के लिए बुलाने के लिए कहा था। हमने मानसरोवर पार्क वाले पुलिस ऑफीसर से  ऑनलाइन FIR घर से दर्ज करवाने के लिए कहा तो उन्होंने कहा -आपको अभी कैमरे में उन लड़को की पहचान करवाने ले चलेगे इसलिए  पुलिस स्टेशन जाना जरूरी हे।  उनके शब्दो में उम्मीद दिखाई दे रही थी। 
       उसके बाद हम दूसरे थाने ज्योतिनगर पहुँचे। . वहाँ भी अफसर का इंतजार करना पड़ा। उन्होंने जब FIR कंप्यूटर पर लिखनी शुरू की ,तो लाइट चली गयी। उसका इन्तजाऱ करना पड़ा। जब लाईट आयी तो नेट नही आ रहा था। काफी मुश्किल से FIR दर्ज हुई। हमने उन्हें उस गाड़ी का आखिरी नम्बर (7717 ) बताया।उन्होंने कहा यदि आप पूरा नम्बर बताओ तब काम हो सकता है। आप खुद सोचिये जिसके साथ ऐसा हादसा हुआ है। उसके लिए पूरा नम्बर देखकर याद रखना इतना आसान होता है।फोन छिनते ही उन्होंने बाइक पूरी रफ्तार से दौड़ा दी थी  
        लेकिन अब 25  दिन बाद भी कोई उम्मीद दिखाई नही दे रही। उस पुलिस वाले का फोन खटखटाते रहते है अभी तक सीसीटीव से पहचान करवाने के लिए भी नही बुलाया गया। सब कुछ डिजिटल FIR  नम्बर हमें मिला अफसर का फोन नम्बर और नाम भी दिया गया। लेकिन कोई भरोसा नही मिला। 
       उन फोनो के चोरी होने के साथ, उन्होंने डिजिटल पेमेंट करने के लिए पैसे भी डलवा रखे थे ,उन्होंने उसमे अपने आवश्यक नोट भी लिखे हुए थे। कई आवश्यक चीजे भी उसके साथ चली गयी। आप खुद सोच के देखिये स्मार्ट फोन के द्वारा दुनिया यदि मुट्ठी में आ गयी है। तो कुछ ही समय में दुनिया लूट भी जाती है। आजकल पर्स की तरह फोन हाथो से लुटे जा रहे है। जब तक सरकार सही तरह से कार्यवाही नही करती हम डिजिटल कैसे हो सकेंगे 
        जब सरकारी मशीनरी इस तरह से काम करती है तो डिजिटल इण्डिया कैसे हो सकेगा। 

  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...