नगर निगम चुनाव के मायने
चुनाव के नतीजे सोचने पर मजबूर कर रहे है। ये दो साल में इतना परिवर्तन कैसे हो गया। जिस पार्टी को 70 में से 67 सीटे मिली। उनके कार्यकर्ताओ की जमानते जब्त हो रही है। 270 में से केवल 46 सीटों तक कैसे सीमट गयी।- ये केवल मोदी लहर का कमाल नहीं हो सकता , कही न कही केजरीवाल जी का बड़बोला पन और न नकरात्मकता का माहौल भी है। वे बात के उत्तर में जबाब देते है हम बहुत कुछ करना चाहते है लेकिन केंद्र हमे करने नहीं देता। हमे अपने आस -पास कितने लोग दिखाई देते है जिन्हे आगे बढ़ने के लिए हर सुविधा मिल जाती है। शीर्ष पर पहुंचने के लिए बहुत लोगो को अपना दुश्मन बनाना पड़ता है। उस जगह के दावेदार बहुत होते है। लेकिन योग्य और हिम्मती इंसान ही अपनी मेहनत के बल पर वहाँ तक पहुंच पाता है। हारे हुए इंसान अपनी असफलता का ठीकरा दुसरो पर फोड़ने की कोशिश करते है।
- जनता को उनके झूठे वादों से भरोसा उठ गया है।
- उनके डराने और धमकाने का लोगो पर असर होना बंद हो गया है।
- उनके द्वारा दिखाए गए सपनो से लोगो का मोह भंग हो गया है।
- वे हमेशा दूसरो को गलत साबित करके खुद को श्रेष्ठ साबित करने में लगे रहते है।
- नेता हमेशा कठिनाइयों को दूर करके रास्ते बनाते है। कठिनाइयों का रोना नहीं रोते।
उनका घमंडी स्वभाव और दूसरो के सुझावों को न मानना। जिसके कारण उनकी पार्टी में असंतोष व्यापने लगा है। सभी को अपना कद छोटा महसूस होने लगा है। कुछ उनकी पार्टी से अलग हो गए है और कुछ अलग होने के लिए तैयार है।
- उनकी कथनी और करनी में बहुत अंतर् है। वह बहुत सारी उम्मीदे दिखाते है। लेकिन पूरा नहीं कर पाते है। उनकी पार्टी आम आदमी की पार्टी बन कर सामने आयी थी लेकिन उन्होंने सबसे ज्यादा दोहन आम आदमी का किया।
- उनके बेलगाम खर्चे जिनकी पूर्ति जनता के पैसो से करने की कोशिश की जा रही है
- । कौन सा आम आदमी 16000 की एक थाली में भोजन खाता है।
विज्ञापनों पर बेहिसाब खर्चे किसके पैसो से किये जा रहे है।
राम जेठमलानी जैसे वकीलों की फ़ीस किसके पैसो से दी जा रही है।
उनके सभी विधायकों पर भ्रष्टाचार के आरोप गाहे -बगाहे लगते रहते है। उनकी इच्छाओं की पूर्ति के लिए सभी के लिए अनेक पैसे कमाने के तरीके ईजाद किये जा रहे है। प्रत्येक विधायक एक से अधिक फायदों के पद पर आसीन है। जबकि चुनाव लड़ने वालो को जनता का सेवक कहा जाता है।आप के अधिकतर विधायक आपराधिक मामलो में लिप्त है। जबकि ये पार्टी भ्र्ष्टाचार के खिलाफ खड़ी हुई थी। आम आदमी पार्टी एक आदमी की पार्टी बन गयी है। उसके गलत फैसलों को भी सभी को मानना पड़ता है। वरना उन्हें निष्कासित कर दिया जाता है। पार्टी का मतलब होता है सभी के सुझावों को सुनकर सही फैसले किये जाये। कोई भी इंसान खुद में सम्पूर्ण नहीं होता। हमे दूसरो के सहयोग की हमेशा जरूरत होती है।
एक इंसान भाग्य के बल पर मुख्यमंत्री बन सकता है लेकिन दूसरे दिन यदि वह प्रधानमंत्री बनने के सपने देखने लगे तो सम्भव नहीं है। उसे इस पद पर रहते हुए काम करके खुद को साबित करना पड़ता है। जनता बेबकुफ़ नहीं है।
मोदीजी को गाली देने के साथ उनके किये गए निस्वार्थ काम को भी देखना चाहिए। वे एक दिन में प्रधानमंत्री के पद तक नहीं पहुँचे उनकी बर्षो की तपस्या का फल है। उनके सहायको का सहयोग उन्हें ऊंचाइयों तक पहुंचा रहा है।
भारत में महात्मा गाँधी के बाद दूसरा इंसान है जिसका भारत के आलावा विदेशो में भी सम्मान हो रहा है। कोई एक इंसान गलत हो सकता है। लेकिन पूरी दुनिया किसी की मुरीद हो रही है। इसे उस इंसान की कामयाबी कहा जायेगा।
एक समय ऐसा था जब कई देशो ने उनके आने पर पाबंदी लगाई थी। लेकिन आज उसी के इंतजार में पलके बिछाई जा रही है। ये कोई तिलिस्म नहीं है। उनके किये गए कार्यो का नतीजा है।
वे बहुत ज्यादा नहीं बोलते बल्कि कार्य करके दिखाते है।
ये चुनावी नतीजे साबित करते है। केवल सपनो के माध्यम से ऊंचाइयों तक नहीं पहुँचा जा सकता बल्कि उन्हें यथार्थ पर उतारना पड़ता है। जनता को हमेशा बेबकुफ़ नहीं बनाया जा सकता है। जनता अपना अच्छा -बुरा समझती है। वह विकास के बायदो पर वोट नहीं देती बल्कि विकास करने वालो को वोट देती है। ये रास्ता बहुत कठिन है। इस राह में काँटे अधिक हे कलियाँ कम है।
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