#dharm or shasn


                                                       धर्म और शासनं 

      भारतीय सभ्यता हिन्दू सभ्यता कहलाती  है। प्राचीन काल में जब यूरोपियन देश जंगलों में निवास कर रहे थे। उस समय हिन्दू सभ्यता दूर तक फैली हुई थी। हमारी सभ्यता के अवशेष अमरीका ,मध्य पूर्व के देशो तक में मिल जायेंगे। समय -समय पर इनकी खबरें आती  रहती है। 

      ईसाई ,  मुस्लिम  बौद्ध  धर्म हिन्दू धर्म के बहुत बाद में आये थे । लेकिन आज अधिकतर देशो में प्रथम स्थान पर ईसाई धर्म ,दूसरे पर इस्लाम, तीसरे पर हिन्दू धर्म और चौथे स्थान पर बौद्ध  धर्म पहुँच  गया है। आपको जानकर हैरानी होगी ईसाई धर्म को मानने वाले ८० देश ,इस्लाम को मानने वाले 56  देश है। जबकि हिन्दू धर्म वाला कोई देश नहीं है। 
        भारत में से जितने देश बने जैसे अफगानिस्तान ,बांग्लादेश ,पाकिस्तान इन सबने इस्लाम को अपना राष्ट्रीय धर्म मान लिया। इन्होने हिन्दू धर्म के मंदिर,मूर्तिया  तक नष्ट करवा दी।
         अकबर ,जहाँगीर शाहजहाँ ने लोगो को इस्लाम धर्म अपनाने के लिए लालच और कई तरह की सहूलियतें दी। जिसके कारण लोगो ने अपनी मर्जी से इस्लाम धर्म कबूल किया। 
       ओरंगजेब के शासन में जबरदस्ती मुस्लिम धर्म कबूलने के लिए मजबूर किया गया। आप खुद सोचिये इस्लाम धर्म के लोगो ने भारत पर आक्रमण करके इसे गुलाम बनाया था। इसलिए भारतीय आबादी के हिसाब से इस्लामी लोग मुश्किल से १० % दूसरे देशो से आये  थे। भारत में इतने सारे  मुसलमान कैसे हो गए। ये सब भारतीय  है जिन्हे  जोर जबरदस्ती से इस्लाम धर्म कबूलवाया गया ।
      ये 56  इस्लामी देश कटटर एक धर्म को मानने वाले कैसे हो गए। इन देशो में दूसरे धर्म के लोगो को इतनी अधिक यातनाएं दी गई कि उन्होंने अपना धर्म बदल लिया या दूसरे देशो में चले गए। भारत में भी ओरंगजेब के समय ऐसा माहौल बन गया था। जिससे हिन्दू धर्म करहा उठा  था। उस समय हमारे देश के दिग्गजों ने आत्म बलिदान दे कर भारत को मुस्लिम देश बनने से बचाया। इसमें गुरु तेगबहादुर ,गुरु गोबिंदसिंह ,शिवाजी की हिम्म्त को दाद  देनी पड़ेगी। शिवाजी ने जबरदस्ती मुसलमान बनाए गए लोगो को वापिस हिन्दू बनाया। 
       गुरु तेगबहादुर को अनेक यातनाएँ  दी गई। उन्हें जलते तवे  पर बिठाया गया। उनका सिर काट  दिया गया। उनके बेटे गुरु गोबिंदसिंह ने अपने पिता की शहादत देखकर मूक दर्शक बनने की जगह सिखों को जुझारू बनाया। गुरु गोबिंदसिंह ने अपने अंतिम समय तक ओरंगजेब की सेना से टककर ली।
         गुरु गोबिंदसिंह को पकड़ने में असफल रहने पर उनके दो बेटो को  पकड़ कर इस्लाम कबूल करने पर मजबूर किया जा रहा था उनसे कहा गया -इस्लाम कबूल करो नहीं तो तुम्हे जिन्दा दीवार में चुनवा दिया जायेगा। उन दोनों मासूमो ने  दीवार में चुनवाया जाना  कबूल किया लेकिन इस्लाम कबूल नहीं किया। यदि जिंदगी बचाने के लिए वे नौनिहाल धर्म बदल लेते तो बहुत से लोग मुसलमान बन जाते। उन्हें अपने पिता के कार्यो को सही  अंजाम तक पहुंचाने   के लिए अपनी आहुति दे दी। 
      गुरु जी ने अपने पुरे जीवन में धर्म को बचाने के लिए इतनी तकलीफे सही जिससे उनकी हिम्म्त टूटने लगी। क्योंकि साधारण लोग शासन के सामने झुक जाते है। एक नेता ही डटकर शासन के गलत कामो  का विरोध  कर  सकता है लेकिन उन्होंने इतने अधिक अपनों की मौत देखकर धर्म के नाम पर जीवित गुरु परम्परा ही खत्म कर दी। सिख धर्म के पवित्र गन्थ को गुरु की मान्यता दिलवा दी। 
             शिवाजी  के बाद उनके बेटे संबा जी  को  पकड़ कर इस्लाम कबूल करवाने की बहुत कोशिश की गई। उन्हें अँधा कर दिया  गया उनके प्रत्येक अंग को जीते जी काट  दिया गया।उन्हें तड़प -तड़प कर मरने के लिए मजबूर किया लेकिन 31  साल की उम्र में उन्होंने मौत को गले लगा लिया लेकिन इस्लाम धर्म कबूल नहीं किया। ये कुछ उदाहरण है। ऐसी शहादते हजारो लोगो ने दी तभी भारत में हिन्दू धर्म अभी तक जीवित है। 
       आपको मालूम है भारत की आजादी के समय धर्म के आधार पर तीन  देश बने उनमे से पाकिस्तान में 21 %हिन्दू थे। बांग्ला देश में 35 % हिन्दू थे। लेकिन अब पाकिस्तान में केवल 1 %,और बांग्ला देश में 7  % हिन्दू कैसे रह गए जबकि भारत में उस समय केवल 10  % मुस्लिम रह गए थे. ये 18  % कैसे हो गए। किसी धर्म को बढ़ाने का काम उस देश की शासन व्यवस्था करती है।  
       आपको जानकर हैरानी होगी गांधी जी ने मुसलमानो के कत्ल का विरोध किया था। आपको शायद मालूम होगा उनके एक बेटे हरिराम ने मुस्लिम धर्म अपना रखा था। जवाहर लाल नेहरू की बेटी इंदिरागांधी ने जिससे विवाह किया था उसका नाम फिरोज खान था। नेहरू इस शादी के लिए तैयार नहीं हो रहे थे। बेटी की जिद और अपने राजनीतिक भविष्य को बचाने के लिए.,गांधी जी  की सलाह पर फिरोज को उपनाम गांधी दिलवा कर उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य को बचाया। शीलादीक्षित की बेटी ,सुबह्मण्यम स्वामी की बेटी ,सिकंदर वक्त, 


मुख्तार नकवी ,शाहनवाज हुसैन,लाल कृष्ण  अडवाणी की भतीजी ,हमारे उपराष्ट्रपति  हिदायतुल्ला 
सब हिन्दू मुस्लिम रिश्तों में जुड़े हुए है। जब खून के रिश्ते आपस में इस तरह से जुड़े हो तब अपनों के साथ नाइंसाफी कैसे कबूल की जा सकती है।
     हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी को जामिया मिल्लिया इस्लामिया के उतसव  में बुलाए जाने पर मुसलमानो ने जमकर विरोध किया। जामा  मस्जिद के बुखारी के बेटे की दस्तारबंदी में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को बुलावा भेजा गया लेकिन भारत के प्रधानमंत्री को निमंत्रण नहीं दिया गया। उसके बाबजूद भारत को असहिष्णु कहा गया है। किसी अन्य मुस्लिम देश में  ऐसा हो सकता है।  
    सम्राट अशोक के समय में बौद्ध धर्म का बहुत  प्रसार हुआ। उन्होंने इसे विदेशो तक में फैलाया। जो आपको आज भी दिखाई  देता है। लेकिन भारत में बोद्ध मठ या अनुयायी दिखाई नहीं देते जितने अन्य देशो में दिखाई देते है।
       इसका कारण सम्राट अशोक के पोते सम्प्रति और पुष्यमित्र राजा हुए है। उनके काल  में हर और बौद्ध  थे हिन्दू धर्म का विनाश हो गया था। उन्होंने बोध मठो को तुड़वा दिया। उसमे रहने वाले बोद्धो को मरवा दिया। पुष्यमित्र ने तो ऐलान करवा दिया था जो किसी बोद्ध साधु का कटा  हुआ सिर  लाएगा उसे इनाम दिया जायेगा।  उनके डर  से लोगो ने अपना धर्म बदलने में ही भलमनसाहत समझी।
       बहुत समय तक भारत में बोद्ध  धर्म को मानने  वाले न के बराबर थे। भीमराव अम्बेडकर के बोद्ध  धर्म को अपनाने के बाद फिर से बोद्ध  अनुयायी और  बौद्ध  विहार दिखाई देने लगे है। 
       इसलिए कहा जाता है शासन व्यवस्था के उदार  होने पर कोई भी धर्म फलता -फूलता है। वरना उसके विनाश देर  नहीं लगती। 
         

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