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          शादी के बाद का अकेलापन 2 

   पुरुष शादी के बाद यदि पत्नी का साथ न मिले तब वे मानसिक और शारीरिक रूप से बहुत परेशान हो जाते है।  उनका किसी काम में मन नहीं लग रहा होता है। जो मर्द शादी से पहले  उसकी एक झलक देखकर ख़ुशी महसूस करते है। अब अपने साथी के साथ आराम से  रहना चाहते है। वे शादी के बाद उसके आभाव को बर्दास्त नहीं कर पाते  है। ये अधिकतर देखा गया है। उनकी हर चीज में बदलाव आ जाता है। 

          वे हर समय पत्नी के बारे में सोचते रहते है। उसकी कल्पना दिन -रात  करते रहते है। उनके लिए इसके बिना रहना मुश्किल लग रहा होता है। उनसे लड़कियों की तरह आत्मनियंत्रण की उम्मीद करना बेकार होता है। जो चीज वो पा चुके होते है। उसका आभाव  उन्हें हर समय खलता रहता है। 

         वे ऐसे समय मानसिक रूप से बीमार पड़  जाये तो बड़ी बात नहीं है। उनका गलत रस्ते पर  चले जाना  मुमकिन है। लेकिन हमारी समाजिक व्यवस्था ऐसी बन गयी है। कि  कोई उनके मनोभावों को समझ नहीं पाता  है। उनसे उनकी प्राकृतिक आवश्यकताओ  से परे व्यवहार करने के बारे में सोचता है। जबकि पत्नी का आभाव उन्हें आम इंसान बनने नहीं दे रहा होता है। 

      यदि ऐसे समय वह आदमी सूंदर और ऊँची नौकरी करता हो ,तब उसके आस-पास मंडराने  वाली अनेक लड़कियां आ जाती है।  एक तरफ पत्नी का आभाव और दूसरी तरफ झोली में आ गिरने वाली लड़कियों के सामने  कैसे वह इंसान अपने ऊपर नियंत्रण रख सकता है। उसका अपने पर से नियंत्रण हटते देर नहीं लगती है।

         हमे उसके स्तर पर जाकर भी सोचना चाहिए। जिन्हे शादी होते ही नौकरी के कारण सूंदर -सलोनी पत्नी को छोड़कर दूसरे शहर जाना पड़ता है। 

          जिनका पेट भरा होता है उससे चरित्र की उम्मीद करना सही है। लेकिन भूखे इंसान से अच्छे चरित्र की उम्मीद करने का मतलब है प्रकृति के कानून का मजाक उड़ाना। जो संभव नहीं हो पाता है। 

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