अप्सरा उर्वशी का धरती से लगाव
आपने पहले भी सुना होगा। धरती पर रहने वाले किसी तपस्वी की कठोर तपस्या के कारण जब देवताओ के राजा इन्द्र का सिहांसन हिलने लगता था तब इंद्र उस तपस्वी की तपस्या भंग करने के लिए किसी अप्सरा को भेजते थे। अधिकतर सभी अप्सराये अपने कार्य को पूर्ण करने में सफल होती थी। उनको असफल होते नहीं देखा गया।
ऐसे ही एक तपस्वी पुरु की तपस्या भंग करने के लिए इन्द्रराज ने उर्वशी को भेजा। लेकिन उर्वशी अपने कार्य में सफल रही, पर वापिस स्वर्गलोक नहीं पहुंची। बहुत दिन तक जब उर्वशी वापिस स्वर्ग नहीं पहुंची तब इंद्र को हैरानी हुई क्योंकि इतने अधिक दिन तक कोई अप्सरा कभी धरती पर नहीं रही थी। सब अपना कार्य पूरा होते ही स्वर्ग वापिस आ जाती थी।
तब इंद्र धरती पर उर्वशी के वापिस न आने का कारण जानने आये। उन्होंने देखा उर्वशी धरती पर राजा पुरु के साथ बहुत खुश है। उन्हें बहुत हैरानी हुई। उन्होंने उससे वापिस स्वर्ग चलने के लिए कहा। तब उर्वशी ने स्वर्ग जाने से साफ मना कर दिया। इंद्र हैरान रह गए । अब तक सभी को स्वर्ग पाने के लिए तपस्या करते देखा था। यह पहली अप्सरा है जिसने स्वर्ग जाने से साफ मना कर दिया।
पहली बार जब मैंने सुना था तब मेरे लिए भी यकीन करना मुश्किल हो गया था।
उर्वशी ने इंद्र से कहा -स्वर्ग में हमारे पास शरीर नहीं होता है। लेकिन जब धरती पर आते है तब शरीर के साथ हर तरह के अनुभव होते है। स्वर्ग में शरीर न होने के कारण हम खाना खा नहीं सकते बल्कि हम खाना खा रहे है महसूस करते है। कपड़े भी केवल महसूस करते है। सारे सुखो की कल्पना करके उन्हें महसूस करके खुश होते है। जबकि धरती पर शरीर के साथ होने पर हर चीज का अनुभव करते है। इसलिए मुझे स्वर्ग नहीं जाना।
इसके बाद मैंने खुद महसूस किया, बुरे से बुरे हालात के अंदर भी हम खुश रह सकते है। जबकि किसी की महंगी चीज को पाकर भी ख़ुशी महसूस नहीं होती है। तब से मैंने दूसरो में ख़ुशी तलाशना बंद कर दिया।
उस समय पहली बार अहसास हुआ सुख मन का होता है। आप एक छोटे बच्चे के सामने घर का फालतू सामान डाल दो वह उसमे लगा रहता है। उसे कीमती चीजों से कोई मतलब नहीं होता।उसके सामने कितना भी कीमती सामान रख दो वह उससे जल्दी ऊब जाता है। वैसे ही अमीर लोग जिस चीज से ऊब चुके होते है। गरीब उनकी कल्पना मात्र से ही खुश हो रहे होते है।
इंसान के लिए सुख और दुःख मन के होते है। मैंने राजाओ के घर में भी दुखी लोग देखे है। जबकि गरीबो के घर में खुशियों से भरे लोग देखे है।
संसार में सुखी लोगो की सूची में भारतीयों से ऊपर बांग्लादेश और पाकिस्तान के लोगो को देखा है जबकि उनके पास भारतीयों से कम सुख के संसाधन होते है भारतीय लोग इसी कारण बहुत ज्यादा आत्महत्या करते है क्योकि वे अपने जीवन में ख़ुशी महसूस नहीं कर पाते है । हर इंसान वह चाह रहा होता है जो दूसरो के पास है उसके पास नहीं है। अपनी चीजों का महत्व किसी को समझ नहीं आ रहा होता है। उसके जीवन से चले जाने के बाद ही उसके लिए दुखी हो रहा होता है
इसी चीज को देखते हुए दिल्ली के विद्यालयों में हैप्पीनेस की कक्षाये शुरू की गई है। क्योंकि लोग सुख अपने अंदर ढूंढने की जगह लोगो में तलाश कर रहे है। जो किसी को नहीं मिल पा रही है।
bahut badiya mam
जवाब देंहटाएं