बदलते समीकरण
महाशक्ति का पतन किस तरह हो सकता है। ये आज दिखाई दे रहा है। भारत एक ट्रिलियन डालर से पांच ट्रिलियन डॉलर के सपने देख रहा है। पता नहीं ये सपना भारत का पूरा हो सकेगा या नहीं ? जबकि अमरीका इस समय 22 ट्रिलियन डॉलर के साथ महाशक्ति बना हुआ है।आजकल के हालत सोचने पर मजबूर कर रहे है। इस महाशक्ति के कमजोर होने का वक्त आ गया है। या फिर से संसार की महाशक्ति के रूप में उठ खड़ा हो जायेगा। अपनी ताकत के घमंड में अमरीका ने कितने देशो को बर्बाद कर दिया, इसका उदाहरण आप कुछ बरस पीछे जाकर देख सकते है।
पहले करोना के कहर ने उसे घुटनो पर ला दिया था। अब अश्वेत की मौत के कारण उपजा दंगा कब शांत हो पायेगा समझ नहीं आ रहा। भारत में दंगे इतने दिनों तक फैलते नहीं देखे थे। जितने दिन भी दंगे होते थे ,उसके लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया जाता था।
इस महाशक्ति के पास सैन्यबल भी है। लेकिन हो सकता है वहां की नेतृत्ब क्षमता के पास इससे निबटने का मनोबल नहीं है। अब यह दंगा गृह युद्ध का रूप लेता जा रहा है।
कई बार लगता है। चीन जैसे विरोधी गुट के कारण इन दंगो को भड़काया जा रहा है। जिससे अमरीका की महाशक्ति खत्म करके, चीन महाशक्ति के रूप में उठ खड़ा हो। क्योंकि चीन को इस समय रोकने की क्षमता केवल महाशक्तियों (अमरीका,इंग्लैंड ,इटली ) में है। अमरीका के आलावा यूरोप के अधिकतर देश सुलग उठे है। आने वाले समय में हो सकता है शक्ति का झुकाव एशिया की तरफ हो जाये।
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