#THOUSAND PEOPLE GUILTY

                         हजार लोगो का गुनहगार 

जो देश कभी भारत का अभिन्न हिस्सा था अब वही दुश्मन की तरह व्यवहार कर रहा है। भारत में 250  लोगो की मौत और 700  लोगो को घायल करने के गुनहगार को
अपने देश में पनाह देकर किसके साथ वफ़ा कर रहा है। उसके नेताओ को सोचना चाहिए। जो इंसान इंसानियत से गिर जाये वह किसी के साथ किस तरह वफ़ा कर सकता है। उसे केवल आतंकवादी ही कहा जा सकता है।
       पाकिस्तान भारत में आतंकवाद फैलाने की चाह में अपने दोनों हाथ जलाने को आमादा है। जितने भारत में आतंकवादी हमले करवा पाता है। उतने ही आतंकवादी हमलो का सामना उसे खुद भी सहन करने पड़  रहे है। पाकिस्तानी सेना ने आतंकवाद को पनाह देते समय कभी सोचा नहीं होगा  कि एक दिन ये उसके लिए भस्मासुर बन जायेगे।
         हम अपने पडोसी देश को दाऊद को पकड़ कर उसकी सम्पत्ति सील करने की सलाह देकर असफल रहे। पाकिस्तान ने दाऊद के अपने देश में होने से ही मना कर दिया जबकि उसके पाकिस्तान के आने -जाने की खबर भी वहाँ के आकाओ तक पहुंचाई लेकिन उन्होंने सभी सबूतों को मानने से इंकार कर दिया।
        पाकिस्तान के अलावा सऊदी अरब  ने पिछले साल दाऊद की 15000 करोड़  की सम्पत्ति जब्त की। इस साल ब्रिटेन ने दाऊद की हजारो करोड़ की सम्पत्ति जब्त की। अब ऐसे गुनहगारों को सोचना पड़ेगा उन्हें गुनाह करने के बाद जो हासिल हुआ वह कब तक उनका रहेगा।  
       भारत में वह घुस नहीं सकता। किसी देश में पहुंचकर अपना परिचय देने के बारे में सोच नहीं सकता। यहाँ तक सुनने में आ रहा है उसने अपने आप को पूरी तरह से बदल डाला है। केवल पाकिस्तान ही उसे छुपने में मदद कर रहा  है। वरना वह पहले ही सलाखों के पीछे पहुंच चुका होता।
        पाकिस्तान में दाऊद अभी भी उत्सवों में अक्सर दिखाई देता है। जावेद मिया दाद उसके सम्बन्धी है। भारत के सवाल उठाये जाने के बाद  वह उस कार्यक्रम में नहीं आया वरना जब नई  रिस्तेदारी जुड़ती है तो मुख्य सम्बन्धी को बुलाया जाना जरूरी होता है। जावेद मिया दाद पाकिस्तानी प्रसिद्ध क्रिकेटर है। जब वे उसके समधी बन सकते है। तो दाऊद के रुतवे की कल्पना की जा सकती है।
       पाकिस्तान को सलाह देनी बेकार साबित हुई। अब मोदी जी और डोभाल जी ने दूसरे देशो को सबूत देने के  कदम से उसे चारो और से जकड़ने की कोशिश सफल होती दिखाई दे रही है। पाकिस्तान के हबीब बैंक को अमरीका ने बंद करवा दिया है क्योकि अमरीकी सरकार के समझाने के बाबजूद उसने आतंकवादियों की मदद करना बंद नहीं किया। सारी दुनिया मुस्लिम आतंकवादियों से त्रस्त है सभी देश मुस्लिम आबादी से डरने लगे है।
      पाकिस्तानी लोग दूसरे देशो में जाकर  खुद को पाकिस्तानी कहने की जगह भारतीय  या दक्षिण एशिया का कहलाने लगे है। उन्हें अपने साथ पाकिस्तानी जोड़ने में शर्मिंदगी महसूस होने लगी है। सभी पाकिस्तान को आतंकवादी देश समझने लगे है।
        ऐसी तबाही मचाने की अपेक्षा यदि अपने देश की प्रगति के बारे में सोचा होता तो उस देश की उन्नति हो रही होती। उसे दूसरे देशो से मदद के लिए ताकना नहीं पड़ता बल्कि दूसरे देशो की मदद कर रहा होता। अभी समय रहते यदि पाकिस्तान चेत जाये तो उसे संसार में सम्मानित जगह तक पहुंचने में समय नहीं लगेगा।
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