#DUE TO THE PRINCIPLE OF APPEASEMENT OF LEADERS


           नेताओ के तुष्टिकरण के कारण सिसकता  हिन्दू 

  नेताओ की तुष्टिकरण की राजनीति  के कारण हिन्दू समाज का ह्रास हुआ  है। जो खबरे कभी जनता के सामने आने नहीं दी जाती थी अब हमारे समाने आने लगी है।
        उप्र  में एक हिन्दू लड़की को डरा  कर चार मुस्लिम  लड़के अगवा करके ले गए। उस लड़की की खोजखबर लेने के बारे में सोचा नहीं गया। उसके अभिभावक पुलिस थाने  में दरयाफ्त करते रहे। लेकिन किसी ने उस मसले पर कार्यवाही करने की जरूरत नहीं समझी।  उस लड़की को दो हफ्ते बाद उन लड़को ने  उसके गांव के बाहर छोड़  दिया।
       छूटने के दो दिन बाद वह   लड़की  थाने  में  रिपोर्ट दर्ज करवाने गयी तो

  1.  इंस्पेक्टर ने मुस्लिम लड़को का नाम लिखवाने से मना  कर दिया।
  2.  उसके बाद लड़की से"  उन लड़को के द्वारा जबरदस्ती मांस  खिलाये जाने के बारे में लिखवाने से " मना किया गया।
  3.  वे लड़के उसे धर्म बदलने पर जोर डालते रहे। इन सब बातो को उस लड़की से लिखने के बारे में सब मना करते रहे। 
  4. उसे केवल गैंग रैप होने की FIR  दर्ज करवाने पर जोर डाल  रहे थे। 
        यदि ये सब किसी मुस्लिम लड़की के साथ हिन्दू लड़को ने किया होता तो हमारे सारे नेता उस लड़की का हाल  पूछने पहुंच जाते। लेकिन ये लड़की हिन्दू धर्म की थी इसलिए कोई भी उसका नुमाइंदा बन कर सामने नहीं आया।
       पुलिस ऑफिसर ने गलती से ट्वीट करके कह  दिया -"उस लड़की को मांस  नहीं खिलाया गया। "
       इस ट्वीट के कारण समाज में इस लड़की का राज खुला। वरना सभी ने इस घटना को दबाने में पूरी ताकत लगा दी थी वोटो की राजनीति  के कारण लोगो के अंदर हमदर्दी खत्म हो गयी है। सभी दलों ने मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति को पनपाने में अपनी सारी ताकत झोंक दी है।
       ये घटना उप्र के मुज्जफरनगर की है। कुछ समय पहले मुज्जफरनगर में हिन्दू मुस्लिम दंगे भड़क गए थे। "उस समय हिन्दू लड़की को छेड़ने के चलते हिन्दुओ ने मुस्लिम लड़को को पीट  दिया था। "
       जिसके खिलाफ मुस्लिम नेता आजमखान ने अखिलेश  सरकार को आदेश दिया सारे मुस्लिमो को जेल से आजाद करके हिन्दुओ को जेल में डाल  दो। उस समय अखिलेश सरकार उनके दबाब में आकर उनके अनुसार आदेश देने लगी
       कैराना ,सुंदर नगरी ,असम ,केरल में हिन्दुओ के साथ होने वाली खबरे कभी सामने नहीं आती। लेकिन किसी मुस्लिम की गलती या आपसी झगडे  में मोत हो जाती है तो सारी  सियासत गर्माने लगती है। सारा संचार माध्य्म जागरूक हो जाता है। कई हफ्ते तक हर तरफ इससे सम्बन्धित खबरे आती  रहती है।
     ममता बनर्जी ने विजयदशमी को मूर्तिविसर्जन एक दिन बाद करने की आज्ञा दी है। क्योंकि विजयदशमी का त्यौहार ख़ुशी का त्यौहार होने के कारण हर्षोल्हास के साथ मनाया जायेगा जबकि उसी दिन मुस्लिमो का दुःख भरा त्योहार मुहर्रम है। उनके अनुसार दोनों धर्मो के विवाद को रोकने का यही तरीका है।
          कुछ समय पहले एक मुस्लिम अध्यापिका तीन हिन्दू लड़को को जबरदस्ती नमाज अदा  करवा रही थी। इस विडिओ के वायरल होने के कारण उनपर कार्यवाही की गयी।
       धर्मनिरपेक्षता का राग अलापते हुए 7 % मुस्लिम कैसे 18 % हो गए। ये मुझे अब समझ में आ  रहा है। अब तक मुझे लगता था मुस्लिम आबादी के बढ़ने का कारण उनके बहुत अधिक बच्चो का होना है। लेकिन बहुत अधिक संख्या में बच्चे होने से इतनी अधिक आबादी नहीं बढ़ सकती।
      वे अपनी पूरी ताकत हिन्दू आबादी को मुस्लिम बनाने में लगी हुई है।मुझे लगता हे  7  % आबादी तो केवल हिन्दुओ को मुस्लिम बना कर बढ़ाई है। यदि कोई मुस्लिम अपनी इच्छा से भी हिन्दू धर्म स्वीकारता है तो हाहाकार मच जाता है लेकिन जब कई सौ हिन्दू मुसलमान बनते है तो उनकी कही खबर नहीं छपती। 
      कश्मीर में जिन हिन्दुओ ने मुस्लिम धर्म स्वीकार कर लिया वे रह सकते है। बाकि हिन्दुओ को निकाल  दिया। वही हालत असम, पश्चिम बंगाल,  केरल ,आंध्र प्रदेश की होती जा रही है। 10 % से कम आबादी अल्पसंख्यक में आती  है। लेकिन 18 % आबादी को भी अल्पसंख्यक की सहूलियतें किस लिए दी जा रही है।
          जिन राज्यों में हिन्दू अल्प संख्यक हो रहे है। उनकी खोज -खबर क्यों नहीं ली जा रही है। सबसे प्राचीन धर्म का सभी देशो से खात्मा हो गया है। हिन्दुओ के लिए कोई एक देश नहीं बचा। बाद में आया मुस्लिम धर्म 58  देशो का राज धर्म कैसे बन गया। सोचने का विषय है।
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#ROHINGYAS MUSLMAN"S SCARED OF JOINING TERRORISM

         रोहिंग्या मुसलमानो के आतंकवाद से जुड़ने से डरा संसार 

     भारत में रहने वाले मुसलमान अक्सर व्यान देते है। कि उन्हें भारत में असुरक्षा का अहसास होता है। उन्हें किसी और सुरक्षित देश में जाने के लिए कहो तो लड़ने के लिए तैयार हो जाते है। भारतीय झंडा जलाने , भारत को गाली देने ,राष्ट्रीय गान न गाने को सम्मान समझते हे। अपने कार्यक्रमों में भारतीय प्रधानमंत्री को बुलाने की जरूरत नहीं महसूस होती बल्कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को बुलावा भेजा जाता है। जिन जगहों पर मुस्लिम आबादी रहती है उन जगहों पर पुलिस जाते हुए डरती है। ऐसे वाकया अधिकतर सुनाई देते रहते है।कश्मीर और जयपुर के उदाहरण आपके सामने है। जिन जगहों पर मुसलमान आबादी रहती है वहाँ ये सरकारी नियम कायदो को मानने की अपेक्षा समानांतर सरकार चलाने  लगे है ,
      ऐसी गतिविधियों से परेशान होकर म्यांमार सरकार को सैनिक कार्यवाही करके रोहिंग्या मुसलमानो को अपने देश से खदेड़ना पड़ा।
      भारतीय मुसलमान भारतीय एकता को खंडित करने पर तुले हुए है। उनकी बयानबाजी भरतीय हिन्दुओ को तोड़ देती है। इस्लामिक  58 देशो में जाने की जगह ये मुसलमान संकीर्ण भारत में क्यों आना चाहते है।   ऐसे असुरक्षित देश में वे रोहिंग्या मुसलमानो को बसाने की पैरवी ये भारतीय मुसलमान क्यों  कर रहे है।
     जिन रोहिंग्या को म्यांमार से उनकी आतंकवादी गतिविधियों के कारण सैनिको की कार्यवाही करके निकाला जा रहा है। जिन्होंने अपनी आतंकवादी गतिविधियों के द्वारा म्यांमार की सरकार के नाक में दम कर दिया था। वहाँ की दस प्रतिशत मुस्लिम आबादी का सामना करने के लिए पुलिस नाकाम रही पुलिस को मौत के घाट उतारना शुरू कर दिया।  उन रोहिंग्यों पर नियंत्रण करने के लिए सेनिको को पुरे लाव -लश्कर के साथ उतरना पड़ा। आप सोच कर देखिये शांति -पसंद बोद्धो को अशांति फैलाने वालो का सामना करने के लिए सैनिक कार्यवाही करने का आदेश देना  कितना  मुश्किल रहा  होगा।
     उन्हें संसार का कोई देश शरणार्थी के रूप में रखना नहीं चाहता जो देश खुद को इस्लामिक देश करार दे चुके है जैसे मलेशिया ,इंडोनेशिया, थाईलैंड, रूस , चीन   ,पाकिस्तान और अफ्रीका  इन्हे पनाह नहीं देना चाहते लेकिन भारत पर दबाब डाल रहे है इन्हे अपने देश में बसाओ। सारा संसार मुस्लिम आतंकवाद से त्रस्त है। मुसलमान के बारे में जानते ही सभी की जान सांसत में पड़ जाती है। कही ये आतंकवादी न हो। मुस्लिमो के प्रति ऐसी नफरत की लहर फैल चुकी है।
       जिन देशो में मुस्लिम रहते है वे भी आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त मिलने लगे है। ऐसे में रोहिंग्यों को अपने देश में  बसाने के बारे में सोचते हुए डर लगता है। मुस्लिम लोगो के अंदर देशभक्ति की भावना दिखाई नहीं देती ये जिस देश में रहते है वहाँ के निवासियों को परेशान करने में इन्हे ख़ुशी मिलती है। इनके अंदर सिर्फ धर्म के लिए क़ुरबानी देना सब कुछ है। अपनी कटटरता के लिए दुसरो की क़ुरबानी देने से इन्हे परहेज नहीं है।
     मानवीयता के नाते भारत में पहले ही 40000 लोगो को पनाह दी जा चुकी है। म्यांमार से भगाये गए दस लाख लोगो को सभी देश भारत में बसाने की पैरवी कर रहे है। भारत पहले ही जनसंख्या की विस्फोटक स्थिति में पहुंच चूका है। अपने देश की आबादी को बुनियादी सहूलियतें देने में भारतीय सरकारी तंत्र चरमरा रहा है। ऐसे में इन आतंकवादियों को बसा कर भारतीय अर्थव्यवस्था कराह उठेगी।
      मुस्लिम   भारतीय इन्हे भारत में बसाने का ठेका ले रहे है। इनकी बस्तिया जम्मू,  हरियाणा, दक्षिण भारत ,ओडिशा, पश्चिम बंगाल और पर्वोत्तर राज्यों  में मिल जाएगी  .इन्हे अवैध रूप से भारत में बसाने का लोगो ने ठेका लेना शुरू कर दिया है। इन्हे भारतीय राशन कार्ड ,वोटर कार्ड ओट आधारकार्ड तक मुहैया करवाया जा रहा है।
        ने के बारे में भारतीय सरकार पर दबाब बनाना चाहते है। भारतीय हिन्दुओ को अपने राज्य से खदेड़ने में जिन  मुसलमानो के लिए शान की बात है। उनके अंदर केवल मुसलमानो के प्रति सहानुभूति पनपती है। ये कैसी मानवीयता है। जो केवल मुसलमानो के प्रति पैदा होती है।
       जब तक कांग्रेस सरकार रही उन्होंने मुसलमानो के प्रति  वफ़ादारी निभाने में सारी ताकत लगा दी। इसी कारण मुस्लिम आबादी 7%से 18 % हो गयी। यदि रोहिंग्या आबादी को बसने की इजाजत दे दी गयी तो भारतीय हिन्दू अल्पसंख्यक बन जायेंगे। जिस कश्मीर में भारतीय रह नहीं सकते। जहाँ  से साढ़े चार लाख हिन्दुओ को भगा दिया गया जिनकी पैरवी करने के लिए या जिन्हे कश्मीर में बसाने के बारे में  कोई मुसलमान सामने नहीं आता।  वे किस मुँह से इन रोहिंग्या आतंकवादियों को भारत में बसा
       भारतीयता की उम्मीद मुसलमानो से करना बेकार है। ये केवल कटटर मुसलमान होते है। इनमे देशभक्ति की भावना नहीं होती। ये जिस देश में रहते है। उस देश की आबादी को खत्म करके केवल इस्लामिक देश बनाने में अपनी पूरी ताकत लगा देते है। जिन देशो में मुसलमान रहते है। उनमे किसी और धर्म के लोगो को पनपने का स्थान नहीं मिलता।उन पर इतना अधिक   जुल्म किया जाता है।  दूसरे धर्म के लोगो को देश छोड़ना पड़ता है या मुस्लिम धर्म अपनाना पड़ता है।
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#THOUSAND PEOPLE GUILTY

                         हजार लोगो का गुनहगार 

जो देश कभी भारत का अभिन्न हिस्सा था अब वही दुश्मन की तरह व्यवहार कर रहा है। भारत में 250  लोगो की मौत और 700  लोगो को घायल करने के गुनहगार को
अपने देश में पनाह देकर किसके साथ वफ़ा कर रहा है। उसके नेताओ को सोचना चाहिए। जो इंसान इंसानियत से गिर जाये वह किसी के साथ किस तरह वफ़ा कर सकता है। उसे केवल आतंकवादी ही कहा जा सकता है।
       पाकिस्तान भारत में आतंकवाद फैलाने की चाह में अपने दोनों हाथ जलाने को आमादा है। जितने भारत में आतंकवादी हमले करवा पाता है। उतने ही आतंकवादी हमलो का सामना उसे खुद भी सहन करने पड़  रहे है। पाकिस्तानी सेना ने आतंकवाद को पनाह देते समय कभी सोचा नहीं होगा  कि एक दिन ये उसके लिए भस्मासुर बन जायेगे।
         हम अपने पडोसी देश को दाऊद को पकड़ कर उसकी सम्पत्ति सील करने की सलाह देकर असफल रहे। पाकिस्तान ने दाऊद के अपने देश में होने से ही मना कर दिया जबकि उसके पाकिस्तान के आने -जाने की खबर भी वहाँ के आकाओ तक पहुंचाई लेकिन उन्होंने सभी सबूतों को मानने से इंकार कर दिया।
        पाकिस्तान के अलावा सऊदी अरब  ने पिछले साल दाऊद की 15000 करोड़  की सम्पत्ति जब्त की। इस साल ब्रिटेन ने दाऊद की हजारो करोड़ की सम्पत्ति जब्त की। अब ऐसे गुनहगारों को सोचना पड़ेगा उन्हें गुनाह करने के बाद जो हासिल हुआ वह कब तक उनका रहेगा।  
       भारत में वह घुस नहीं सकता। किसी देश में पहुंचकर अपना परिचय देने के बारे में सोच नहीं सकता। यहाँ तक सुनने में आ रहा है उसने अपने आप को पूरी तरह से बदल डाला है। केवल पाकिस्तान ही उसे छुपने में मदद कर रहा  है। वरना वह पहले ही सलाखों के पीछे पहुंच चुका होता।
        पाकिस्तान में दाऊद अभी भी उत्सवों में अक्सर दिखाई देता है। जावेद मिया दाद उसके सम्बन्धी है। भारत के सवाल उठाये जाने के बाद  वह उस कार्यक्रम में नहीं आया वरना जब नई  रिस्तेदारी जुड़ती है तो मुख्य सम्बन्धी को बुलाया जाना जरूरी होता है। जावेद मिया दाद पाकिस्तानी प्रसिद्ध क्रिकेटर है। जब वे उसके समधी बन सकते है। तो दाऊद के रुतवे की कल्पना की जा सकती है।
       पाकिस्तान को सलाह देनी बेकार साबित हुई। अब मोदी जी और डोभाल जी ने दूसरे देशो को सबूत देने के  कदम से उसे चारो और से जकड़ने की कोशिश सफल होती दिखाई दे रही है। पाकिस्तान के हबीब बैंक को अमरीका ने बंद करवा दिया है क्योकि अमरीकी सरकार के समझाने के बाबजूद उसने आतंकवादियों की मदद करना बंद नहीं किया। सारी दुनिया मुस्लिम आतंकवादियों से त्रस्त है सभी देश मुस्लिम आबादी से डरने लगे है।
      पाकिस्तानी लोग दूसरे देशो में जाकर  खुद को पाकिस्तानी कहने की जगह भारतीय  या दक्षिण एशिया का कहलाने लगे है। उन्हें अपने साथ पाकिस्तानी जोड़ने में शर्मिंदगी महसूस होने लगी है। सभी पाकिस्तान को आतंकवादी देश समझने लगे है।
        ऐसी तबाही मचाने की अपेक्षा यदि अपने देश की प्रगति के बारे में सोचा होता तो उस देश की उन्नति हो रही होती। उसे दूसरे देशो से मदद के लिए ताकना नहीं पड़ता बल्कि दूसरे देशो की मदद कर रहा होता। अभी समय रहते यदि पाकिस्तान चेत जाये तो उसे संसार में सम्मानित जगह तक पहुंचने में समय नहीं लगेगा।
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#DUE TO HUMAN NEGLIGENCE MANY BIGGER DEATH

                 मौत का पहाड़ या कूड़े का ढेर 

  पहले समय में भारत में कूड़े की समस्या इतने  भयंकर रूप में नहीं थी।  भारत में  जीरो गार्बेज होता था। इसका मतलब है जितना कूड़ा निकलता था उसका निस्तारण खुद ही कर लिया जाता था। पहले जीरो गार्बेज का विचार केवल भारत तक सीमित था।लोग अपने आस -पास के वातावरण को खुद साफ करते थे। सरकार की तरफ से ज्यादातर कदम नहीं उठाये जाते थे।
       लेकिन पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव के कारण भारतीयों ने दिखावे की संस्कृति को महत्व देना शुरू कर दिया जिसके कारण पहले जितना दस परिवारों से कूड़ा निकलता था। आज उतना कूड़ा एक परिवार से निकलता है।
      भारतीय संस्कृति कृषि प्रधान रही है। इंसान के लिये जितनी खाने की आवश्यकता थी वह खेती से प्राप्त कर लेता था। खेती के कारण उसे पशु पालने के लिए कुछ खास उपाय नहीं करना पड़ता था । कृषि और घर की रसोई में से बचने वाले खाद्य पदार्थ पशुओ के काम आ जाते थे।
       बड़े और खुले घर होने के कारण पशुओ के लिए अलग से प्रबंध नहीं करना पड़ता था। आधुनिक सभ्यता और छोटे घर के कारण गाय -भैस,बकरी और मुर्गे -मुर्गिया  जैसे दुधारू पशु किसी घर में दिखाई नहीं देते। लोग उन्हें गंदगी का घर समझने लगे है। इतनी प्रचंड कूड़े की समस्या इसी कारण पैदा हुई।
       पहले  हरियाली चारो तरफ बिखरी रहती थी।  घरेलू गंदगी को खाद के रूप में बदल कर पेड़ -पौधे की जरूरत बन जाती थी।
         कही भी नालियों का जाल नहीं बिछा था।पानी का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार होने के कारण अधिकतर गन्दा पानी जमीन सोख लेती थी  आबादी कम होने के कारण नदियाँ ज्यादा दिखाई देती थी गन्दा नाला नहीं दिखाई देता था।बिना गंदे पानी का शोधन किये नदियों में पानी डालने के कारण नदिया गंदे नाले जैसी दिखाई देती है।    अब तो नदियों में गंदे नाले का पानी डालने के कारण पानी इस कदर गन्दा हो गया है कि  कोई नदियों के पानी से हाथ धोने से भी झिझकता है।
      पहले प्लास्टिक का समान नहीं होता था जिसके कारण सारा कूड़ा जैविक खाद में बदलते देर नहीं लगती थी। अब हरा कचरा भले ही काफी समय बाद  मिटटी में बदल जाये लेकिन उसमे से झांकती हुई पन्नियाँ और प्लास्टिक के टुकड़े मन में घृणा पैदा करते है।
        हर चीज का अधिकता से प्रयोग भी कूड़े का अम्बार खड़ा कर रहा है। इंसान जितना अमीर होता जाता है वह उतना ही" प्रयोग करो और फेंको" में विश्वास करने लगा है।
       दिल्ली की आबादी के कारण लैंडफिल sight कम पड़ गयी है। पुरानी जगह भर गयी है। नयी जगह मिल नहीं रही जहाँ दिल्ली का कूड़ा फेंका जा सके। इसी के कारण गाजीपुर जैसी दुर्घटना हुई है। जिसमे अनेक लोगो को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है।
        ये दुर्घटना दोपहर के समय हुई यदि यह सुबह या शाम होती तो जान और माल की बहुत हानि होती क्योंकि उसके पास के रस्ते से बहुत ज्यादा लोग निकल रहे होते  . कूड़े का अम्बार  पानी में गिरने के कारण बाढ़ जैसे हालत पास के इलाके में हो गए थे. वहाँ रहने वालो ने इस कदर कूड़े का पहाड़ दरक कर सड़क और नदी में गिरकर तबाही का कारण बन सकता है कभी सोचा भी नहीं होगा।
    अब ये समस्या केवल सरकार के भरोसे छोड़ने से काम नहीं चलेगा। अब इस समस्या से बचने के लिए हमें खुद आगे बढ़कर इसका हल ढूढ़ना होगा। क्योंकि अब हमने कूड़े के कारण जमीन ,वायु, जल   सभी को प्रदूषित कर दिया है  जलता हुआ घर दुसरो का तो देखा जा सकता है लेकिन उसकी आग अब हमारे घर  तक पहुंचने लगी है। अब हमे भी इस समस्या का निवारण करने के लिए मुस्तैद होना पड़ेगा।

  1.         इस समस्या से निजाद पाने के लिए दक्षिण भारत के कुन्नूर जिले के लोगो ने प्लास्टिक की अधिकतर चीजों का निषेध कर दिया है।
  2.  घर से थैले या बर्तन लेकर समान लाते  है।
  3.  यहाँ तक कि  बॉल पेन की जगह स्याही वाले पेन का प्रयोग करने लगे है।
  4.  सामने की अच्छी पेकिंग के स्थान पर बिना पेकिंग के समान को अधिक महत्व देने लगे है क्योंकि हम जरूरी समान का प्रयोग करते है पेकिंग तो फालतू होने के कारण सबसे पहले कूड़े दान की शोभा बढ़ाती है। 
  5. जरूरत के मुताबिक कागज का इस्तेमाल कीजिये उसे बर्बाद मत करो क्योंकि कागज बनाने के लिए बहुत सारे पेड़ो को काटना पड़ता है। पेड़ इंसान के लिए बहुत जरूरी है   सभी के प्रयास से इस समस्या का हल निकल सकेगा। 
  6. सरकार को हर इलाके में गोबर गैस और बायो गैस प्लांट लगाकर  कूड़े का निस्तारण करने का   प्रबंध करना चाहिए। 


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#the relationship of the unique father & daughter beyond thinking

               सोच से परे अनोखा बाप-बेटी का रिश्ता    




    https://youtu.be/lwWJAGwe3h0
  ये कैसा बाप -बेटी का रिश्ता है जो गले से नीचे नहीं उत्तर रहा। जिस इंसान की दो बेटियां हो वह कैसे अपने से केवल 15 साल छोटी लड़की को गोद लेगा। दो बेटियों के बाप के मन में किसी और की बेटी को गोद लेने की इच्छा पैदा होते इससे पहले कभी नहीं देखी। बेटी का मतलब ढेर सारी जिम्मेदारी होता है।
      जब गुरमीत राम -रहीम हनीप्रीत कौर को गोद  लेने के लिए गया तब वह दूल्हे के समान सज कर रथ पर सवार हुआ था। उसकी सज -धज किसी भी तरह बाप के समान नहीं लग रही  थी।
       जिस बेटी की शादी उसने  9  साल पहले विश्वास गुप्ता से कर दी थी। गोद लेने के बाद उसके साथ हनीप्रीत को  साथ रहने क्यों नहीं दिया। बल्कि उस पर अनेक इल्जाम लगा कर कई बार जेल की सजा खिलवा दी। दूसरी तरफ विश्वास का कहना था -इन दोनों के बीच अवैध सम्बन्ध थे। जिसकी खिलाफत विश्वास ने की जिसका परिणाम उसे अनेक तरह से झेलना पड़ा। उसकी सारी सम्पत्ति और पत्नी तक छीन कर उसे दर -बदर करके  धक्के खाने के लिए मजबूर कर दिया। ये कैसा पिता है जिसने बेटी का घर आबाद करने की जगह बर्बाद कर  दिया। वरना सगा पिता अपना सब कुछ देकर भी बेटी को पति के साथ रहने के लिए मजबूर करता है।या उन दोनों में सुलह करवाने की भरसक कोशिश करता है।
      उसने अपनी सगी बेटी का घर इस तरह बर्बाद करने के बारे में क्यों नहीं सोचा।
        ये कैसा पिता का इंसाफ है जिसमे सगे बच्चो के पास किसी तरह के अधिकार नहीं दिए गए। बल्कि गोद ली बेटी को उसके पति से अलग करके सारे हकूक सौंप दिए गए। राम -रहीम के साथ हर जगह हनीप्रीत दिखाई देती है। उसके आलावा पारिवारिक जन दिखाई नहीं देते।
       लोग अपने बेटे को सत्ता सौंपते है। इन्होने बेटे की तरफ बिलकुल ध्यान नहीं दिया। ऐसे धर्म -गुरुओ के बारे में सोच कर हैरानी होती है जिन्होंने ताकतवर होते ही सामाजिक नियमो को तिलांजलि दे दी।
         एक वीडियो में गुरमीत के साथ उसका परिवार दीप जला रहा है। जिसमे उसकी पत्नी ने हाथ बढ़ाकर दीप जलाने में सहयोग देने की कोशिश की। हनीप्रीत ने पत्नी का हाथ झटक कर अलग कर दिया। उसके बाद गुरमीत की पत्नी किसी भी समारोह में आगे आती दिखाई नहीं देती बल्कि उसकी अनुपस्थिति मन को खलती है। इसको देखकर लगता है बूढ़ी पत्नी की जगह किसी अन्य को दे दी गयी है। यदि  गोद ली बेटी  सगी बेटी से बराबरी करे समझ आती है लेकिन पिता की पत्नी से बराबरी करने लगे तब उसे क्या कहा जायेगा।
        हनीप्रीत राम -रहीम के साथ फिल्म की हीरोइन कैसे बन सकती है। हमारे समाज में बाप -बेटी के बीच निश्चित दुरी होती है। जिसे गलती से कोई नहीं तोडना चाहता। उनकी फिल्म में उनकी भावनाये बाप -बेटी की कम प्रेमी -प्रेमिका की अधिक दिखाई देती है।जहां इस कदर नजदीकियाँ होती है वहाँ अनहोनी होते देर नहीं लगती।
  मुझे सलमान खान का -"दबंग के  गाने में कोरियोग्राफर को सचेत करना याद  आता है । कि   भाभी मलाइका खान के साथ कोई दृश्य साथ  नहीं होना चाहिए।
        राम -रहीम के जेल जाते ही हनीप्रीत क्यों गायब हो गयी। पुलिस को उसके खिलाफ देश -द्रोह का केस दायर करना पड़  रहा है। पा की परी ने कैसे बुरे वक्त में उसका साथ छोड़ दिया। यह कही चढ़ते सूरज को अरग देने जैसा साथ तो नहीं था।
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  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...