नेताओ के तुष्टिकरण के कारण सिसकता हिन्दू
नेताओ की तुष्टिकरण की राजनीति के कारण हिन्दू समाज का ह्रास हुआ है। जो खबरे कभी जनता के सामने आने नहीं दी जाती थी अब हमारे समाने आने लगी है।उप्र में एक हिन्दू लड़की को डरा कर चार मुस्लिम लड़के अगवा करके ले गए। उस लड़की की खोजखबर लेने के बारे में सोचा नहीं गया। उसके अभिभावक पुलिस थाने में दरयाफ्त करते रहे। लेकिन किसी ने उस मसले पर कार्यवाही करने की जरूरत नहीं समझी। उस लड़की को दो हफ्ते बाद उन लड़को ने उसके गांव के बाहर छोड़ दिया।
छूटने के दो दिन बाद वह लड़की थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाने गयी तो
- इंस्पेक्टर ने मुस्लिम लड़को का नाम लिखवाने से मना कर दिया।
- उसके बाद लड़की से" उन लड़को के द्वारा जबरदस्ती मांस खिलाये जाने के बारे में लिखवाने से " मना किया गया।
- वे लड़के उसे धर्म बदलने पर जोर डालते रहे। इन सब बातो को उस लड़की से लिखने के बारे में सब मना करते रहे।
- उसे केवल गैंग रैप होने की FIR दर्ज करवाने पर जोर डाल रहे थे।
पुलिस ऑफिसर ने गलती से ट्वीट करके कह दिया -"उस लड़की को मांस नहीं खिलाया गया। "
इस ट्वीट के कारण समाज में इस लड़की का राज खुला। वरना सभी ने इस घटना को दबाने में पूरी ताकत लगा दी थी वोटो की राजनीति के कारण लोगो के अंदर हमदर्दी खत्म हो गयी है। सभी दलों ने मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति को पनपाने में अपनी सारी ताकत झोंक दी है।
ये घटना उप्र के मुज्जफरनगर की है। कुछ समय पहले मुज्जफरनगर में हिन्दू मुस्लिम दंगे भड़क गए थे। "उस समय हिन्दू लड़की को छेड़ने के चलते हिन्दुओ ने मुस्लिम लड़को को पीट दिया था। "
जिसके खिलाफ मुस्लिम नेता आजमखान ने अखिलेश सरकार को आदेश दिया सारे मुस्लिमो को जेल से आजाद करके हिन्दुओ को जेल में डाल दो। उस समय अखिलेश सरकार उनके दबाब में आकर उनके अनुसार आदेश देने लगी
कैराना ,सुंदर नगरी ,असम ,केरल में हिन्दुओ के साथ होने वाली खबरे कभी सामने नहीं आती। लेकिन किसी मुस्लिम की गलती या आपसी झगडे में मोत हो जाती है तो सारी सियासत गर्माने लगती है। सारा संचार माध्य्म जागरूक हो जाता है। कई हफ्ते तक हर तरफ इससे सम्बन्धित खबरे आती रहती है।
ममता बनर्जी ने विजयदशमी को मूर्तिविसर्जन एक दिन बाद करने की आज्ञा दी है। क्योंकि विजयदशमी का त्यौहार ख़ुशी का त्यौहार होने के कारण हर्षोल्हास के साथ मनाया जायेगा जबकि उसी दिन मुस्लिमो का दुःख भरा त्योहार मुहर्रम है। उनके अनुसार दोनों धर्मो के विवाद को रोकने का यही तरीका है।
कुछ समय पहले एक मुस्लिम अध्यापिका तीन हिन्दू लड़को को जबरदस्ती नमाज अदा करवा रही थी। इस विडिओ के वायरल होने के कारण उनपर कार्यवाही की गयी।
धर्मनिरपेक्षता का राग अलापते हुए 7 % मुस्लिम कैसे 18 % हो गए। ये मुझे अब समझ में आ रहा है। अब तक मुझे लगता था मुस्लिम आबादी के बढ़ने का कारण उनके बहुत अधिक बच्चो का होना है। लेकिन बहुत अधिक संख्या में बच्चे होने से इतनी अधिक आबादी नहीं बढ़ सकती।
वे अपनी पूरी ताकत हिन्दू आबादी को मुस्लिम बनाने में लगी हुई है।मुझे लगता हे 7 % आबादी तो केवल हिन्दुओ को मुस्लिम बना कर बढ़ाई है। यदि कोई मुस्लिम अपनी इच्छा से भी हिन्दू धर्म स्वीकारता है तो हाहाकार मच जाता है लेकिन जब कई सौ हिन्दू मुसलमान बनते है तो उनकी कही खबर नहीं छपती।
कश्मीर में जिन हिन्दुओ ने मुस्लिम धर्म स्वीकार कर लिया वे रह सकते है। बाकि हिन्दुओ को निकाल दिया। वही हालत असम, पश्चिम बंगाल, केरल ,आंध्र प्रदेश की होती जा रही है। 10 % से कम आबादी अल्पसंख्यक में आती है। लेकिन 18 % आबादी को भी अल्पसंख्यक की सहूलियतें किस लिए दी जा रही है।
जिन राज्यों में हिन्दू अल्प संख्यक हो रहे है। उनकी खोज -खबर क्यों नहीं ली जा रही है। सबसे प्राचीन धर्म का सभी देशो से खात्मा हो गया है। हिन्दुओ के लिए कोई एक देश नहीं बचा। बाद में आया मुस्लिम धर्म 58 देशो का राज धर्म कैसे बन गया। सोचने का विषय है।
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