आजादी के जश्न के बीच मुसलमानो के आक्रामक तेवर
कई दिन से सुनाई दे रहा था मुसलमान आजादी के दिन भारतीय झंडा नहीं फहराएंगे सुनकर बहुत दुःख हो रहा था।मुझे पहली बार पता चला मुस्लिम मदरसों में राष्ट्रीय गान नहीं गया जा सकता। वहां वन्दे मातरम गाने पर निषेध है। वे स्वतंत्रता दिवस नहीं मानते।
आज के समाचारो में विशेष रूप से मदरसों में झंडा रोहन मनाया जाता दिखाई दे रहा है। पिछले 70 सालो में भारतीय मुसलमान इस तरह की मनमर्जी करते रहे लेकिन वोट बैंक के लिए किसी भी नेता ने उन्हें गलत साबित करने की कोशिश नहीं की। बीजेपी के आने के बाद इस तरह की खबरे समाचारो में सुनाई देने लगी है। यदि बीजेपी नहीं आती तो आम जनता तक इस तरह की खबरे आती ही नहीं।
भारत के उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी 10 साल तक पद पर आसीन रहे लेकिन उन्हें तब भारत में मुसलमान असुरक्षित नहीं लग रहे थे । भारत के आलावा किसी अन्य देश में संभव है कि किसी और धर्म का इंसान सर्वोच्च पद तक पहुचे । यदि पहुँच जाये तो ऐसा वक्तव्य देने की हिमाकत करते देखा है जब वह खुद इस सीट से रिटायर हो रहा हो.उन्हें पद पर रहते हुए भारत में असहिषुणता नहीं दिखाई दी उसे दूर करने के बारे में नहीं सोचा। बल्कि रिटायर होते समय ये संवाद बोलना याद आया . लगता है भारत में रहने वाले हर मुसलमान के लिए भारतीयों के लिए अपशब्द बोलना जरूरी हो गया है।
भारत में 7 % से मुसलमान १ ८ % हो गए कोई इलाका या मोहल्ला ऐसा नहीं दिखाई देता जहाँ मुसलमान नहीं रहते। लेकिन उनके इलाके में कितने हिन्दू रहते हुए आपने देखे है।जितने भी मुस्लिम इलाके से लगते हिन्दू इलाके हे वहां मंदिर में मुसलमानो ने घंटे बजाना और पूजापाठ करना बंद करवा दिया है। अधिकतर मुस्लिम इलाको से हिन्दू कम दामों में अपना घर बेचकर या छोड़कर दूसरे इलाको में बसना मंजूर करते है। हिन्दुओ की सुनने वाला कोई नहीं है। क्योंकि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है।
केवल भारत ही ऐसा देश है। जिसमे मुसलमान अपने को भारतीय नहीं मानते लेकिन मुस्लिम देश में जाने की बात करने पर आपे से बाहर हो जाते है। वे भारत को अपना देश नहीं मानते लेकिन भारत छोड़ने के लिए भी तैयार नहीं होते। भारत के आलावा किसी और देश के मुस्लिम नागरिक इस तरह का वक्तव्य देने की हिम्मत जुटा सकते है। मुझे असंभव लगता है।
मुसलमान इतने अधिक कटटर हो गए है कि इनकी कटटरता ने सभी मुस्लिम देशो में तबाही मचा दी है। इन्हे अपना देश छोड़कर दूसरे देशो में पनाह लेनी पड़ रही है। कोई देश ख़ुशी से इन्हे अपने देश में देखना नहीं चाहता सभी मजबूरी में इन्हे सहन कर रहे है। तब भी इनके तेवर इतने खतरनाक है।
भारत में रहने वाले कश्मीर ने अपना अलग झंडा बना लिया है। वहां आये दिन भारतीय झंडे के जलाये जाने की घटना होती है। मुझे केरल और कर्नाटक की अलग झंडे की मांग को सुनकर हैरानी हो रही है।
स्वतंत्रता दिवस पर केरल के विद्यालय में मोहन भगवत के द्वारा झंडा फहराए जाने को लेकर मुसलमानो के कड़वे शब्द सुनकर हैरानी हो रही है। जैसे उन्होंने झंडा फहरा कर बहुत बड़ा गुनाह कर दिया हो।
यह कैसा धर्मनिरपेक्ष देश है जहां देश की आजादी का जश्न न मनाने वालो पर कोई कार्यवाही नहीं होती बल्कि झंडा फहराने वालो को दंड दिए जाने का आह्वान किया जा रहा है। हम आजाद देश के वाशिंदे है या किसी अन्य देश का भारत पर कब्जा हो गया है।
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