#HINDU"S RELIGIOUS SENTIMENTS HURT (AMARNATH YATRA)

                हिन्दुओ की धार्मिक भावनाओ को पहुँचती ठेस 

   हिन्दुओ की धार्मिक भावनाये उन्हें जान को जोखिम में डालने से नहीं रोकती। . कश्मीर की हिंसा से सभी वाकिफ है। इन दहशतगर्दो के कारण कश्मीर का विकास रुक गया है। सभी को मालूम है। कश्मीर में हिन्दुओ के लिए जीवित रहना बहुत मुश्किल हो गया है केंद्रीय सरकार और कश्मीर सरकार हिन्दुओ को महफूज रखने में असफल रही है इसलिए कश्मीर से 40 % हिन्दू आबादी  पलायन कर चुकी  है। बीजेपी चुनावो में कश्मीरी हिन्दुओ का वोट उनसे इसलिए प्राप्त कर सकी। क्योंकि उन्हें कश्मीर वापसी का सुंदर सपना दिखाया गया था। उस सपने में जो पिछले 25 साल से देख रहे थे। इतने सालो में कोई सरकार उसे सच नहीं कर सकी.

        ये सपना यहूदियों के वतन वापसी के समान बन गया है। उनकी वतन वापसी का सफर हजारो साल तक चला। आज यहूदी जुझारू और मेहनती कौम के रूप में अपने चारो और बसे दुश्मनो के बीच निवास  कर रहे है।
         कश्मीरियों में यदि वैसी ही जुझारूपन आ सकेगा तभी वे अपने वतन वापस हो सकेंगे। उनसे उनके देश में रहते हुए ही, किसी आक्रमण के बिना, उनकी अपनी सरकार होते हुए भी ,आतंकवादियों ने उन्हें उनका देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया। आज कश्मीरी सरकारों का मुँह देख रहे है कोई मजबूत सरकार उन्हें वापिस उनके देश पहुंचा सकती है। ये असम्भव सपना है। उन्हें वापिस उनके राज्य में भेजा जा सकता है लेकिन आतंकवादियों से सुरक्षित रखना असंभव है। आतंकवादी आमने सामने की लड़ाई नहीं लड़ते बल्कि वे छुपके धोखे से आक्रमण करते है।
     रात के अँधेरे में जब सेनिको पर आक्रमण होने पर वह  अपनी रक्षा करने में असमर्थ होते है। तो आम जनता कैसे इनका सामना कर सकेगी। अमरनाथ के यात्रियों पर आक्रमण  रात के अँधेरे में सैनिक सुरक्षा में किया गया जिसमे अनेक यात्री मर गए या घायल हो गए।
        मुझे समझ नहीं आता उनकी धार्मिक आस्था उन्हें जोखिम उठाने से नहीं रोकती। जिस राज्य में रोज सैनिको के शब आते दिखाई देते है तब उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर खतरे की संभावना क्यों नहीं दिखाई देती है। उनके अंदर पुरानी परम्परा के शब्द गूंजते दिखाई देते है। जब कहा जाता था-" यदि तीर्थयात्रा करते हुए प्राण निकल जाये तो मोक्ष की प्राप्ति होगी। "
       मैने ऐसे कई यात्री देखे है जो मैदानी इलाको में एक किलोमीटर पैदल नहीं चलते वे यहाँ पट्ठुओं और पालकियों के सहारे इतनी लम्बी यात्रा करने की हिम्मत जुटा लेते है.. ये हमारी धार्मिक आस्था ही कश्मीरियों का घर भर रही है यदि ये तीर्थ यात्री कश्मीर जाना बंद कर दे तो उन्हें कितनी आर्थिक हानि का सामना करना पड़ेगा। जैसे कश्मीर जो एक समय धरती का स्वर्ग कहलाता था अब पर्यटक जाने से घबराते है। मै भी उनमे से एक हूँ।
       पर्यटकों का तो कश्मीर में अकाल सा पड़ गया है। देखते है ये तीर्थयात्री कब अमरनाथ यात्रा पर जाने के मामले में सजग होंगे।  

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