#CRUDE ATTACKS ON GIRLS

                    लड़कियों पर दरिंदगी भरे हमले 

 आजकल की खबरे मन में दहशत भर देती है। कुछ दिलफेंक लड़के लड़कियों को अपनी सम्पत्ति समझने लगते है। उनके लिए उनका बजूद केवल उन तक सीमित होता है। जब वे खुद निर्णय लेने लगती है उनसे गबारा नहीं होता।
       वे उसे अनेक तरह से प्रताड़ित करते है। उनकी प्रतारणा से लड़किया घबरा जाती है। उनके मन में उनके प्रति डर पैदा हो जाता है। उनसे मिलना बंद कर देती है लेकिन  वे फिर से उनके पास आना चाहते है  उन्हें डरा -धमका के।
     उसके डराने से विपरीत असर होता है। जिसके कारण वे घर से निकलना बंद कर देती है। ये लड़के उसे बर्दाश्त नहीं कर पाते।उनका पूरा समय उनकी झलक देखने तक सीमित होकर रह जाता है। उनके अंदर लड़कियों की मानसिकता का अंदाजा नहीं होता।  उन्हें मारने -पीटने और डराने में ही अपनी मर्दानगी नजर आती है।
      आज के माहौल में लड़के -लड़कियों की दोस्ती पर बंदिश लगाना बहुत कठिन हो गया है। लड़के पहले से निरंकुश और आजादी का जीवन जीते रहे है। लेकिन आज की लड़कियों पर पहले के सामान पाबंदियाँ  नहीं लगाई जाती। उन्हें भी पढ़ने -लिखने और अन्य गतिविधियों में शामिल होने की छूट मिल रही है। आसपास के माहौल के कारण यदि अभिभावक उन पर पाबन्दी लगाने की कोशिश करते है तो उसका विरोध किया जाता है। लड़कियों की उन्नति के लिए डर से सहमे हुए अभिभावक उन्हें आजादी देने पर मजबूर हो जाते है क्योंकि कम पढ़ी -लिखी लड़की का भविष्य अंधकारमय होता है।
       लड़कियों की लाशो पर सपनो का महल बनाना कितना दुशबार होता है वर्तमान घटनाये उदाहरण है। हंसती खेलती लड़कियों को अपने घमंड के कारण दिलफेंक लड़को के लिए लाश में बदल देने में देर नहीं लगती।
     हाथ में हथियार लिए लड़के का सामना करने के लिए साधरण लोग तैयार नहीं होते। वे अपलक ऐसी घटना को देखते रहते है। उन्हें अफ़सोस तो जरूर होता है लेकिन अपनी जान को खतरे में डालना गबारा नहीं होता। हम आज भी जंगल राज में जी रहे है। हथियारों के सामने मानवता कराहती रहती है.
     ऐसी घटना के बाद  ,कुछ समय तक  हमें घर से निकलने में डर लगता है। लेकिन कुछ समय बाद भूली -बिसरी याद बनके, मन में कसक पैदा  कर  जाती है। जिस परिवार पर गुजरती है वह सारा जीवन मन -मसोसता रहता है। उनके परिवार की बची हुई लड़कियों पर अनेक पाबंदिया लगा दी जाती है क्योंकि वे उन्हें जिन्दा देखना चाहते है खोना नहीं चाहते।
       हमें परिवार के लड़को का इस तरह से पालन करना चाहिए कि उनके लिए लड़की की इच्छा का सम्मान करने की आदत डाली जाये। क्योंकि सारी जिंदगी सब उनके मनमुताबिक जिंदगी नहीं जियेंगे। उन्हें समयानुसार खुद को बदलना पड़ेगा।
       पत्नी और प्रेमिका में अंतर् होता है। उस पर अधिकार नहीं रखा जा सकता। आजकल पत्नी भी डरी -सहमी जिंदगी जीने के लिए तैयार नहीं होती। उन्हें प्रेमिका के अधिकारों और उसकी सीमाओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वरना सारा जीवन असफल इंसान का जीवन जीना पड़ेगा। उसके कारण वे मानसिक रोगी बनकर रह जायेगे। ऐसे इंसान का साथ परिवार और समाज दोनों नहीं देते अंतत वे अकेले रह जाते है।
      उनका क्रोध कत्ल करने के बाद शांत होता है उन्हें अपनी गलती का अहसास होता है। लेकिन मरे हुए को फिर से जिन्दा नहीं किया जा सकता।  तब उनमे  अपने को बचाने का भाव पैदा होता है। उन्हें बचाने के लिए लाढ -प्यार से पालने वाले परिवारिक जन भी उनसे दुरी बना लेते है। वे अनेक रिश्तेदार और दोस्तों के पास पनाह लेने के लिए घूमते रहते है। कानून के खौफ के कारण लोग उनका साथ देने से कतराने लगते है। क्योंकि पुलिस उन्हें ढूंढने के लिए परिवार वालो पर हर तरह की सख्ती बरतती  है ताकि वे उन्हें पकड़ सके।
      मौत की घटना के बाद पुलिसवाले किसी तरह की कोताही बरतने के लिए तैयार नहीं होते बल्कि साम -दाम , ,दंड -भेद सारी नीतियाँ अपना कर गुनहगार को पकड़ लेती है। अब प्रताड़ना का समय ऐसा शुरू होता है कि जिंदगी नासूर बन कर रह जाती है। उनके परिवार को सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ता है। उसकी कुछ देर की गलती सबको सारी जिंदगी का दर्द दे जाती है।
       भारत में लिंग के आधार पर कानून में रियायत नहीं दी गयी है ,सबको जीने का समान अधिकार है। यदि इंसानो को  किसी की जिंदगी छीन लेने का अधिकार दे दिया जाये तो आधी -आबादी एक दूसरे की जान ले लेगी।
       हमें दुसरो की जिंदगी लेने का अधिकार नहीं है। जब हम किसी को जीवन दे नहीं सकते तो जीवन कैसे ले सकते है। हमें दुसरो का और कानून का सम्मान करना चाहिए।मुझे इस समय   ये पंक्तियाँ याद  आ रही है.
 "खुद जियो औरो को भी जीने दो।
यही तो हे जिंदगी का रास्ता।"
       यदि आप मेरे विचारो से सहमत है तो SHERE और कमेंट कीजिये 

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