गलत सूचना का परिणाम
यात्राएँ बहुत बार बहुत सारे लोग करते है लेकिन कुछ यात्राएँ भूले से भुलाई नहीं जा सकती। जिन्होंने हमें एहसास दिलाया जो कितनी भी यात्राएं करके स्वयं को चतुर समझे लेकिन हालात उन्हें मुसीबत में डाल सकते है। कुछ ऐसा ही पिछले दिनों पुणे से दिल्ली आते समय घटा।हमने प्लेन के बारे में पहले से जानकारी हासिल की तो पता चला फ्लाइट एक घंटे लेट है। हमने सोचा जब एक घंटे देर से आनी है। तो हम भी एक घंटे देर से चलेंगे। जब एक घंटे देर से एयरोड्रम पहुंचे तो उन्होंने बोर्डिंग पास देने से मना कर दिया। हमने घर से ऑनलाइन बोर्डिंग पास भी नहीं निकाला था। इसकी जरूरत महसूस नहीं हुई थी।
प्लैन रात के 11. 30 बजे चलना था लेकिन लेट होने के कारण उसका समय १२. 30 बजे हो गया था। मुझे अकेले प्लेन से दिल्ली आना था। इसलिए सब मुझे एयरोड्रम पर छोड़ कर चले गए।बोर्डिंग पास लेने पहुँची तो उन्होंने देने से मना कर दिया। लेकिन जब बोर्डिंग पास के लिए बहस करनी शुरू की तब समय का अंदाजा ही नहीं हुआ कब रात के डेढ बज गए। उन्हेंकई बार एहसास कराने की कोशिश की -" अकेली लड़की कैसे घर जाएगी। गलती उनकी है। उन्होंने पूरी बात पहले नहीं बताई।' इस सब बहस का उन पर कोई फर्क नहीं पड़ा। इतनी रात को इतने सुनसान एयरोड्रम पर बहस करते हुए घबराहट के साथ रोना भी आ रहा था। लेकिन मेरी बेबसी का किसी को ख्याल नहीं आ रहा था। सारी मिन्नत खुशामद का कोई असर नहीं हो रहा था। मुझे घर वालो पर भी गुस्सा आने लगा उन्होंने इतनी रात की टिकट क्यों ली। सिर्फ कुछ पैसो की बचत के लिए सारी रात बेकार हो गयी।
आपसे गुजारिश हे जब भी प्लेन लेट होने के बारे में मालूम चले तो घर से लेट निकलने के बारे में मत सोचना। प्लेन के लिए दो घंटे पहले निकलते है तो ऐसे में तीन घंटे पहले निकलने में भलाई है। क्योंकि समय या किसी परेशानी के बारे में नहीं सोचा जाता। वे केवल अपने नियमो पर अड़े रहते है। अधिकतर समय लोगो की फ्लाइट वालो से लड़ाई के बारे में सुनाई देता रहता था। लेकिन उनकी लड़ाई का कारण अब समझ में आ रहा था।
जब किसी तरह बोर्डिंग पास देने के लिए तैयार नहीं हुए तो घर वालो को दुबारा से बुलाया। उन्हें आने में दो बज गए। सारे रास्ते घर वालो पर अपना गुबार निकाल दिया लेकिन मन को शांति नहीं मिली। घर पहुँचते हुए तीन बज गए। सारी रात एक तरह से सड़को पर ही गुजर गयी।
अपनी हालत और बेबसी पर रोना आ रहा था। भारत में इतनी आसानी से टिकट नहीं मिलती। इस टिकट को एक महीने पहले बुक करवाई थी। अब अगली टिकट कैसे बुक होगी समझ में नहीं आ रहा था।
अगले दिन से दफ्तर जाना था। कई दिन की छुट्टी हो गयी थी। सभी को किस तरह से सफाई दूंगी। ये सब मेरी बेबसी समझ सकेंगे या मेरा मजाक बन कर रह जायेगा। सारी रात सोचते हुए बीत गई।
मेरी अविस्मरणीय यात्रा किसी लगी। जरूर बताना।












