#untold pain of the woman


                                          औरतो का अनकहा दर्द 


 हर साल महिलाओ के उतथान  के लिए अनेक उपाय किये जाते है। संपूर्ण संसार में महिलाओ का उत्थान होते दिखाई नही देता। भारत से लेकर मध्य एशिया तक ओरतो की दयनीय स्थिति लोगो से छिपी नही हे। किसी को यदि नीचा दिखाना है। तो उसके घर की औरतो को अपमानित कर दो वह  जिंदगी भर सिर  उठा नही सकेगा। 
       औरते शारीरिक रूप से कमजोर होने के कारण उनका विरोध नही कर पायेगी। हर समय किसी घर के मर्द ओरतो के साथ नही रह  सकेंगे इसका फायदा अपराधी दिमाग के लोग उठाने से नही चूकते।
        प्राचीन समय में इसी कारण औरते चार -दीवारी में कैद होकर रह गयी थी। उनसे पढ़ाई करने ,काम करने का अधिकार तक छीन लिया गया था। उन्हें अनेक बंधनो में बांध दिया गया था.बहुत लोगो के प्रयास के कारण हम आज सम्मानजनक जीवन जीने के लायक हो सके है। 
         मुझे याद आता है। हमसे  पिछली पीढ़ी की महिलाये अनपढ़ होती थी। उनके अंदर समाज का सामना  करने की ताकत  नही होती थी। किसी आपदा का सामना वह अपने दम पर नही कर पाती थी। घर के पुरुष की मृत्यु का मतलब उस परिवार का खात्मा समझ लिया जाता था। ...अब भारत में ऐसे मामले दिखाई नही देते।
        लेकिन कुछ समय पहले मध्य एशिया के देश की एक औरत की दास्ताँ पढ़ कर हैरान रह गयीउसके घर के एकमात्र पुरुष की मृत्यु होने के कारण आय के लिए , यह 30 साल तक आदमी के  कपड़ो में रह कर, काम करके, अपने घर का गुजारा  चलाती रही वह औरत है। इसका उसने पता नही चलने दिया। 
        मुस्लिम देशो में औरतो की शिक्षा पर पाबन्दी है अभिभाबक भी अनिच्छा से मनमसोस कर इसको मानने को मजबूर होते है। वरना मलाला यूसुफजई जैसे हादसे होते देर नही लगती। पढ़ाई छुड़वाने के लिए कट्टरपंथी विद्यालय तोड़ देते हैऔर  धमकिया देते है। अफ्रीकन देश में एक विद्यालय में पढ़ने वाली 200 लड़कियों का अपहरण करलिया और  उन्हें यौन दासी के रूप में खरीद फरोख्त करते है। उन 200 लड़कियों का पता वहाँ की सरकार 3 साल बाद भी नही लगा सकी  है।  इन हालातो में कितने अभिभावक अपनी लड़कियों को विद्यालय भेज सकेंगे। 
      भारत में दंगल की हीरोइन जायरा बसीम और इंडियन  आइडल की नाहिद आफरीन जैसी लड़कियों को डराने से ऐसे कट्टरपंथी  बाज नही आते। भारत में जहाँ मुस्लिम बहुल तबका रहता है वहाँ कट्टरबादी शरीयत के अनुसार दुबारा से जीवन चलाना चाहते है। जो नियम हजार साल पहले उचित थे। उसमे वे बदलाव पसंद नही करते बल्कि बदलाव लाने वाले को दुनिया से उठा देने में गुरेज नही करते। 
         मुस्लिम कट्टरवाद से सभी देश परेशान है। मोहम्मद पैगम्बर ने चार शादिया करने का नियम इसलिए बनाया था क्योंकि उस समय युद्ध और महामारी के कारण पुरुष आबादी कम हो गयी थी। जिसके कारण अविवाहित महिलाओ की संख्या बहुत बढ़ गयी थी। उन्हें संसार के सभी सुख मिल सके।
          आजकल सीरिया जैसे देसो में ऐसे ही हालत दुबारा से पैदा हो गए है। वहाँ युद्ध में पुरुष मारे जा चुके है या जानमाल की सुरक्षा के लिए देश छोड़ कर जा चुके है। वहाँ काम करने वाली संस्थाओ में यदि महिला कर्मचारी 80 है तो पुरुष कर्मचारी मुश्किल से 3 मिलेंगे।
     सीरिया  की सरकार अविवाहितों की शादियां सामूहिक रूप से सेनिको से करवाती है। विवाह की उम्र को पार कर चुकी अनेक अविवाहित औरते ऐसे देशो में मिल जाएगी। कई देशो में बहुपत्नी प्रथा भी इसी लिए चल रही है क्योंकि पुरुष  आबादी बहुत कम हो गयी है। 
     एक पति की अनेक पत्नी होने के कारण लड़ाईया होना आम है। इससे बचने के लिए तीन तलाक का नियम बनाया गया था।जिसके डर से वे शांति से जीवन यापन कर सके।  लेकिन उसका फायदा आजकल के मुस्लिम मर्द उठा कर एक औरत का जीवन नरक बनाने से गुरेज नही करते। तीन तलाक कह देने भर से वह इंसान पत्नी और बच्चे की जिम्मेदारी से मुक्त हो जाता है। एक मजलूम औरत सारी जिंदगी कैसे इस जिम्मेदारी को निभाती है। इस बारे में वह सोचना भी नही चाहता।पुरुष अनेक शादी करना अपना हक़ समझने लगे है। भले ही उनका गुजारा चलाने लायक उनकी आमदनी न हो। 
         युद्ध प्रभावित मुस्लिम देशो में हर औरत के लिए कमसकम 10 बच्चे पैदा करना जरूरी है। क्योंकि युद्ध के कारण मृत्यु दर  बढ़ गयी है। दवाइयों और खाने के आभाव में एक नवजात को, जिंदगी पर खेल कर जन्म देना ,फिर  भूख और  बीमारियों से लड़ते हुए, खाने और दवाइयों के आभाव में दम तोड़ते हुए बच्चो की लाश देखना उस औरत के लिए कितना दुखदाई होता है। सृजन की प्रतीक महिला  को, विनाश के पहाड़ पर ला खड़ा कर दिया जाता है। बच्चे की मौत के साथ वह भी टूटने लगती है। 
         आइसिस के सैनिक अपहृत महिलाओ को जबरदस्ती अपने सामने गर्भनिरोधक खाने पर मजबूर करते है। जिससे उन्हें उनकी खरीद -फरोख्त में आसानी हो। अपने बच्चे होने पर  उनके अंदर पिता की ममता न जाग जाये। 
       कई देशो में युद्ध में पुरुषो ,वृद्धो और बच्चो  को उस घर की औरतो के सामने मार दिया जाता है। उस घर की औरतो के साथ सामूहिक बलात्कार करके उन्हें अनचाही माँ बना दिया जाता है। अनेक देशो में देखा गया है। ऐसे परिवारहंता के बच्चो को औरते अपना नही पाती है।  उनका दर्द उन्हें तड़पाता रहता है। 
        मध्यएशिया के देशो में गर्म जलवायु और पानी की कमी के कारण पूरा शरीर ढकने वाले कपड़ो का चलन चला।शरीर का पसीना हवा के सम्पर्क में जल्दी आकर उड़ जायेगा जिससे शरीर में पानी की कमी के कारण मौत होने का खतरा होगा। पुरुष और स्त्री दोनों पूरा शरीर ढकने वाले कपड़े पहनते थे  लेकिन पुरुष आधुनिक कपड़े पहनने लगे लेकिन औरतो को आज भी बुरका पहनने के लिए मजबूर किया जाता है। 
      आज भी औरतों को आगे बढ़ाने के लिए उपाय करने बहुत जरूरी है। यदि आधी आबादी प्रगति में सहायक नही होगी तो देश आगे नही बढ़ सकेगा। 
       यदि आप मेरे विचारो से सहमत है तो इसे like और share कीजिये। 

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