भारतीय चुनावो पर मोदी का असर
चुनावो के नतीजे हमें सोचने पर मजबूर करते हे कि भारतीय लोकतंत्र जाति आधारित है या विकास आधारित है। जो जातिया समाजवादी पार्टी या बसपा से जुडी हुई थी इस बार उन्होंने भी बीजेपी को अपना अमूल्य वोट दिया।इसपर मायावती का बयान चौकानेवाला लगता है। उनके अनुसार वोटिंग मशीन से छेड़छाड़ की गयी है। उनके इस वक्तव्य का मै विरोध करती हूँ। में भी चुनाव अधिकारी के तौर पर काम कर चुकी हूँ। चुनाव अधिकारी पार्टियों के एजेंटो के सामने मशीन तैयार करता है। उसके सही काम कर ने पर पोलिंग आरम्भ होती है। वरना उनकी सहमति के बिना काम शुरू नही होता। शुरुआत में बहुत सारे कागजो पर सभी पार्टियों के एजेंटो के हस्ताक्षर होते है।
उन एजेंटो की निगाह प्रत्येक मतदाता की वोटिंग पर रहती है। कुछ भी गलत होने पर वे काम आगे नही बढ़ने देते। ये एजेंट उसी इलाके के हर व्यक्ति को अच्छी तरह से जानते है। उनके रहते फर्जी वोटिंग कराई ही नही जा सकती।
मशीने सील भी एजेंटो के सामने होती है। मशीने शुरू करने के समय और सील होते हुए एजेंट की मुहर लगती है। ये पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ता होते है। इसके लिए उन्हें पैसे भी दिए जाते है। हर पोलिंग बूथ पर हर पार्टी के दो एजेंट हमेशा होते है। यदि आपको पोलिंग स्टेशन पर पुरे दिन रहने का मौका मिलेगा तो आपको पता चलेगा ये एजेंट कितनी मुस्तेदी से अपना कार्य करते है।
यदि एक स्टेशन पर 6 बूथ है। तो किसी न किसी बूथ पर फर्जी वोटिंग को लेकर पार्टी एजेंट झगड़ा कर रहे होते है। ये पार्टी एजेंट ही एक दूसरे की टांग खीच रहे होते है। इन सबके बीच चुनाव अधिकारी मूक दर्शक की भूमिका निभाते है। ऐसे समय एजेंट और पुलिस ही उनके बीच के मटभेद को सुलझाती है।
मशीने सील बंद होकर पहरेदारी में सही जगह पहुचाई जाती है। वहाँ भी सख्त पहरे में गिनती होने तक रहती है। उन जगहों पर भी पार्टी के कार्यकर्ताओ की निगरानी रहती है।
मायावती को यूपी में बुरी हार का सामना करना पड़ रहा है। यहाँ की हार वह बर्दास्त नही कर पा रही है। उन्हें देखकर लगता हे खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे। जब तक वह जीतती रही उन्होंने तब कभी वोटिंग मशीन में कमी नही निकाली।
इस बार उन्होंने 97 टिकेट मुस्लिंमो को देकर अपनी जीत निश्चित समझ ली लेकिन उनके इस निर्णय से बाकि जाति वाले उनसे विमुख हो गए। जिसके कारण उनका यूपी से पत्ता साफ हो गया।
समाजवादी नेता अखिलेश यादव भी अपने परिवारिक झगड़ो के कारण चुनावो में हार गए। उनके पिता और परिवार के लोगो को महत्व न देने और भाई -भतीजावाद, भ्रस्टाचार ,अपराधी लोगो को पनाह देने,गायत्री प्रजापति जैसे लोगो को पकड़ने में असमर्थ रहने,जमीनी हकीकत से अनजान रहने और कुछ लोगो की गलत सलाहों के कारण यूपी में हार का मुख देखना पड़ा। उन्होंने लखनऊ के विकास को पुरे यूपी का विकास समझ लिया।
उन्होंने अपनी प्रभावशाली और बेदाग छवि को भुनाने की कोशिश की। लेकिन उनके साथ भ्रस्ट लोगो की छवि ने उनकी चमक धूमिल कर दी।यूपी की निरंकुश क़ानूनी व्यवस्था,सरकारी नोकरी में सारे यादवो को महत्व देना। लोगो के मन में यूपी की अराजकता सपा से मतदाताओ को विमुख कर गयी।
भाजपा की बम्पर सफलता सोचने पर मजबूर करती है। मोदी जी का करिश्माई व्यक्तित्व ,सही लोगो को साथ लेकर चलना ,भ्रटाचारियो के खिलाफ सख्त कदम ,विकास का प्रतीक बन गए है। सभी के दिमाग में उनकी निस्वार्थ देश सेवा उनके चुनावी रथ को आगे बड़ा रही है।
इस चुनाव में सभी जातियो के लोगो ने अपने खास दलो को वोट न देकर, भाजपा को वोट देकर जातिगत संकीर्णताओ से ऊपर उठ कर दिखा दिया है। मुस्लिम समुदाय को भाजपा का विपक्षी समझा जाता था लेकिन उन्होंने दलगत भ्रम का शिकार होने के स्थान पर मोदी जी में विश्वास व्यक्त किया है। मोदीजी की कर्मठ , निस्वार्थ भावना तीन तलाक की नीति और देश का विकास मुस्लिमो को भी उनका मुरीद बना गया है।

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