नशे के लत
साल के आखिरी दिन लोग अपना दिन नशे के साथ बिताना पसंद करते है। छोटे बड़े सभी के मन में ख़ुशी का मतलब नशे की खुमारी में रहना हो गया है। पहले समय में शराब के नशे तक लोग सीमित थे। लेकिन अब नशे को पाने के लिए जिंदगी से खिलवाड़ करने से भी नहीं चूकते।
आज की रात नशे में झूमते हुए लोग गाड़ी चलाने से भी परहेज नहीं करते। उन्हें रोकने के लिए जगह -जगह पर पुलिस तैनात रहती है। आज की रात इन नशेड़ियों के द्वारा बहुत सारा चालान (रूपये के रूप में ) सरकार के पास पहुंचेगा।
पहले समय में लोग नया साल परिवार के साथ बिताना पसंद करते थे। लेकिन परिवार में नशे के शौक पर पाबंदी होती है इसलिए लोग अन्य जगहों पर जाकर नया दिन मना रहे है । नशा करने के कारण बहुत दुर्घटनाये होती है जिसके कारण जान और माल की हानि होती है।
आज भी भारत में नशा करने वालो को अच्छी नजर से नहीं देखा जाता है। एक इंसान को उसकी पत्नी ने नशा करने से रोकने की कोशिश की। उसने आपत्ति करने पर पत्नी की पिटाई कर दी। फिर कहा - "मै नशा नहीं छोडूंगा। यदि ज्यादा रोकेगी तो तुझे छोड़ दूंगा। लेकिन नशा किसी हालत में नहीं छोडूंगा। " उस इंसान की छोटी उम्र में मृत्यु हो गई। शराब के कारण ठीक करवा चौथ के दिन जब पत्नी ने व्रत रखा था। वह दुनिया छोड़ कर चला गया।
आज उसके छोटे -छोटे बच्चो की देखभाल करने की जिम्मेदारी उसकी पत्नी पर आ गयी है। वह रोती हुई इस जिम्मेदारी को उठाने के लिए मजबूर हो गयी है
नशा शराब ,एलएसडी ,गोलियों,अफीम,चरस और हीरोइन तक सीमित नहीं रहा बल्कि विद्यालयों के बच्चे भी इस लत के शिकार हो रहे है। उन्होंने इसके लिए बड़ो की गलत चीजे चुराने के अलावा अन्य तरीके ढूँढ निकाले है। इंक फ्लूड ,नेलपॉलिश, गुटका आदि खाकर अपने शरीर को बर्बाद कर रहे है। एक बार इनकी आदत लग जाये तब इन्हे छुड़ाना मुश्किल हो जाता है।
सिगरेट शुरू में दूसरो की देखादेखी पी जाती है। बाद में इसकी आदत पड़ जाती है। इस पर साफ शब्दों में लिखा होता है स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उसके बाबजूद इसे पीकर लोग मृत्यु की गोद में समा रहे है। वे जिंदगी और ख़ुशी में अंतर नहीं कर पा रहे है। उन्हें कौन समझाये कि जिंदगी रही तभी खुशिया भी मनाओगे।
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