सरकारी अस्पताल में टेस्ट रिपोर्ट का मायाजाल
करोना के समय में टेस्ट कराना आसान हो गया है। लेकिन इसकी रिपोर्ट पाना उतना ही कठिन है। मै आपके साथ अपना अनुभव साझा कर रही हूँ।
मुझे अंदमान निकोबार द्धीप समूह घूमने जाना था। उसके लिए करोना टेस्ट करवाना जरूरी था। मैने उसके लिए कोविद टेस्ट की एम्बुलेंस से टेस्ट करवाया। उन्होंने सेम्पल लेने के बाद कोई पर्ची नहीं दी। उनके अनुसार सुचना और रिपोर्ट मेरे फ़ोन पर आ जायेगी । लेकिन कोई सुचना या रिपोर्ट नहीं आयी तब उन्होंने जिस डिस्पेंसरी के बारे में बताया। तब में रिपोर्ट के लिए वहां गयी लेकिन उन्होंने मुझे सही जबाब नहीं दिया। घुमाते रहे मेरी परेशानी बढ़ाते रहे । यहां जाओ या वहां से रिपोर्ट मिलेगी।
दूसरी बार मैने इंदिरापुरम में टेस्ट करवाने की कोशिश की। टेस्ट तो कर दिया। लेकिन कोई पर्ची नहीं दी। उन्होंने एक वेव साइड का पता बता दिया। लेकिन जब उसे खोलने की कोशिश की, तब कुछ खुल नहीं सका। मेरा टेस्ट करवाना बेकार चला गया।
तीसरी बार मैने पोर्टब्लेयर एयरपोर्ट पर टेस्ट करवाया। वहां पर पैसे लगे। लेकिन उन्होंने 15 मिनट में रिपोर्ट दे दी। उसके भरोसे हम अंदमान में घुम सके। वर्ना पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर हमे क़्वारण्टीन में रहना पड़ता या वापिस भेज दिया जाता। लेकिन भगवान की कृपा से टेस्ट नेगेटिव आया। मेरा वहां जाना सार्थक हो गया।
किसी ने बताया उनकी रिपोर्ट चार दिन पुरानी थी इसलिए उस रिपोर्ट को नकार दिया गया। उन्हें फिर दुबारा टेस्ट करवाना पड़ा था।
उसकी दास्तान सुनकर मेने किसी को सलाह दी। तुम जाने से दो दिन पहले ही टेस्ट करवाना ताकि तुम्हारी रिपोर्ट का सही फायदा उठाया जा सके। उनकी टेस्ट रिपोर्ट उनके जाने तक नहीं मिल सकी.
अब उन्हें गए हुए भी एक दिन हो गया है। लेकिन टेस्ट रिपोर्ट अभी तक नहीं आयी। मुफ्त टेस्ट करवाने का ऐसा अंजाम होता है। अब आप ही बताये ऐसे में यदि हम जैसे लोगो प्राइवेट डॉ से टेस्ट करवाते तब हमारे कई हजार खर्च हो जाते। सरकारी काम काज का हाल मैने आपको बता दिया है। अब आपकी मंसा है आप क्या निर्णय लेते है
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