विचित्र स्वभाव
आज करोना काल में हर तरफ तबाही मचाई हुई है। इसके बाबजूद लोगो ने सबक नहीं लिया। जिसका जहां बस चल रहा है, वह पैसे बनाने में लगा है। उन्हें जिंदगी और मौत के बीच झूलते इंसान की अहमियत का अहसास नहीं हो रहा है। उनकी मानवीयता खत्म हो गई है।
जब किसी का अपना दुनियां से विदा हो जाता है। उसे इसका अहसास है। दूसरे लोगो को लगता है। वे अमर है। उनका और उनके परिवार का कुछ नहीं बिगड़ेगा।
सरकार लोगो की जिंदगी बचाने के लिए जितना पैसा खर्च कर रही है। उसका एक चौथाई भी खर्च नहीं किया जा रहा है। सब अपनी जेब भरने में लगे है। इतने लोगो की मौत भी उन्हें सम्वेदन शील नहीं बना पा रही है।
जब उनके अपने की मौत होती है तब उन्हें सब पर गुस्सा आता है। उनकी दुनिया वीरान हो जाती है। इस अहसास को यदि वो दूसरो के परिवारों में देख कर, सही रास्ते पर आ जाये तो बहुत सारे परिवार आबाद रहे ।
इंसानो का विचित्र स्वभाव मुझे सोचने पर मजबूर कर रहा है। इंसान दूसरो की मौत का सच देखकर अपनी मौत की कल्पना क्यों नहीं कर पाता।
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