जब उसके करीब आई तब पता चला । उसने चार बेटों को जन्म दिया था। लेकिन उस अभागी के बेटे उससे दगा कर गए। पहला बेटा जब कुछ महीनों का था तब वह गांव के घर में रहती थी। वह अपने बेटे को चारपाई पर लिटा कर काम करने चली गई। काम निबटाने के बाद बच्चे के पास आने पर उसने देखा उसका बेटा निर्जीव पड़ा है। उसका गला चारपाई की रस्सियों में फंसने के कारण मौत हो चुकी है। वह इस सदमे को झेल नहीं सकी।पागल हो गई। इस सदमे के कारण उसे बाकी चार बच्चो को पालने की सुध नहीं रही। उसकी हालत देखकर पागलखाने भर्ती करवाना पड़ा।
कुछ समय बाद ठीक होने पर वह घर वापस आकर बच्चो की देखभाल करने लगी। अभी तक वह गांव के घर में रह रही थी। जमीनों के कारण उनका झगड़ा चल रहा था। पिछले हादसे को कुछ समय बीता था ।
एक दिन उनके दूसरे बेटे की लाश खेत में पड़ी मिली। अबकी बार वह औरत ये हादसा बर्दाश कर गई लेकिन उसका पति इस हादसे को सहन नहीं कर सका। वह पागल हो गया। इस बार पति को पागलखाने भर्ती करवाना पड़ा।
कुछ समय बाद वह जब पागलखाने से ठीक होकर आया तब उन्होंने गांव छोड़ने का निश्चय कर लिया।क्योंकि आपसी विवाद में वे और बच्चो को खोना नहीं चाहते थे। उन्होंने अपनी भरी पूरी गृहस्थी छोड़ दी।
दिल्ली में आकर एक कमरे के किराए के मकान में रहने लगे। उस समय उनके पास बहुत थोड़ा सा समान था।गरीबी में खुशी से दिन काट रहे थे।
उनकी मेहनत रंग लाई। उन्होंने एक तीन मंजिला मकान खरीद लिया
उनका छोटा बेटा बारहवी के पेपर देने के बाद इंजीनिरिंग के लिए टेस्ट दे रहा था।वह पेपर में पास नहीं हो पा रहा था। उसके कई प्रयत्न बेकार चले गए थे ।वह इसको सहन नहीं कर पा रहा था। उसने अपने परिवार के बारे में बिल्कुल नहीं सोचा।
तीसरी मंजिल के कमरे मे जहां पढ़ाई करता था ।एक दिन गले में फांसी लगा कर दुनियां से चला गया। उसने एक बार भी औरो के बारे में नहीं सोचा। उसके जाने के बाद बाकी लोगों का क्या होगा।जब मैने इस हादसे के बाद रंजना को देखा उसे अपने कपड़ों का भी होश नहीं था। वह अपने पति को इस हादसे के बारे में बताने की कोशिश कर रही थी। लेकिन मुंह से आवाज नहीं निकल रही थी।उसकी हालत देखकर आंसू नहीं रुक रहे थे।इसे कहते है विधि की विडम्बना।
कुछ समय बाद जब वह इस सदमे से उबर गई तब मैने उनसे बात की तब उन्होंने बताया उनके तीनों बेटे गले के फंदे से मारे गए। भगवान ऐसे दिन किसी और को न दिखाए।
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