मोटापे के कारण बढ़ते दुःख
खुशी खाते -पीते परिवार की इकलौती बेटी थी। सभी के लाढ-प्यार में पली प्यारी सी लड़की थी। बचपन में काम के आभाव में वह गोल मटोल हो गई थी। लेकिन बड़े होने पर उसे अपने मोटे होने का अहसास हुआ तब उसने अपने शरीर को सही रूप देने के लिए कदम उठाने शुरू किये। भगवान ने गोरा रंग और सुंदरता विरासत में दी थी। उस पर उसने अपने शरीर को सही आकर देने की कोशिश की , जिसने उसे पतली दुबली सूंदर लड़की बना दिया। तब उसकी सुंदरता कयामत ढाने लगी। जो उसे देखता देखता रह जाता। उसे भी इस बात का अहसास था।
पढ़ाई पूरी करने के बाद उसके लिए अमीर घर से रिश्ता आया। लड़का मोटा था। जबकि खुशी काफी पतली थी। लेकिन उसे अपने पर भरोसा था। जैसे मैने अपना वजन कम किया इसका वजन भी कम हो जायेगा। थोड़ी प्रेरणा की जरूरत पड़ेगी। मेरा व्यवहार उसका वजन भी कम करा देगा। ये सोचकर उसने शादी के लिए हाँ कर दी।
शादी के बाद उसने बहुत कोशिश की, माधव का वजन कम करवाने की लेकिन जिसने कभी शारीरिक श्रम न किया हो उसके लिए वजन कम करना बहुत मुश्किल होता है।क्योंकि ऐसे में साँस फूलना और पुरे शरीर में दर्द होना लाजमी है। माधव इन दोनों का सामना नहीं कर पाता था। ये दर्द एक दिन का नहीं बल्कि पूरे हफ्ते रहता है। यदि इंसान एक हफ्ते इस दर्द को सह ले। उसके बाद दर्द महसूस नहीं होता क्योंकि शरीर को इसकी आदत पड जाती है। लेकिन माधव उस एक हफ्ते के दर्द को लाँघ नहीं पाया। घर में खाने -पीने का आभाव नहीं था। यदि खाने के प्रति सख्ती बरती जाती तो वह बाहर खा आता लेकिन उसने शरीर के प्रति संजीदगी नहीं दिखाई। इसलिए वजन बढ़ता चला गया।
ख़ुशी ने दो बच्चो को जन्म देने के बाबजूद अपना वजन बढ़ने नहीं दिया।आज भी वह अपनी उम्र से बहुत कम लगती है।
जबकि माधव ख़ुशी के कहने के बाबजूद वजन कम करने के कोई उपाय नहीं करता था। पत्नी का कहा न मानना हमारे समाज में शान की बात मानी जाती है। इसलिए माधव का वजन दिनोदिन बढ़ता चला गया। ख़ुशी का कड़ा रुख भी माधव पर असर नहीं कर रहा था।
उनमे दूरियां बढ़ती जा रही थी। ख़ुशी की माधव के प्रति बेरुखी बढ़ती चली जा रही थी। दुनियां ख़ुशी को सख्त औरत के रूप में देखने लगी थी। जो पत्नी का कोई फर्ज नहीं निभा रही।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें