रुक्मी बेटे की शादी करके बहुत खुश थी। उसमे बेटा उसे बहुत मन्नतो के बाद मिला था। उसकी परवरिश करते समय उसने सुध नहीं ली। उसको बढ़ते देखकर उसे ख़ुशी मिलती थी। बेटा पढ़लिखकर सफल व्यवसायी बन गया। उसके घर बैठे रिश्ते आने लगे। तब उन्होंने सभ्य घर की सुशिक्षित लड़की से शादी कर दी।
कुछ समय उपरांत उनके घर एक बेटा और बेटी पैदा हुए। उनके घर में खुशियां ही खुशियां थी। उनके व्यवसाय में भी उन्नति होती चली गई। उसके बेटे ने एक घर नहीं बाल्कि अनेक घर खरीद लिए। उसकी उन्नति देखकर सब हैरान रह जाते थे। ऐसी स्थिति में भी उनके अभिभावकों ने काम करना नहीं छोड़ा था। उनके पिता सरकारी नौकरी करते थे। साथ ही एक दुकान का ध्यान भी रखते थे। पिता की अनुपस्थिति में माँ दुकान संभालती थी।
उनके बेटे ने पॉश कॉलोनी में घर लिया। वे भी बेटे के साथ उस घर में रहने चले गए। कुछ समय के बाद वे वापस अपने पुराने घर में आकर रहने लगे। उस घर में उन्होंने दो मंजिलो पर किरायेदार रख लिए थे। तीसरी मंजिल के एक कमरे वाली जगह में रहने लगे।
इतनी ऊंचाई पर गर्मी भी लगती थी।
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