चट्टानी सौंदर्य का मालिक जबलपुर
इस इमारत के ऊपर हमें एक सुरक्षा गार्ड दिखाई दिया। उसे देखकर हैरानी हुई इस इमारत को सुरक्षा गार्ड की जरूरत बिलकुल नहीं थी क्योंकि इस किले का 90 % भाग तबाह हो चुका है। केवल 10 % की सुरक्षा के उपाय करना मुझे जरूरी नहीं लगा। लेकिन इसके बहाने से कुछ इंसानो को रोजगार मिला हुआ है।
रानी एक जुझारू दबंग महिला थी। वह शादी के चार साल बाद विधवा हो गई। उसने अपने बेटे नारायण के नाम पर राज्य की बागडोर संभाल ली। अकबर उसे अपने हरम में लाना चाहता था। लेकिन उसने ऐशोआराम की जिंदगी अपनाने की जगह अकबर से मुकाबला करना बेहतर समझा। इन्होने भी रानी लक्ष्मीबाई के समान युद्धभूमि में वीरगति पाई। जबलपुर में इनके नाम से विश्वविद्यालय और स्मारक बने हुए है।
किले के पास बेलेंसिंग स्टोन बना हुआ है। जिसे देखकर कुदरत की ताकत हमें चौंका देती है। एक छोटे से आधार पर एक बहुत बड़ी चट्टान खड़ी हुई है। उसके पास जाते हुए मुझे डर लग रहा था। ये चट्टान जो अभी तक नहीं गिरी कही मेरे ऊपर ही गिर न जाये। गनीमत रही मै सहीसलामत वापस आ गई।
इसके पास ही शारदा मंदिर बना हुआ है। इसे भी आप कुदरत का अचम्भा कहेंगे। क्योंकि इस मंदिर की दीवारे ईंट -पत्थरो से कम चट्टानों से अधिक बनी हुई है। केवल मंदिर में मूर्तियां इंसानी हाथो से निर्मित है। इन स्थानों पर चटटनो का अधिकतम प्रयोग दिखाई देता है। मेने इससे पहले पूरी चट्टानों को निर्माण कला में इस्तेमाल होते नहीं देखा था। यहाँ पूरी चट्टानों के इस्तेमाल से निवास बनाये गए है।
यहाँ पानी के लिए बहुत बड़ी कुदरती झील बनी हुई है। उसके पास ही एक मस्जिद दिखाई देती है। हर तरफ चट्टानों और गुफाओ का सूंदर उपयोग दिखाई देता है। इतनी सारी चट्टानों को मेने पहली बार देखा था। कुदरत की महिमा मेरे अंदर तक बस गई।
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