#RAVAN KE GUN

                                  रावण के गुण 

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        कल रावण का दहन हुआ। मुझे रावण में कुछ अच्छाइया दिखाई देती है लेकिन रावण राम से हार गए थे इसलिए उन्हें बुरा इंसान मान लिया गया। आज के इंसान को यदि रावण के समान गुण मिल जाये तब उसका व्यवहार भी बदल जायेगा। आप मेरे विचारो से सहमति जाहिर नहीं कर पाएंगे लेकिन जो विश्लेषण करने जा रही हूँ उसपर विचार अवश्य करे।
       किवदंती है बचपन में रावण बहुत सूंदर होने के कारण ,उन्हें दशानन कहकर पुकारा जाता था। उनके दस सिर कभी नहीं थे। बल्कि उनकी सूंदरता  के कारण उन्हें यह उपनाम मिला।
      रावण को शास्त्र और शस्त्र का अद्भुत ज्ञान हासिल था। अपने समय में रावण लंका के आलावा पूरे भारत मे भ्रमण करते थे। उनके साम्राज्य का विस्तार भी भारत में फैला हुआ था। दक्षिण भारत में विशेष रूप से उनका वर्चस्व था इसलिए वे हवन आदि क्रियाओ का विरोध करते थे। क्योंकि उनकी रक्ष संस्कृति इसके विपरीत थी। 
      राम आर्य संस्कृति को मानने वाले थे। जबकि रावण रक्ष संस्कृति के उपासक थे। हर इंसान अपने धर्म को दूसरे धर्म से ऊँचा समझता है जिसके कारण अपने धर्म के उत्थान के भरसक प्रयत्न करता है।  दूसरे धर्म को खत्म करने में सारी ताकत झोंक देता है। वैसे ही रावण ने किया। रक्ष संस्कृति में खुलापन था। जबकि आर्य संस्कृति इस खुलेपन को बर्दाश्त नहीं कर पाती  थी।
        सुपनखा अर्थात स्वर्णनखा ने राम और लक्षमण के सामने अपनी पसंद जाहिर की जबकि आर्य संस्कृति में विवाह दूसरे निर्धारित करते थे।उन्होंने उसकी इच्छा का उपहास ही नहीं उड़ाया बल्कि उन्होंने सूपनखा को बदसूरत ही बना दिया। ये कहाँ का इंसाफ है।
      सुपर्णखा के अपमान का बदला लेने के लिए रावण ने सीता का हरण किया था। किसी की बहन को बदसूरत बना देने पर साधारण इंसान भी अपना आपा खो बैठेगा जबकि रावण लंका का ताकतवर  राजा था। उसके गुस्से के बारे में किसी ने  नहीं सोचा। 
       रावण की पत्नी मंदोदरी पांच कन्याओं (सीता ,द्रोपदी, अहिल्या ,अनुसुइया और मंदोदरी ) में गिनी जाती है।यानि उस समय की सर्वश्रेष्ठ औरत  थी.सर्वश्रेठ  औरते सर्वश्रेष्ठ लोगो को ही मिलती है।   मंदोदरी अप्रतिम सौंदर्य की स्वामिनी थी। वह जोधपुर की कन्या थी।
          भारत में केवल दो स्थान है जहाँ रावण का पुतला नहीं जलाया जाता। उसमे एक उत्तर प्रदेश का विशरख यहां रावण के पिता विश्रवा  ऋषि रहते थे  और दूसरा जोधपुर क्योकि रावण को  यहाँ दामाद माना जाता है।
          रावण लंका में जब भी सीता से मिलने जाता था तब उसके साथ मंदोदरी होती थी। यदि उसके मन में कलुष होता तब क्या वह मंदोदरी को अपने साथ लेकर जाता।  सीता का हरण केवल सूपनखा के अपमान का बदला लेने के लिए किया गया था।
      उस समय    रावण के सामान विद्वान कोई   नहीं था। तभी तो राम ने लक्ष्मण से उसके अंतिम क्षणों  में ज्ञान प्राप्त करने के लिए कहा। दुश्मन के पास कोई चीज होती है तभी उसके सामने झुका जाता है।  वरना दुश्मनी जिससे की जाती है उससे जीभरकर पहले नफरत की जाती है। जिससे नफरत करेंगे उससे ज्ञान प्राप्त करने के बारे में कौन सोचता है।
          रावण के सामान उस समय कोई बाहुबली नहीं था। उसे कोई हराने की सामर्थ्य नहीं रखता था। ऐसे में घमंड आना बड़ी बात नहीं है।
       रावण विभीषण की विश्वासघात के कारण मारा गया था। यदि ऐसा नहीं होता रावण को हराना असम्भव था। कहा जाता है रावण की मौत के बाद विभीषण को लंका का राजा बना दिया गया और मंदोदरी की शादी भी उससे कर दी गयी।
        आपको आर्य संस्कृति को  मानने के  कारण ये उचित लगता है। मुझे नहीं लगता।  जहाँ लक्ष्मण ने कभी सीता को पैरों  से ऊपर नहीं देखा वही विभीषण ने अपनी भाभी से शादी की।
        एक बार आप अवश्य विचार कीजिये रावण एक साधारण मनुष्य था। जिसके पिता ऋषि का जीवन जीते थे। उन्हें पैतृक रूप से वह केवल ज्ञान दे पाए वाकी  सब कुछ उन्होंने अपने पुरूषार्थ  से हासिल किया। उन्हें सुंदरता भगवद्कृपा से मिली बाकि गुण उन्होंने अपनी कर्मठता से हासिल किये।
        शिव को अपनी उपासना से प्रसन्न करके उनसे सोने की लंका प्राप्त की। जबकि हम तो किसी से एक तौला सोना भी प्राप्त नहीं कर पाते। 
        अभी हमने देवी को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखे। जिंदगी भर पूजा आराधना की लेकिन भगवान ने आज तक दर्शन नहीं दिए। हमसे रावण उत्तम है तभी तो उन्हें इच्छित फल मिले। 

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