मणिपुर और दिल्ली में अंतर

              दिल्ली के लोगों के लिए मणिपुर बिल्कुल अलग है। यहां के लोगों के अंदर बहुत प्यार और सम्मान की भावना पाई जाती है। ये लोग अन्य भारतीयों से जुड़ने का तहेदिल से प्रयास करते है। उनके मन की भावनाएं हमें सोचने पर मजबूर करती है ये लोग सच में ऐसा महसूस करते है या दिखावा कर रहे है! हम दिल्ली में रह कर दूसरों पर भरोसा करना भूल चुके है!दिल्ली के लोगों में हर इंसान से विश्वास उठ चुका है! हम सच्ची भावनाओं के प्रति भी आशंकित रहते है! हम जिन्दगी में इतना धोखा खा चुके होते है कि हर एक को शक की निगाहों से देखते रहते है!
       हमारे मेजबान का घर इतना बड़ा था कि उसमें आराम से दस गाड़ी खड़ी हो जाए! उनके घर की चारदीवारी इतनी छोटी थी कि कोई भी चोर अंदर प्रवेश कर सकता था!खिड़कियों पर सीखचे नहीं थे! कोई भी खुली खिड़की से आसानी से घुस सकता था! यहां के लोग बहुत सारा सोना पहन कर घूमते है! यहां तक कि छोटे बच्चे भी कन्हैया की तरह जेवर पहनते है! इन्हें देखकर समझ नहीं आता डर दिल्ली में अधिक है या मणिपुर में? दिल्ली के घरों की जगह के बराबर इनके घरों में तालाब भी बना हुआ है!जिसमें ये पानी के जीव पालते हैं! इनके घरों में लगभग डेढ़ सौ गज के बराबर जगह में हरियाली भी होती है जिसमें अनेक तरह के पेड़ लगे होते हैं!
           यहां बहुत बारिश होती है! जितनी बारिश होते मैने यहां देखी है! वह मुझे बहुत ज्यादा लगी! लेकिन यहां के लोगों के हिसाब से बहुत कम है! इसके कारण फसल नहीं बोई जा सकती! भारत के हर हिस्से में बारिश की अति परेशानी का कारण बन रही है वहीं यहां कमी परेशानी पैदा कर रही है!यहां की आबादी केवल ४० हजार है! सड़कें ख़ाली- खाली दिखाई देती है!
        इंफाल से बाहर निकलते ही हरे भरे इलाके दूर तक फैले नजर आते है!इस समय धान की बुआई का समय है लोगो को घुटनों तक पानी में खड़े होकर काम करते देखना मन को सुकून देता है! सारे खेत लगभग बराबर लंबाई और चौड़ाई में दिखाई देते है! यहां पहाड़ों पर जूम खेती होते हुए भी दिखाई देती है!
        इन्हीं रास्तों से होते हुए हम यहां के झरने साढू - चीरू देखने गए! जहां हमारा वाहन रुका उस जगह से हमें काफी ऊंचाई तक चढ़ना पड़ा! इस चड़ाई पर हमारा दम फुलने लगा  !हमें बीच में रुक कर सांस लेनी पड़ी! जबकि बहुत सारे बच्चो के समूह मस्ती करते हुए जा रहे थे उन्हें देख कर रशक हो रहा था!काश हम भी इनकी तरह जवान होते! ऊपर पहुंचने पर में विभोर हो उठी!
        झरने में बहुत अधिक पानी था! बहुत दूर खड़े होने पर भी पानी की बोछारे हमें भिगो रही थी! झरने से बहुत दूर एक पुल बना हुआ था!हम उस पर खड़े होकर आनंद लेने के बारे में सोच रहे थे! वहां बैठने की जगह भीगी हुई थी इसलिए खड़े होकर ही मजा ले रहे थे! लेकिन बोच्छारो से भीग रहे थे  बोछारो के कारण अच्छी तरह कपड़े भीग गए तब हमने भी पूरी तरह पानी के मजे लेने के बारे में सोचा!हम भी पानी में उतर कर भीगने लगे !अब हमने अच्छी तरह पानी का लुत्फ उठाया!
।      झरने की धार के नीचे बच्चे  खड़े होकर मजे से नहा रहे थे! लेकिन पानी की धार इतनी मोटी थी !मानो कोई मोटे लट्ठ से मार रहा हो जो ठीक धार के नीचे लुत्फ उठा रहे थे उनका शरीर बिल्कुल लाल था!उनकी हिम्मत को सराहने का मन कर रहा था!उनका जोश और दीवानगी देखने लायक थी
    इंफाल में बहुत जल्दी रात हो जाती है! हमारे साथी ने चलने पर जोर देना शुरू किया!तब हमारा बिल्कुल उठने का मन नहीं कर रहा था !पानी में अठखेलियां करते हुए हम कब अपनी उम्र भूल गए पता ही नहीं चला अब हमें भीगने के कारण ठंड भी लगने लगी थी!झरने के आस पास सरकार की तरफ  से खास इंतजाम नहीं थे रास्ता भी सही बना हुआ नहीं था!अंधेरा होने पर ऐसे रास्तों पर चलना मुश्किल था इसलिए हम बेमन से वापस चलने लगे! इन रास्तों पर उतरना चड़ने से भी मुश्किल लग रहा था!भीगे हुए लोगों के उतरने के कारण सीढ़ियां गीली हो गई थी! में कई जगह गिरते - गिरते बची!
        नीचे बहुत सारी दुकानें खुली हुई थी! वहां लोग अपनी पसंद की चीजे खा रहे थे!हमें समझ नहीं आ रहा था कि हमारे लायक कोई सामान है या नहीं क्योंकि हम शाकाहारी होने के कारण कई बार सोचते थे ! वहां के लोगों के हिसाब से उन्हें समझ नहीं आता था शाकाहारी लोग जिंदा केसे रहते है ! वे मछली को शाकाहारी मानते थे! मछली पकी हुई के अलावा वे मछली सूखा कर उसका चुरा बना कर किसी भी खाने में मिला देते थे! वहां के बाजार मे जिंदा।  , मरी हुई  सुखी हर तरह की मछली मिलती थी! इसलिए हम घर से बना कर खाना ले जाते थे!
      वापस घर आते हुए रात हो गई! लेकिन यहां का सफर हमारे ख्यालों में हमेशा जीवित     रहेगा!

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