#EXPERIENCE THE REPUBLIC DAY FESTIVAL FROM INDIA GATE

         इंडिया गेट से गणतंत्र दिवस समारोह का अनुभव 

   भारत में गणतंत्र दिवस पर भव्य आयोजन होता है। इस दिन सारी जगहों पर छुट्टी  होती है। दिल्ली में इस दिन विशेष रूप से तैयारी की जाती है। राजपथ के आयोजन देखने के लिए अनेक शहरो से लोग दिल्ली आते  है। मैने  बचपन से हमेशा राजपथ का समारोह दूरदर्शन पर देखा है। कभी भी इसे देखे बिना नहीं  रही  लेकिन इस दिन राजपथ से इसे देखने की ललक हमेशा बनी  रही।
       इस बार पहली बार मुझे राजपथ से समारोह देखने का मौका नसीब हुआ मेरा उत्साह संभाले नहीं संभल रहा था। हमने सुना यहाँ  पर प्रवेश सुबह 7  बजे से 9  बजे तक होता है। हमें  पास  मिले थे जिसके कारण मुझे लग रहा था। हमे आसानी से ये उत्स्व  देखने का मौका मिल जायेगा लेकिन समारोह स्थल तक पहुंचने के   अधिकतर रास्ते  बंद कर दिए गए थे। नजदीकी  मेट्रो स्टेशन  भी बंद कर दिए गए थे। सबसे पहले वहाँ पहुंचना समस्या बन गयी। जिससे भी पूछा तो एक नई समस्या आ खड़ी  होती। अपने वाहन से जाने के मामले में उसे खड़े करने की समस्या थी क्योंकि इस दिन 24  घंटे के लिए सभी मेट्रो पार्किंग बंद रहती है। हम दो जने कैसे अपनी गाड़ी लेकर जाये  और कहाँ  उसे खड़ी  करेंगे, समझ नहीं आ रहा था।
     सुबह ईरिक्शा  से चलने का कार्यक्रम बनाया तो इतनी सुबह कोई गाड़ी नहीं मिली। जब मिली तो उसे सवारी का इंतजार करना पड़ा। किसी तरह हम मेट्रो स्टेशन पहुंच गए इतनी सुबह भी  वहाँ  खूब रौनक थी।
     अधिकतर लोग फोन करके पूछताछ कर रहे थे-कौन सा स्टेशन खुला हुआ है।
     लोगो को समझ नहीं आ रहा था बंद स्टेशनो में कौन  सा है, किस नजदीकी स्टेशन से गंतव्य तक पहुँचा जा सकता है। अंतत पता चला पटेल चौक से बाहर निकला जा सकता है। इतनी सुबह लोगो का रेला देखकर स्तब्ध रह गयी क्योंकि वह  स्टेशन भी 8 . 15   तक खुला रहने की ख़बर  थी। उस स्टेशन से बाहर निकलते ही ओटो  रिक्शा वाले कई सारे  खड़े दिखाई दिए एक के बाद एक में लोग भरते जा रहे थे। इतनी सुबह इतने सारे लोगो का जमाबड़ा हैरानी पैदा कर रहा था
      मेरे ख्याल से इलेक्ट्रॉनिक के जमाने में लोग घर में बैठ  कर इसे देखते होंगे लेकिन जब हम  इंडिया गेट पहुंचे तब केवल सवा  आठ बजे थे बहुत लम्बी लाइने लगी थी लेकिन जिस भी लाइन में जाकर खड़े होते तब पता चलता प्रवेश बंद हो गया।  हमारे पास बिलकुल बेकार साबित हुए। उनके माध्यम से अंदर नहीं जा सके। हमें खुशामद करके पास हासिल करना बेकार साबित हुआ।
     आखिर में एक बहुत लम्बी लाइन में लगने का फैसला किया। काफी धोखाधड़ी करने के बाद भी अंदर पहुंचने का रास्ता नजर नहीं आ रहा था। मेरे आगे दो  छोटे बच्चो के साथ एक औरत  खड़ी  थी।
     उसे देखकर एक आदमी ने कहा - औरतो के लिए अलग लाइन है आप इतना परेशान मत हो  वहाँ  से अंदर चले जाओ।
     मैने भी उसके साथ अंदर जाने का फैसला किया। चेकिंग की जगह पर बहुत सख्ती बरती जा रही थी। छोटी से छोटी चीज भी अंदर नहीं ले जा सकते थे। खाने पीने का समान भी मना  था। इतनी सुबह निकलकर घर 2 बजे तक पहुंचने के हिसाब से मै  दो परांठे  सब्जी के साथ लेकर गई थी। एक अपने लिए और दूसरा साथी के लिए लेकिन उन्होंने  इन्हे अंदर ले जाने की आज्ञा नहीं दी तब मैंने वही  खड़े -खड़े खाकर खत्म किये जबकि इतनी सुबह मुझे खाने की आदत नहीं थी।
         अंदर पहुंच कर मैंने  इनके आने का इंतजार किया लेकिन आधा घंटे तक इन्होने प्रवेश नहीं किया। हम फोन नहीं लेकर गए थे। इसलिए परस्पर बात नहीं कर पा रहे थे। काफी देर इंतजार करने के  बाद मेने सही जगह पर जाने का निर्णय लिया। यहाँ  पर कुर्सियों का इंतजाम नहीं था बल्कि गीली घास पर बैठना पड़ रहा था। बदइंतजामी रोकने के लिए औरतो  के बैठने के लिए अलग से इंतजाम था। मेने वहाँ  स्थान ग्रहण किया। २०००० हजार सैनिक, कमांडो और पुलिस की तैनाती चप्पे -चप्पे पर थी।
      विजय चौक से घोषणाएं बहुत अच्छी तरह से मधुर आवाज में सुनाई दे रही थी स्पीकर उन्नत किस्म के थे। अपने सामने  से गणतंत्र समारोह की झांकिया ,सैनिक,अस्त्र - शस्त्र बच्चे देखकर में अभिभूत हो गयी। दूरदर्शन पर देखकर ऐसी अनुभूति नहीं होती जो यहाँ  आकर महसूस हुई।
      मैंने  समारोह देखने के बाद वापस आने का निर्णय लिया। क्योंकि मुझे अपने साथी के दर्शन कही  नहीं हुए थे। जब अब तक उन्हें ढूंढ़  नहीं सकी  तब स्वयं वापस लौटने का इरादा बनाया। लोगो से पूछकर मै  अपने घर वापस आ गयी।
          मेरे घर लौटने के एक घंटे बाद ये घर आये। तब पता चला। मेरे प्रवेश करने के कुछ समय बाद उस गेट से भी प्रवेश  बंद कर दिया गया था। इन्होने तिलक मार्ग से इस समारोह को देखा था। इण्डिया गेट के बाद आधे  कार्यक्रम रोक दिए जाते है। इस कारण अधिकतर लोग यही से देखना चाहते है। लेकिन इन्होने मुझसे ज्यादा अच्छी तरह और आराम से गणतंत्र समारोह देखा।
      मुझे लोगो की इस  समारोह को लेकर दीवानगी हैरत में डाल  रही है। यदि आप इस समारोह को देखना चाहते तो ७. 30  बजे तक अवश्य पहुंच जाये। वरना  परेशानी उठानी पड़ेगी। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...