#(film padmavat) depicting the life of the middle-aged bitterness

       मध्यकाल का कड़वाहट से भरे जीवन का चित्रण उर्फ़ पद्मावत 

   फिल्म पद्मावत को देखकर समझ नहीं आता  इस फिल्म में इतिहास के  किस रूप से  छेड़छाड़ की गई है जिसके कारण आधा भारत सुलग उठा है। इसके कारण दो महीने तक दंगे होते रहे। करणी  सेना का दो सालो से उठा बबाल  समझ से परे  है।  उन्होंने अभी तक इस फिल्म को देखने की पेशकश स्वीकार नहीं की है। कई राज्यों में इसको प्रदर्शित भी नहीं होने दिया जा रहा है। मुझे लगता है  जो इतिहास लोगो तक नहीं पहुंच सका  . वे इसके माध्य्म  से जानेगे।
      आज के समय आजादी से जीने वाले लोगो को समझ आएगा। 800 साल पहले का जीवन कितना दुखदाई था। जिसमे एक औरत  की इज्जत बचाने  की खातिर सारा राज्य खत्म हो गया। सारे  स्त्री -पुरुष अपने जीवन की आहुति देकर भी रानी को सुरक्षित रखने में असफल रहे। ऐसे समय में साधारण औरतो  की इज्जत के क्या मायने रह जाते है।
     ऐसे समय की देन  के फलस्वरूप    बाल -विवाह ,सती -प्रथा ,अशिक्षा, पर्दा -प्रथा आदि कुरीतियों ने जगह बना ली और भारतीय नारी दोयम दर्जे की और नाकारा सबित कर दी गयी। नारी के सारे  गुण -अवगुण में तब्दील हो गए। उसके जन्म को दुःख का पर्याय समझ लिया गया। उसके पैदा होते ही रोना -पीटना शुरू कर दिया जाता है।
         इसमें रणबीर सिंह और दीपिका पादुकोणे की अच्छी दोस्ती होने के कारण करणी  सेना के दिग्गजों ने सोच लिया कि  उनके अच्छे रिश्ते इस फिल्म में भी दिखाई देंगे। लेकिन इसमें पद्मावती और खिलजी का एक भी दृश्य इक्क्ठा नहीं है।
        खिलजी का बेहद गंदा और क्रूर रूप देखने में आता  है। जबकि पद्मावती एक मधुरता और कोमल भावनाओ से भरपूर औरत  के रूप में हमारे सामने आती  है। जिसको देखकर लगता है एक रूपवती औरत  रानी होते हुए भी मनपसंद साथी के साथ नहीं रह सकती।  उस जमाने में साधारण औरतो  के साथ कितना बुरा सलूक होता होगा। भारत में ऐसे युग के कारण ओरते  चारदीवारी तक सीमित  कर दी गई।
      मुझे राजा  रतनसिंह  का दया ,सहानुभूति और नियमो से चलने वाले रूप को देखकर बहुत गुस्सा आया। कई बार लगा इस जैसे राजा के कारण ही भारत हजार सालो तक गुलामी की जंजीरो में जकड़ा रहा। यदि वह भी खिलजी के साथ  वैसा ही व्यवहार करता तो उसकी जनता को इस तरह उत्सर्ग नहीं करना पड़ता बल्कि पूरा राज्य खुशियों भरा जीवन जीता। राजा रत्नसिंह को जैसे  को तैसा व्यवहार करना चाहिए था।
       रानी पद्मावती को शादी से पहले हथियारों के साथ शिकार खेलते दिखाया गया है। वही उसे हाथ पर हाथ रखे  अग्नि में जौहर  करने के लिए आतुर दिखा कर मेरी भावना को आहत किया है। जो औरत  जीवित जलने के लिए तैयार हो सकती है  । उससे ज्यादा बहादुर कोई और नहीं हो सकता। हमे सबसे ज्यादा मौत  का डर  सताता  है हम जिन्दा रहने के लिए दूसरे के सारे  जुल्म सहने के लिए तैयार हो जाते है।
       तब हमारी आधी आबादी(औरते ) यदि हथियार उठा लेती तब इतनी तबाही नहीं होती   भारत में नादिरशाह ने जब कत्लोआम मचाया उस समय  उसने भारत के बादशाह के सामने प्रस्ताव रखा तुम अपनी सारी  रानियों को मेरे कमरे में भेज दो। मै उसमे से किसी एक को अपनी रानी बनाना  चाहता हूँ। जब वे सब उसके कमरे में आ गई  उसने एक नजर देखा और अपनी तलवार निकाल  कर सिरहाने रखकर सोने  का अभिनय  करने लगा। कुछ समय बाद उठा।
        उसने बादशाह को  बुलाकर    कहा "-इसमें से कोई भी मेरी रानी बनने लायक नहीं  . इन्हे वापिस ले जाओ। "   
  बादशाह को बहुत हैरानी हुई उसने पूछा -आपको इनमे क्या कमी दिखाई दी। जिसके कारण आप इन्हे अपनाना नहीं चाहते।

       उसने कहा -मुझे इन औरतो  के अंदर बहादुरी की कमी दिखाई दी। ये सब इतने समय तक रोती  रही ,दुहाई देती रही ,फरियाद करती रही लेकिन किसी ने इतनी हिम्मत नहीं दिखाई की सोते समय मेरी तलवार उठा लेती। मुझे कमजोर और कमसिन औरत  की नहीं बल्कि एक वीर बच्चे को जन्म देने वाली बहादुर औरत की जरूरत है।
      कहा जाता है नादिर शाह जन्म से गड़रिया था लेकिन अपने गुणों के कारण बादशाह बना था।
      फिल्म में बहुत सुंदर दृश्य के साथ उस समय को उकेर दिया गया है। इसमें बहुत तेज प्रकाश के स्थान पर दियो की रौशनी में जगमगाता माहौल है। कपड़े उस युग को दरसाते  है।
      यदि आप सन  1300  के समय को देखना चाहते हो तो इस फिल्म को अवश्य देखो। हमें राजमहलों का जीवन पास से देखने का मौका मिलेगा। 

#EXPERIENCE THE REPUBLIC DAY FESTIVAL FROM INDIA GATE

         इंडिया गेट से गणतंत्र दिवस समारोह का अनुभव 

   भारत में गणतंत्र दिवस पर भव्य आयोजन होता है। इस दिन सारी जगहों पर छुट्टी  होती है। दिल्ली में इस दिन विशेष रूप से तैयारी की जाती है। राजपथ के आयोजन देखने के लिए अनेक शहरो से लोग दिल्ली आते  है। मैने  बचपन से हमेशा राजपथ का समारोह दूरदर्शन पर देखा है। कभी भी इसे देखे बिना नहीं  रही  लेकिन इस दिन राजपथ से इसे देखने की ललक हमेशा बनी  रही।
       इस बार पहली बार मुझे राजपथ से समारोह देखने का मौका नसीब हुआ मेरा उत्साह संभाले नहीं संभल रहा था। हमने सुना यहाँ  पर प्रवेश सुबह 7  बजे से 9  बजे तक होता है। हमें  पास  मिले थे जिसके कारण मुझे लग रहा था। हमे आसानी से ये उत्स्व  देखने का मौका मिल जायेगा लेकिन समारोह स्थल तक पहुंचने के   अधिकतर रास्ते  बंद कर दिए गए थे। नजदीकी  मेट्रो स्टेशन  भी बंद कर दिए गए थे। सबसे पहले वहाँ पहुंचना समस्या बन गयी। जिससे भी पूछा तो एक नई समस्या आ खड़ी  होती। अपने वाहन से जाने के मामले में उसे खड़े करने की समस्या थी क्योंकि इस दिन 24  घंटे के लिए सभी मेट्रो पार्किंग बंद रहती है। हम दो जने कैसे अपनी गाड़ी लेकर जाये  और कहाँ  उसे खड़ी  करेंगे, समझ नहीं आ रहा था।
     सुबह ईरिक्शा  से चलने का कार्यक्रम बनाया तो इतनी सुबह कोई गाड़ी नहीं मिली। जब मिली तो उसे सवारी का इंतजार करना पड़ा। किसी तरह हम मेट्रो स्टेशन पहुंच गए इतनी सुबह भी  वहाँ  खूब रौनक थी।
     अधिकतर लोग फोन करके पूछताछ कर रहे थे-कौन सा स्टेशन खुला हुआ है।
     लोगो को समझ नहीं आ रहा था बंद स्टेशनो में कौन  सा है, किस नजदीकी स्टेशन से गंतव्य तक पहुँचा जा सकता है। अंतत पता चला पटेल चौक से बाहर निकला जा सकता है। इतनी सुबह लोगो का रेला देखकर स्तब्ध रह गयी क्योंकि वह  स्टेशन भी 8 . 15   तक खुला रहने की ख़बर  थी। उस स्टेशन से बाहर निकलते ही ओटो  रिक्शा वाले कई सारे  खड़े दिखाई दिए एक के बाद एक में लोग भरते जा रहे थे। इतनी सुबह इतने सारे लोगो का जमाबड़ा हैरानी पैदा कर रहा था
      मेरे ख्याल से इलेक्ट्रॉनिक के जमाने में लोग घर में बैठ  कर इसे देखते होंगे लेकिन जब हम  इंडिया गेट पहुंचे तब केवल सवा  आठ बजे थे बहुत लम्बी लाइने लगी थी लेकिन जिस भी लाइन में जाकर खड़े होते तब पता चलता प्रवेश बंद हो गया।  हमारे पास बिलकुल बेकार साबित हुए। उनके माध्यम से अंदर नहीं जा सके। हमें खुशामद करके पास हासिल करना बेकार साबित हुआ।
     आखिर में एक बहुत लम्बी लाइन में लगने का फैसला किया। काफी धोखाधड़ी करने के बाद भी अंदर पहुंचने का रास्ता नजर नहीं आ रहा था। मेरे आगे दो  छोटे बच्चो के साथ एक औरत  खड़ी  थी।
     उसे देखकर एक आदमी ने कहा - औरतो के लिए अलग लाइन है आप इतना परेशान मत हो  वहाँ  से अंदर चले जाओ।
     मैने भी उसके साथ अंदर जाने का फैसला किया। चेकिंग की जगह पर बहुत सख्ती बरती जा रही थी। छोटी से छोटी चीज भी अंदर नहीं ले जा सकते थे। खाने पीने का समान भी मना  था। इतनी सुबह निकलकर घर 2 बजे तक पहुंचने के हिसाब से मै  दो परांठे  सब्जी के साथ लेकर गई थी। एक अपने लिए और दूसरा साथी के लिए लेकिन उन्होंने  इन्हे अंदर ले जाने की आज्ञा नहीं दी तब मैंने वही  खड़े -खड़े खाकर खत्म किये जबकि इतनी सुबह मुझे खाने की आदत नहीं थी।
         अंदर पहुंच कर मैंने  इनके आने का इंतजार किया लेकिन आधा घंटे तक इन्होने प्रवेश नहीं किया। हम फोन नहीं लेकर गए थे। इसलिए परस्पर बात नहीं कर पा रहे थे। काफी देर इंतजार करने के  बाद मेने सही जगह पर जाने का निर्णय लिया। यहाँ  पर कुर्सियों का इंतजाम नहीं था बल्कि गीली घास पर बैठना पड़ रहा था। बदइंतजामी रोकने के लिए औरतो  के बैठने के लिए अलग से इंतजाम था। मेने वहाँ  स्थान ग्रहण किया। २०००० हजार सैनिक, कमांडो और पुलिस की तैनाती चप्पे -चप्पे पर थी।
      विजय चौक से घोषणाएं बहुत अच्छी तरह से मधुर आवाज में सुनाई दे रही थी स्पीकर उन्नत किस्म के थे। अपने सामने  से गणतंत्र समारोह की झांकिया ,सैनिक,अस्त्र - शस्त्र बच्चे देखकर में अभिभूत हो गयी। दूरदर्शन पर देखकर ऐसी अनुभूति नहीं होती जो यहाँ  आकर महसूस हुई।
      मैंने  समारोह देखने के बाद वापस आने का निर्णय लिया। क्योंकि मुझे अपने साथी के दर्शन कही  नहीं हुए थे। जब अब तक उन्हें ढूंढ़  नहीं सकी  तब स्वयं वापस लौटने का इरादा बनाया। लोगो से पूछकर मै  अपने घर वापस आ गयी।
          मेरे घर लौटने के एक घंटे बाद ये घर आये। तब पता चला। मेरे प्रवेश करने के कुछ समय बाद उस गेट से भी प्रवेश  बंद कर दिया गया था। इन्होने तिलक मार्ग से इस समारोह को देखा था। इण्डिया गेट के बाद आधे  कार्यक्रम रोक दिए जाते है। इस कारण अधिकतर लोग यही से देखना चाहते है। लेकिन इन्होने मुझसे ज्यादा अच्छी तरह और आराम से गणतंत्र समारोह देखा।
      मुझे लोगो की इस  समारोह को लेकर दीवानगी हैरत में डाल  रही है। यदि आप इस समारोह को देखना चाहते तो ७. 30  बजे तक अवश्य पहुंच जाये। वरना  परेशानी उठानी पड़ेगी। 

#UNNOWN CITY CHEAT WOMAN (PART 2)

         अनजान नगरी चालबाज औरत -भाग 2 

 
  पहले भाग में आपको याद  होगा  मैना  ने हमें बिना कारण के कितना परेशान किया था। जिसके कारण हम डर गए थे और दहशत के कारण कई  बार हमारी आँखों में आंसू आ गए थे। जिस लड़की राधा ने मैना  के साथ मिलकर हमारी परेशानी बढ़ाई  थी। आज मै  उसका हाल  आपको बताने जा रही हूँ। 
       हमने उस हादसे के बाद मैना  से किसी तरह का सम्बन्ध नहीं रखा। केवल राधा के द्वारा  मैना  की खबरे मिलती रहती थी। राधा के दिमाग में उसका इतना अधिक असर हो गया था कि  उसे मैना  की अच्छाइयों के आलावा कुछ दिखाई नहीं देता था। 
    उसने कहा -"आंटी  उनसे अच्छा कोई हो नहीं सकता। इस दुनिया में इतने अच्छे लोग नहीं मिलते। उन्होंने हमारे लिए बहुत कुछ किया है। "
     हमारा विश्वास राधा और मैना  दोनों की तरफ से हट  गया था। क्योंकि जब  दो  महीने पहले कुछ  घंटे बाद ही मैना  ने घर छोड़कर होटल में जाने के लिए दोनों के परिवार से कहा तो राधा के परिवार ने सामान बांधने की कोई तैयारी नहीं की बल्कि राधा मैना  के साथ हमे होटल तक छोड़ने आयी थी । 
      हमने कुछ घंटे में अपना बहुत कम  समान निकाला  था जबकि राधा का सारा समान बिखरा पड़ा था जिसे समेटने में कई घंटे लगने थे।
       उन्होंने कहा -राधा और उसकी माँ  मैना  के घर में रह लेंगी। लेकिन उनके व्यवहार में इत्मीनान दिखाई दे रहा था। 
     हमारे शक ने राधा के सामने न  खुलने के लिए  विवश कर दिया था। वह जितना कहती थी उतना सुनते थे कोई सवाल -जबाब नहीं करते थे। 
      इस तरह दो महीने बीत  गए। क्रिश्मस की छुट्टियों में सभी अपने घर चले गए। हमारी  राधा  से कोई बातचीत नहीं हुई। छुट्टिया खत्म होने पर हमें पता चला राधा अपने घर नहीं गई बल्कि 17 दिन की छुट्टियाँ  उसने अकेले इम्फाल में बिताई है। सबको बहुत हैरानी हुई। उससे पूछने का मन कर रहा था लेकिन हमें लगा फिर से झूठ बोलेगी। जब वह  खुद बताना चाहेगी तभी सही रहेगा।उसका चेहरा उतरा हुआ था कोई ख़ुशी दिखाई नहीं दे रही थी। 
      अगले दिन उसने उदासी का कारण बताया उसका मोबाईल गायब हो गया था। इसलिए नया  खरीदना पड़ा।  उसने मैना  के साथ जाकर 35000 रूपये का लैपटॉप भी  खरीद लिया  । जिसके कारण उसका हाथ तंग हो गया था।आजकल  सभी के लिए मोबाईल और लेपटॉप जरूरी है ।  
     सबने उसकी बातो पर यकीन कर लिया। लेकिन उसके चेहरे पर अभी भी रौनक  दिखाई नहीं दे रही थी। एक दिन बाद राधा ने बताया उसके बैंक का ATM कार्ड भी चोरी हो गया था। उसमे 40000 रूपये थे वह भी निकल गए है।

        ये सारी बाते  अब तक राधा ने किसी से नहीं बताई थी वह  मन ही मन घुट रही थी। अब उसके सब्र का बांध टूट गया था उसने इतने समय में लगभग एक लाख रूपये कमाए थे जो सब खत्म हो गए थे। उसे नौकरी के द्वारा कुछ हासिल नहीं हुआ था। उससे परिवार छूटा,पैसा (३२००० हजार रूपये सुरक्षित मनी और सामान के रूप में ,  पांच हजार रूपये मकान का किराया , खाने के रूप में उसे 7000  रूपये) अलग से देने पड़ते थे। जिन दुकानों से मैना ने उन्हें समान दिलवाया था वह भी बहुत महंगा पड़  रहा था। 
      उसके कार्ड के बारे में सबने सलाह दी कि  इसकी रिपोर्ट पुलिस में करनी चाहिए। उसके साथ कुछ लोग पुलिस स्टेशन में जाकर FIR  दर्ज करवा आये। लेकिन किसी को   पैसे मिलने की  उम्मीद नहीं थी। यह सिर्फ खाना -पूर्ति  के मकसद से की गयी थी। 
       अगले दिन 12 बजे थाने  से फोन आया कि आपका मुजरिम पकड़ा गया है।आप उसकी शिनाख्त कर ले।  हमने जब मुजरिम को देखा तो दंग रह गए वह मैना  का भाई था। उससे पता चला कि  मैना  ने उसे कार्ड और पिन नंबर लाकर  दिया था। लेकिन खुद पैसे निकालने  की जगह भाई को भेजकर अपने को सुरक्षित समझ रही थी। वह भूल गयी थी कि ATM  बूथ पर कैमरे भी लगे होते है। जिसकी वजह से मुजरिम पकड़ा जाता है। पुलिस की मार के कारण सच्चाई बाहर निकलते देर नहीं लगती। 
      मैना  को इन सबका कारण जाना तब  राधा ने बताया- "मुझे इन्होने ही दिल्ली जाने से   रोका  था।"
 क्योंकि जब राधा अकेले होगी तब चोरी करना आसान हो जायेगा। पुलिस की मार  के कारण उसे 40000  रूपये मिल गए है। लेकिन वह इस कदर टूट गयी है कि  छुट्टी लेकर अपने परिवार के पास चली गयी है।
      जिंदगी की शुरुरात में इस कदर धोखा खाने के बाद कब तक राधा संभल पायेगी   

#DEADLY FORM OF POWER (TUGLAQABAD FORT)

       तुगलकाबाद का किला या वक्त की ताकत का रौद्र  रूप 

  तुगलकाबाद का  किला बाहरी  दिल्ली में होने के कारण अधिकतर लोगो की नजरो से ओझल रहा  है। इसकी तरफ सरकार का ध्यान भी नहीं जा सका  है जिसके कारण यह दिनोदिन खंडहर में तब्दील होता जा रहा है  . इसके संस्थापक गयासुद्दीन तुगलक ने दो साल के अंदर भव्य किला बनबाया था। इतना बड़ा किला इतने कम  समय में बनता हुआ इससे पहले मैने  नहीं सुना था।  यह 6  किलोमीटर के दायरे में बसाया गया था। इसके 52  दरवाजे थे। लेकिन अब सही तरिके से बने  हुए दरवाजे  कुछ ही बचे है। एक भव्य किला किस तरह मलवे  के  ढेर  में बदलता है। इसका एहसास यहाँ  पहुँचकर  होता है।
      इसकी बहुत चौड़ी दीवारे देखकर एहसास होता है। किलो को युद्ध में तोडना इतना मुश्किल क्यों होता था।
इसकी बाहरी दीवार लगभग डेढ़  मीटर चौड़ी  लग रही थी। इसकी बाहरी  दीवार काफी हद तक सही सलामत है। वरना  बाकि दीवारों के अवशेष ही बचे है।
       इसमें खाने के सामान को रखने के लिए गोल अन्नागार बनाये गए थे। अब केवल उसकी गोलाई देखकर उसके प्राचीन आकार  का अहसास होता है। पानी के इंतजाम के लिए भव्य  बाबली  में पानी  कही दिखाई नहीं देता बल्कि गंदगी ज्यादा दिखाई देती है।
        इस किले में केदियो को रखने के लिए छोटी -छोटी कोठरिया बनी हुई थी। लेकिन उन कोठरियों में दरवाजे उखड़  कर गायब  हो गए थे। उन कोठरियों तक पहुंचने के रास्तें  में झाड़ियाँ  उगने के कारण  यहाँ तक पहुँचना  मुश्किल हो रहा था। मेरे कपड़ो में झाड़ियाँ उलझ कर मुझे परेशान कर रही थी। अपने कपड़े सँभालने के बाबजूद बहुत सारे  जंगली कांटे उसमे फंस गए थे। इतनी  मुसीबत के कारण अंदर नीचे  तक पहुंचने में बहुत दिक्क्त आयी।
      बादशाह तुगलक ने इसमें हर तरह के उम्दा प्रबंध किये थे लेकिन रखरखाव की कमी के  कारण यहाँ  कुछ भी संतोषजनक दिखाई नहीं देता। इस जगह केवल टिकट घर तो बनाया गया है। लेकिन उस पैसे से इसकी बदहाली दूर करने की कोशिश नहीं की जा रही।
      मेँ  इतवार को इस किले में गयी थी। यहाँ पर बहुत सारे  जवान बच्चे मौज मस्ती के  लिए आये  हुए थे। उनकी धमा चौकड़ी और शरारते मन में उल्लास पैदा कर रही थी।  अधिकतर किले में ऊपर चढ़ने की सीढिया पत्थरो के ढेर में बदल गयी है जिस पर चढ़ना हिम्मत का काम है। यदि इसके ऊपर चढ़ सको तो आस -पास के दृश्य देखने पर सारी  परेशानी दूर हो जाती है।
      इस किले के आस -पास जंगल उग आये  है। ऊंचाई  से देखने पर ये बेतरतीव जंगल मन में उदासी भर देते है। क्रूर गयासुद्दीन तुग़लक़ ने जवानी में भले ही बहुत सारी लड़ाईया लड़ी थी लेकिन बाद में उसके अंदर उदार भावना पनपने लगी थी। जिसके कारण उसने जनता की भलाई के लिए बहुत सारे  काम करने शुरू कर दिए थे। लेकिन उनके वंशजो को उनकी उदारता पसंद नहीं आयी। उनकी ये उदारता ही उनकी मौत का कारण बन गयी। उनके बेटे मोहम्मद  बिन तुगलक ने ही ऐसा कमजोर मंच बनवाया कि  गयासुद्दीन के मंच पर चढ़ते ही उसके टूटने के कारण  वह  उसके नीचे  दब कर मर गया।
        इस बाकए  को जानकर मुझे लोगो की सोच पर हैरानी होती है। हम सारी उम्र जिन बच्चो के लिए मेहनत करते है।  दूसरो का हक छीनने से भी गुरेज नहीं करते। वही बच्चे   बड़े होने पर समय से पहले सब कुछ पा लेने की खातिर अपने बड़ो का अस्तित्व दुनियाँ  से मिटा देने की तिकड़में सोचने लगते है। यदि भगवान  भविष्य देखने  की शक्ति इंसान में दे दे तो आधे अपराध होने से  रुक जाये।
       किले से कुछ दूर सड़क के पार मकबरा बना हुआ है जिसके बारे में कहा जाता है इसकी तीनो कब्रे बाप ,बेटे और माँ की है। दुनिया का आश्चर्य ही कहा जायेगा। हम दुसरो की मौत  देखने के बाबजूद अपनी मौत  के बारे में सोचना ही नहीं चाहते। कुछ समय की ताकत और शोहरत के लिए कितनो का खून बहा दिया  जाता है।
       मुह्हमद बिन तुगलक के बारे में कहा  जाता है कि  इसने दिल्ली की सारी  जनता  को दक्षिण भारत चलने के लिए विवश किया  उसने अपनी राजधानी वही  आक्रमणों से बचने के कारण बनाने की सोची थी। लेकिन बड़े अधिकारी और अमीर  लोग सवारियों पर चढ़ कर दक्षिण भारत पहुंच गए लेकिन निरीह जनता के लिए सही प्रबंध नहीं किये जा सके।  जिसके कारण निरीह जनता को बहुत सारी  परेशानियों का सामना करना पड़ा। बादशाह ने  दक्षिण भारत आने वाली परेशानियों के बारे में नहीं सोचा था। जब परेशानियों का सामना करना पड़ा तो  बादशाह ने फिर से अपनी जनता को वापिस दिल्ली चलने का आदेश दे दिया। उसने जनता से कुछ भी पूछना जरूरी नहीं समझा। कहा जाता है "-इस आने -जाने की परेशानियों के कारण उसकी आधी जनता मर गयी।" इस कारण मोहम्मद बिन तुगलक को पागल बादशाह भी कहा जाता हे।
     यहाँ आस -पास के इलाको में पानी की दिक्क्त है। जिसके कारण लोग दूसरी जगहों पर शरण तलाश रहे है। यदि हम मिल जुलकर प्रयास करे तो हमारी काफी सारी परेशानी दूर हो जाएगी। पुराने पानी के प्रबंध को दुबारा से पुनर्जीवित करके इस समस्या का हल किया जा सकता है।
     १३२१ में बने महल के खंडहर देखकर अहसास होता है। संसार में कुछ भी स्थाई नहीं है। वरना  जिन किलो को सेना तोड़ नहीं सकी। उन्हें 700 सालो ने खुद ही मलवे में तब्दील कर दिया। 

  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...