मध्यकाल का कड़वाहट से भरे जीवन का चित्रण उर्फ़ पद्मावत
फिल्म पद्मावत को देखकर समझ नहीं आता इस फिल्म में इतिहास के किस रूप से छेड़छाड़ की गई है जिसके कारण आधा भारत सुलग उठा है। इसके कारण दो महीने तक दंगे होते रहे। करणी सेना का दो सालो से उठा बबाल समझ से परे है। उन्होंने अभी तक इस फिल्म को देखने की पेशकश स्वीकार नहीं की है। कई राज्यों में इसको प्रदर्शित भी नहीं होने दिया जा रहा है। मुझे लगता है जो इतिहास लोगो तक नहीं पहुंच सका . वे इसके माध्य्म से जानेगे।आज के समय आजादी से जीने वाले लोगो को समझ आएगा। 800 साल पहले का जीवन कितना दुखदाई था। जिसमे एक औरत की इज्जत बचाने की खातिर सारा राज्य खत्म हो गया। सारे स्त्री -पुरुष अपने जीवन की आहुति देकर भी रानी को सुरक्षित रखने में असफल रहे। ऐसे समय में साधारण औरतो की इज्जत के क्या मायने रह जाते है।
ऐसे समय की देन के फलस्वरूप बाल -विवाह ,सती -प्रथा ,अशिक्षा, पर्दा -प्रथा आदि कुरीतियों ने जगह बना ली और भारतीय नारी दोयम दर्जे की और नाकारा सबित कर दी गयी। नारी के सारे गुण -अवगुण में तब्दील हो गए। उसके जन्म को दुःख का पर्याय समझ लिया गया। उसके पैदा होते ही रोना -पीटना शुरू कर दिया जाता है।
इसमें रणबीर सिंह और दीपिका पादुकोणे की अच्छी दोस्ती होने के कारण करणी सेना के दिग्गजों ने सोच लिया कि उनके अच्छे रिश्ते इस फिल्म में भी दिखाई देंगे। लेकिन इसमें पद्मावती और खिलजी का एक भी दृश्य इक्क्ठा नहीं है।
खिलजी का बेहद गंदा और क्रूर रूप देखने में आता है। जबकि पद्मावती एक मधुरता और कोमल भावनाओ से भरपूर औरत के रूप में हमारे सामने आती है। जिसको देखकर लगता है एक रूपवती औरत रानी होते हुए भी मनपसंद साथी के साथ नहीं रह सकती। उस जमाने में साधारण औरतो के साथ कितना बुरा सलूक होता होगा। भारत में ऐसे युग के कारण ओरते चारदीवारी तक सीमित कर दी गई।
मुझे राजा रतनसिंह का दया ,सहानुभूति और नियमो से चलने वाले रूप को देखकर बहुत गुस्सा आया। कई बार लगा इस जैसे राजा के कारण ही भारत हजार सालो तक गुलामी की जंजीरो में जकड़ा रहा। यदि वह भी खिलजी के साथ वैसा ही व्यवहार करता तो उसकी जनता को इस तरह उत्सर्ग नहीं करना पड़ता बल्कि पूरा राज्य खुशियों भरा जीवन जीता। राजा रत्नसिंह को जैसे को तैसा व्यवहार करना चाहिए था।
रानी पद्मावती को शादी से पहले हथियारों के साथ शिकार खेलते दिखाया गया है। वही उसे हाथ पर हाथ रखे अग्नि में जौहर करने के लिए आतुर दिखा कर मेरी भावना को आहत किया है। जो औरत जीवित जलने के लिए तैयार हो सकती है । उससे ज्यादा बहादुर कोई और नहीं हो सकता। हमे सबसे ज्यादा मौत का डर सताता है हम जिन्दा रहने के लिए दूसरे के सारे जुल्म सहने के लिए तैयार हो जाते है।
तब हमारी आधी आबादी(औरते ) यदि हथियार उठा लेती तब इतनी तबाही नहीं होती भारत में नादिरशाह ने जब कत्लोआम मचाया उस समय उसने भारत के बादशाह के सामने प्रस्ताव रखा तुम अपनी सारी रानियों को मेरे कमरे में भेज दो। मै उसमे से किसी एक को अपनी रानी बनाना चाहता हूँ। जब वे सब उसके कमरे में आ गई उसने एक नजर देखा और अपनी तलवार निकाल कर सिरहाने रखकर सोने का अभिनय करने लगा। कुछ समय बाद उठा।
उसने बादशाह को बुलाकर कहा "-इसमें से कोई भी मेरी रानी बनने लायक नहीं . इन्हे वापिस ले जाओ। "
बादशाह को बहुत हैरानी हुई उसने पूछा -आपको इनमे क्या कमी दिखाई दी। जिसके कारण आप इन्हे अपनाना नहीं चाहते।
कहा जाता है नादिर शाह जन्म से गड़रिया था लेकिन अपने गुणों के कारण बादशाह बना था।
फिल्म में बहुत सुंदर दृश्य के साथ उस समय को उकेर दिया गया है। इसमें बहुत तेज प्रकाश के स्थान पर दियो की रौशनी में जगमगाता माहौल है। कपड़े उस युग को दरसाते है।
यदि आप सन 1300 के समय को देखना चाहते हो तो इस फिल्म को अवश्य देखो। हमें राजमहलों का जीवन पास से देखने का मौका मिलेगा।




