#BAD PARLIAMENTARIAN (GAYKVAD) AND WORKERS


              बिगड़ैल सांसद गायकवाड़ और कर्मचारी 

   हमारे सांसद और विधायक सत्ता के मद में इस कदर चूर  हो गए है। कि  उन्होंने इंसान और सरकारी कर्मचारियों को अपने इशारे पर चलाना अपना हक़ समझ लिया है। उनके अंदर सही और गलत का अंतर समझने की ताकत खत्म हो गयी है.यदि उन्हें समझाने की कोशिश करे तो सरेआम वेइज्जत करने से नही चूकते। 

      ,शिवसेना सांसद रविन्द्र गायकवाड़  busines क्लास की सीट की जिद पर इस कदर अड़ गए कि उनपर  समझाने का असर नही हुआ। उन्हें समझ नही आ रहा था की airindia की उडान में इस तरह की सुविधा नही होती।  सफर खत्म होने के बाद भी जहाज से उतरने के लिए तैयार नही हुए। सारी अनुनय -विनय नाकाम हो गयी। सख्ती बरतने पर अधिकारी की चप्पलो से पिटाई कर की। उन्हें इस बात का अफ़सोस नही हुआ। उन्होंने उस ६० वर्षीय इंसान के कपड़े फाड़ने में कोताही नही की। ये सब सार्वजनिक स्थान पर किया। आप खुद सोच के देखिये इस तरह का इंसान अकेले में लोगो के साथ कैसा सलूक करता होगा।
      जो लोग केवल 5 वर्ष के लिए सांसद की कुर्सी पर बैठते है। उनका घमंड अपरम्पार है। कभी इन नेताओ की सरकारी कर्मचारी जूते  और चप्पल पहनाते दिखाई देते है। तो कभी इनके चरणों की धूल सिर -माथे लगा के अपने को गौरवान्वित महसूस करते नजर आते है। 
     इन्हें देखकर मुझे फिल्म रावरीराठौर का वो दृश्य याद  आ गया जब इक पुलिस वाला नेता के घर अपनी पत्नी को वापिस लाने जाता है। पत्नी नेता के भाई के आगोश में रहम की भीख माँग  रही होती है। लेकिन पुलिस इंस्पेक्टर पति गर्दन नीची करके अपनी पत्नी को ढूढने की फरियाद करता रहता है। 
      मिडिया में समाचार आने के बाद FIR की जा सकी। लेकिन मुझे सभी एयरलाइन्स की एकजुटता पर ख़ुशी हो रही है। जिन्होंने उसे वापिस जाने की टिकट, माफ़ी मांगने के बाद देने के लिए कहा। उन्होंने जब माफ़ी नही मांगी तो किसी एयरलाइंस में उड़ान नही भर सके। उनकी अकड़ ने उन्हें रेलगाड़ी का सफर करवा दिया। 
        गायकवाड़ की अकड़ ने उन्हें झुकने नही दिया लेकिन और लोग इस तरह का व्यवहार करने से पहले अब सोचेगे। भले ही शिवसेना के लोग गायकवाड़ के पक्ष में बोल रहे है। लेकिन एयरलाइंस की एकजुटता उनके अंदर कुछ ख़ौफ़ जरूर पैदा करेगी। 
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#the adhunik yogi and his discharge service

आधुनिक योगी और उनकी निष्काम सेवा 

     आधुनिक योगी पुराने योगियो से अलग रूप में समाज में दिखाई दे रहे है। ये केवल अपनी उन्नति तक सीमित नही रहे। बल्कि समाज और देश को आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत है। उनकी कोशिशो से बदलाव नजर आने लगा है। पुराने योगियो के प्रति लोगो में अविश्र्वास पैदा होने लगा था। लेकिन आधुनिक योगी जैसे नरेंद्र मोदी, योगी आदित्यनाथ , रामदेव और तरुणसागर जी लोगो में विश्वास पैदा कर सके है। उनके कार्य उन्हें देश रक्षक के रूप में सबके सामने ला  रहे है। 
        अब तक राजनेताओ की छवि भोगी और लुटेरो की बन गयी थी। लोगो का मन उनसे विमुख हो गया था , उन्हें बदलने के लिए उन्हें निर्मोही और योगी जो  देश सेवा के लिए जी जान से जुटे   याद  आने लगे इन्हें देख कर लगता है इनमे हालात को बदलने की क्षमता  है। 
    नरेन्द्र मोदी ने अमेरिका और  देश के लाखो लोगो के विरोध के बाबजूद  सतत अपने कार्यो की बदौलत लोगो के मन में अपनी ऐसी छवि बनाई है कि पूरे संसार में उनके सामान दूसरा नेता दिखाई नही देता। भारत देश के किसी नेता का इतना स्वागत उनसे पहले  कभी नही देखा। जिन देशो में भारतीय नेताओ का आना -जाना पता भी नही चलता था। आज उनके भाषण सुनने के लिए उन देशो के सबसे बड़े हॉल चुने जाते है। देश में यातायात के प्रबंध के लिए अनेक गाड़िया चलाई जाती है। दूर जगहों से लोग काम छोड़ कर , उनके स्वागत में जनता से लेकर राष्टयाध्यक्ष तक आंखे बिछाये दिखाई देते है उनके निःस्वार्थ कार्य और देश के लिए अप्रतिम प्रेम उन्हें सबका मुरीद बना देती है। उनकी बैखोफ छवि और निर्णय लेने की क्षमता उन्हें लोगो के अंदर जीवित रखती है। 
      यूपी के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ भी अपने कार्यो की बदौलत यहाँ तक पहुँचे है। उन्होंने समाज को बदलने के लिए राजनीति में कदम रखकर हालात को बदल डाला। उनके अनुसार योगी अध्यात्म के द्वारा केवल अपनी उन्नति नही बल्कि समाज की उन्नति में सहायक होना चाहिए।  उनके असाधारण कार्यो के कारण उन्होंने यूपी गोरखपुर में मठाधीश होते हुए वहाँ शासनव्यवस्था को सुचारू रूप से चलाया। अपराध के लिए बदनाम था। यूपी के गोरखपुर में आदित्यनाथ जी के कारण  सुशासन दिखाई देता है। उनके कामो के कारण एक साधु(आदित्यनाथ)   को बीजेपी ने अपना स्टार प्रचारक बनाया। उनके प्रयोग के लिए हेलीकॉप्टर की व्यवस्था की।  
  1.       उन्होंने मुख्यमंत्री बनते ही एंटी रोमियो स्क्वाड बनाई जिसके कारण लडकिया बिना परेशानी के बाहर निकल सके। 
  2. सफाई के लिए सरकारी कार्यालयों में आदेश दिए। 
  3. पान तम्बाकू पर पाबन्दी लगा दी 
  4. अवैध कत्लखानो पर पाबन्दी लगाई है। 
पशुओ को जो तस्कर ले जा रहे थे उन्हें पकड़ने के आदेश दिए जा रहे है 
      इससे पहले जितना भ्रस्टाचार था वह नेताओ से शुरू होने के कारण कभी ख़त्म नही होता था। वहाँ कोई भी मुख्यमंत्री पदस्थ होने पर अपने वंश को फलता फूलता देखना पसन्द करता था। जनता के पैसो के दोहन में उन्हें कोई बुराई नजर नही आती थी। जो राज्य प्राकृतिक रूप से सम्पन्न था। अब गरीबी की मार झेल रहा था। 
    योगी आदित्यनाथ जी केवल चार घंटे सोते है। पूरे दिन काम करते रहते है। 
   दिगम्बर   जैन मुनि तरुणसागर जी भी देश को आगे बढ़ाने के लिए तन -मन से प्रयास रत है। उन्हें  सुनने के लिए जेनियो के आलावा अन्य धर्मो के लोग भी आते है वे धर्म से लेकर राजनीति तक छाये हुए। जिन्होंने सब कुछ त्याग दिया है। उनसे अधिक समाज के लिए और कौन काम कर सकता है। 
        स्वामी रामदेव जी ने योग को घर -घर तक पंहुचा कर लोगो को स्वस्थ बनाया। उन्होंने प्राणायाम जैसे योग को आसान विधि से लोगो को समझाया जबकि पहले  इसे साधुओ तक सीमित रखा जाता था। 
     रामदेव ब्रांड की स्थापना की जो बहुत सारे सामानों का उत्पादन करती है। लोगो ने विदेशी ब्रांडो के स्थान पर देशी चीजो को महत्व देना शुरू कर दिया है। अब बहुराष्ट्रीय कंपनिया अपनी चीजो में देशी नुस्खों का तड़का लगाने लगी है। 
      श्री रविशंकर जी भी योगी के रूप में अध्यात्म और आयुर्वेद का प्रचार करते नजर आ रहे है। जिसे भारतीयों और विदेशियो ने नकार दिया था। वही आयुर्वेद को लोग अपनाने लगे है। 
    इनके कार्यो को देख कर पुराना  उपन्यास( आनन्दमठ )याद आता है। जिसके साधु  सरकारी  दमनकारी नीतियों से देश को बचाने के लिए उठ खडे  होते  है। इस उपन्यास पर  अंग्रेजो ने पाबन्दी लगा दी थी। लेकिन बन्दे मातरम इस में से लिया गया गीत है। जो देशभक्तो में देश के लिए मर -मिटने के लिए तैयार करता था। 
       हमें फिर से ऐसे योगियो की तलाश है जो देश की उन्नति के लिए प्राणपण से तैयार हो। 
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#modi efect on indian elections2017


                 भारतीय चुनावो पर मोदी का असर 

 चुनावो के नतीजे हमें सोचने पर मजबूर करते हे कि  भारतीय लोकतंत्र जाति आधारित है या विकास आधारित है। जो जातिया समाजवादी पार्टी या बसपा से जुडी हुई थी इस बार उन्होंने भी बीजेपी को अपना अमूल्य वोट दिया।

        इसपर मायावती का बयान चौकानेवाला लगता है। उनके अनुसार वोटिंग मशीन से छेड़छाड़ की गयी है। उनके इस वक्तव्य का मै विरोध करती हूँ। में भी चुनाव अधिकारी के तौर पर काम कर चुकी हूँ। चुनाव अधिकारी पार्टियों के एजेंटो के सामने मशीन तैयार करता है। उसके  सही काम कर ने पर पोलिंग आरम्भ होती है। वरना उनकी सहमति के  बिना काम शुरू नही होता। शुरुआत में बहुत सारे कागजो पर सभी पार्टियों के  एजेंटो  के हस्ताक्षर होते है।
        उन एजेंटो की निगाह प्रत्येक मतदाता की वोटिंग पर रहती है। कुछ भी गलत होने पर वे काम आगे  नही बढ़ने देते।  ये एजेंट उसी इलाके के हर व्यक्ति को अच्छी तरह से जानते है। उनके रहते फर्जी वोटिंग कराई ही नही जा सकती।
        मशीने सील भी एजेंटो के सामने होती है। मशीने शुरू करने के समय और सील होते हुए एजेंट की मुहर लगती है। ये पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ता  होते है। इसके लिए उन्हें पैसे भी दिए जाते है। हर पोलिंग बूथ पर हर पार्टी के दो एजेंट हमेशा होते है। यदि आपको पोलिंग स्टेशन पर पुरे दिन रहने का मौका मिलेगा तो आपको पता चलेगा ये एजेंट कितनी मुस्तेदी से अपना कार्य करते है। 
     यदि एक स्टेशन पर 6 बूथ है। तो किसी न किसी बूथ पर फर्जी वोटिंग को लेकर पार्टी एजेंट  झगड़ा कर रहे होते है। ये पार्टी एजेंट ही एक दूसरे की टांग खीच रहे होते है। इन सबके बीच चुनाव अधिकारी मूक दर्शक की भूमिका निभाते है। ऐसे समय एजेंट और पुलिस ही उनके बीच के मटभेद को सुलझाती है। 
        मशीने सील बंद होकर पहरेदारी में सही जगह पहुचाई जाती है। वहाँ भी सख्त पहरे में गिनती होने तक रहती है। उन जगहों पर भी पार्टी के कार्यकर्ताओ की निगरानी रहती है। 
       मायावती को यूपी में बुरी हार का सामना करना पड़ रहा है। यहाँ की हार वह बर्दास्त नही कर पा रही है। उन्हें देखकर लगता हे खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे। जब तक वह जीतती रही उन्होंने तब कभी वोटिंग मशीन में कमी नही निकाली। 
      इस बार उन्होंने 97 टिकेट मुस्लिंमो को देकर अपनी जीत निश्चित समझ ली लेकिन उनके इस निर्णय से बाकि जाति वाले उनसे विमुख हो गए। जिसके कारण उनका यूपी  से पत्ता  साफ हो गया। 
        समाजवादी नेता अखिलेश यादव भी अपने परिवारिक झगड़ो के कारण चुनावो में हार गए। उनके पिता और परिवार के लोगो को महत्व न देने और भाई -भतीजावाद, भ्रस्टाचार ,अपराधी लोगो को पनाह देने,गायत्री प्रजापति जैसे लोगो को पकड़ने में असमर्थ रहने,जमीनी हकीकत से अनजान रहने और कुछ लोगो की गलत सलाहों    के कारण यूपी में हार का मुख देखना पड़ा। उन्होंने लखनऊ के विकास को पुरे यूपी का विकास समझ लिया। 
      उन्होंने अपनी प्रभावशाली और बेदाग छवि को भुनाने की कोशिश की। लेकिन उनके साथ भ्रस्ट लोगो की छवि ने उनकी चमक धूमिल कर दीयूपी की निरंकुश क़ानूनी व्यवस्था,सरकारी नोकरी में सारे यादवो को महत्व देना। लोगो के मन में यूपी की अराजकता सपा से मतदाताओ को विमुख कर गयी। 
    भाजपा की  बम्पर सफलता सोचने पर मजबूर करती है। मोदी जी का करिश्माई व्यक्तित्व ,सही लोगो को साथ लेकर चलना   ,भ्रटाचारियो के खिलाफ सख्त कदम  ,विकास का प्रतीक बन गए है। सभी के दिमाग में उनकी निस्वार्थ देश सेवा उनके चुनावी रथ को आगे बड़ा रही है। 
       इस चुनाव में सभी जातियो के लोगो ने अपने खास दलो को वोट न देकर, भाजपा को वोट देकर जातिगत संकीर्णताओ से ऊपर उठ कर दिखा दिया है। मुस्लिम समुदाय को भाजपा का विपक्षी समझा जाता था लेकिन उन्होंने दलगत भ्रम का शिकार होने के स्थान पर मोदी जी में विश्वास व्यक्त किया है। मोदीजी की कर्मठ , निस्वार्थ भावना तीन तलाक की नीति और देश का विकास मुस्लिमो को भी उनका मुरीद बना गया है। 

#untold pain of the woman


                                          औरतो का अनकहा दर्द 


 हर साल महिलाओ के उतथान  के लिए अनेक उपाय किये जाते है। संपूर्ण संसार में महिलाओ का उत्थान होते दिखाई नही देता। भारत से लेकर मध्य एशिया तक ओरतो की दयनीय स्थिति लोगो से छिपी नही हे। किसी को यदि नीचा दिखाना है। तो उसके घर की औरतो को अपमानित कर दो वह  जिंदगी भर सिर  उठा नही सकेगा। 
       औरते शारीरिक रूप से कमजोर होने के कारण उनका विरोध नही कर पायेगी। हर समय किसी घर के मर्द ओरतो के साथ नही रह  सकेंगे इसका फायदा अपराधी दिमाग के लोग उठाने से नही चूकते।
        प्राचीन समय में इसी कारण औरते चार -दीवारी में कैद होकर रह गयी थी। उनसे पढ़ाई करने ,काम करने का अधिकार तक छीन लिया गया था। उन्हें अनेक बंधनो में बांध दिया गया था.बहुत लोगो के प्रयास के कारण हम आज सम्मानजनक जीवन जीने के लायक हो सके है। 
         मुझे याद आता है। हमसे  पिछली पीढ़ी की महिलाये अनपढ़ होती थी। उनके अंदर समाज का सामना  करने की ताकत  नही होती थी। किसी आपदा का सामना वह अपने दम पर नही कर पाती थी। घर के पुरुष की मृत्यु का मतलब उस परिवार का खात्मा समझ लिया जाता था। ...अब भारत में ऐसे मामले दिखाई नही देते।
        लेकिन कुछ समय पहले मध्य एशिया के देश की एक औरत की दास्ताँ पढ़ कर हैरान रह गयीउसके घर के एकमात्र पुरुष की मृत्यु होने के कारण आय के लिए , यह 30 साल तक आदमी के  कपड़ो में रह कर, काम करके, अपने घर का गुजारा  चलाती रही वह औरत है। इसका उसने पता नही चलने दिया। 
        मुस्लिम देशो में औरतो की शिक्षा पर पाबन्दी है अभिभाबक भी अनिच्छा से मनमसोस कर इसको मानने को मजबूर होते है। वरना मलाला यूसुफजई जैसे हादसे होते देर नही लगती। पढ़ाई छुड़वाने के लिए कट्टरपंथी विद्यालय तोड़ देते हैऔर  धमकिया देते है। अफ्रीकन देश में एक विद्यालय में पढ़ने वाली 200 लड़कियों का अपहरण करलिया और  उन्हें यौन दासी के रूप में खरीद फरोख्त करते है। उन 200 लड़कियों का पता वहाँ की सरकार 3 साल बाद भी नही लगा सकी  है।  इन हालातो में कितने अभिभावक अपनी लड़कियों को विद्यालय भेज सकेंगे। 
      भारत में दंगल की हीरोइन जायरा बसीम और इंडियन  आइडल की नाहिद आफरीन जैसी लड़कियों को डराने से ऐसे कट्टरपंथी  बाज नही आते। भारत में जहाँ मुस्लिम बहुल तबका रहता है वहाँ कट्टरबादी शरीयत के अनुसार दुबारा से जीवन चलाना चाहते है। जो नियम हजार साल पहले उचित थे। उसमे वे बदलाव पसंद नही करते बल्कि बदलाव लाने वाले को दुनिया से उठा देने में गुरेज नही करते। 
         मुस्लिम कट्टरवाद से सभी देश परेशान है। मोहम्मद पैगम्बर ने चार शादिया करने का नियम इसलिए बनाया था क्योंकि उस समय युद्ध और महामारी के कारण पुरुष आबादी कम हो गयी थी। जिसके कारण अविवाहित महिलाओ की संख्या बहुत बढ़ गयी थी। उन्हें संसार के सभी सुख मिल सके।
          आजकल सीरिया जैसे देसो में ऐसे ही हालत दुबारा से पैदा हो गए है। वहाँ युद्ध में पुरुष मारे जा चुके है या जानमाल की सुरक्षा के लिए देश छोड़ कर जा चुके है। वहाँ काम करने वाली संस्थाओ में यदि महिला कर्मचारी 80 है तो पुरुष कर्मचारी मुश्किल से 3 मिलेंगे।
     सीरिया  की सरकार अविवाहितों की शादियां सामूहिक रूप से सेनिको से करवाती है। विवाह की उम्र को पार कर चुकी अनेक अविवाहित औरते ऐसे देशो में मिल जाएगी। कई देशो में बहुपत्नी प्रथा भी इसी लिए चल रही है क्योंकि पुरुष  आबादी बहुत कम हो गयी है। 
     एक पति की अनेक पत्नी होने के कारण लड़ाईया होना आम है। इससे बचने के लिए तीन तलाक का नियम बनाया गया था।जिसके डर से वे शांति से जीवन यापन कर सके।  लेकिन उसका फायदा आजकल के मुस्लिम मर्द उठा कर एक औरत का जीवन नरक बनाने से गुरेज नही करते। तीन तलाक कह देने भर से वह इंसान पत्नी और बच्चे की जिम्मेदारी से मुक्त हो जाता है। एक मजलूम औरत सारी जिंदगी कैसे इस जिम्मेदारी को निभाती है। इस बारे में वह सोचना भी नही चाहता।पुरुष अनेक शादी करना अपना हक़ समझने लगे है। भले ही उनका गुजारा चलाने लायक उनकी आमदनी न हो। 
         युद्ध प्रभावित मुस्लिम देशो में हर औरत के लिए कमसकम 10 बच्चे पैदा करना जरूरी है। क्योंकि युद्ध के कारण मृत्यु दर  बढ़ गयी है। दवाइयों और खाने के आभाव में एक नवजात को, जिंदगी पर खेल कर जन्म देना ,फिर  भूख और  बीमारियों से लड़ते हुए, खाने और दवाइयों के आभाव में दम तोड़ते हुए बच्चो की लाश देखना उस औरत के लिए कितना दुखदाई होता है। सृजन की प्रतीक महिला  को, विनाश के पहाड़ पर ला खड़ा कर दिया जाता है। बच्चे की मौत के साथ वह भी टूटने लगती है। 
         आइसिस के सैनिक अपहृत महिलाओ को जबरदस्ती अपने सामने गर्भनिरोधक खाने पर मजबूर करते है। जिससे उन्हें उनकी खरीद -फरोख्त में आसानी हो। अपने बच्चे होने पर  उनके अंदर पिता की ममता न जाग जाये। 
       कई देशो में युद्ध में पुरुषो ,वृद्धो और बच्चो  को उस घर की औरतो के सामने मार दिया जाता है। उस घर की औरतो के साथ सामूहिक बलात्कार करके उन्हें अनचाही माँ बना दिया जाता है। अनेक देशो में देखा गया है। ऐसे परिवारहंता के बच्चो को औरते अपना नही पाती है।  उनका दर्द उन्हें तड़पाता रहता है। 
        मध्यएशिया के देशो में गर्म जलवायु और पानी की कमी के कारण पूरा शरीर ढकने वाले कपड़ो का चलन चला।शरीर का पसीना हवा के सम्पर्क में जल्दी आकर उड़ जायेगा जिससे शरीर में पानी की कमी के कारण मौत होने का खतरा होगा। पुरुष और स्त्री दोनों पूरा शरीर ढकने वाले कपड़े पहनते थे  लेकिन पुरुष आधुनिक कपड़े पहनने लगे लेकिन औरतो को आज भी बुरका पहनने के लिए मजबूर किया जाता है। 
      आज भी औरतों को आगे बढ़ाने के लिए उपाय करने बहुत जरूरी है। यदि आधी आबादी प्रगति में सहायक नही होगी तो देश आगे नही बढ़ सकेगा। 
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  शादी के समय दोनों अलग  माहौल  से आए होते हैं, जिसके कारण दोनों अपने साथी को अपने जैसा बनाना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि दूसरा उसके जैसा व...